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भोजपुरी संस्कृत और हिंदी पर निर्भर है
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गाजीपुर। जनकल्याण परिषद गाजीपुर द्वारा भारतीय भाषा संस्थान भारत सरकार के सहयोग से रीता मिश्रा इंटर कालेज शाहपुर के सभागार में भोजपुरी भाषा का विकास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस बीच परिषद के निदेशक सूर्यभान सिंह ने कहा कि भोजपुरी शब्द का निर्माण बिहार का प्राचीन जिला भोजपुर के आधार पर हुआ है। भोजपुरी अपनी शब्दावली के लिए संस्कृत और हिंदी पर निर्भर है।
उन्होंने कहा कि भाषायी परिवार के स्तर पर भोजपुरी एक आर्य भाषा है और मुख्य रूप से पश्चिम बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तरी झारखंड के क्षेत्रों में बोली जाती है। अधिकारिक एवं व्यवहारिक रूप से भोजपुरी हिंदी की एक उपभाषा या बोली है। भोजपुरी जानने एवं समझने वाले का विस्तार विश्व के सभी प्रायद्वीपों पर है। पूरे विश्व में भोजपुरी बोलने वालों की संख्या लगभग 16 करोड़ है। उन्होंने कहा कि भोजपुरी प्राचीन समय से कैफी लिपि में लिखी जाती है। भोजपुरी का साहित्य काफी समृद्ध है, जिसमें कविता, उपन्यास निबंध, रिपोर्ताज मुख्य है। मुख्य अतिथि नेहरू युवा केंद्र के प्रभारी सुभाष प्रजापति ने भोजपुरी भाषा को भोजपुरी समाज की भाषा बताते हुए कहा कि हमारे यहां भोजपुरी समाज के सारे संस्थान भोजपुरी गीतों के माध्यम से किए जाते हैं। बच्चे के जन्म के समय से लेकर मृत्युपर्यंत भोजपुरी गीतों का प्रयोग किया जाता है। विशेष रूप से बच्चों के जन्म के समय सोहर, विवाह के समय विवाह गीत तथा जीत-त्योहारों में मौसम के अनुसार भोजपुरी गीत गाए जाते है। सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुरुआत करते हुए लोकगीत गायक रामकृत यादव ने विभिन्न सुविधाओं में भोजपुरी गीत की प्रस्तुत किया। डा. एसएन सिंह ने लोगों से भोजपुरी भाषा के विकास में सहयोग करने की अपील की। कार्यक्रम में महेंद्र कुशवाहा, शिवशंकर, विजय बहादुर, संतारा सिंह, रामाधार यादव, रामनरेश ने भी विचार व्यक्त किये। अध्यक्षता उपेंद्र मिश्र तथा संचालन मुन्ना भारती ने किया। अंत में परिषद की तरफ से माधव कृष्ण ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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उन्होंने कहा कि भाषायी परिवार के स्तर पर भोजपुरी एक आर्य भाषा है और मुख्य रूप से पश्चिम बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तरी झारखंड के क्षेत्रों में बोली जाती है। अधिकारिक एवं व्यवहारिक रूप से भोजपुरी हिंदी की एक उपभाषा या बोली है। भोजपुरी जानने एवं समझने वाले का विस्तार विश्व के सभी प्रायद्वीपों पर है। पूरे विश्व में भोजपुरी बोलने वालों की संख्या लगभग 16 करोड़ है। उन्होंने कहा कि भोजपुरी प्राचीन समय से कैफी लिपि में लिखी जाती है। भोजपुरी का साहित्य काफी समृद्ध है, जिसमें कविता, उपन्यास निबंध, रिपोर्ताज मुख्य है। मुख्य अतिथि नेहरू युवा केंद्र के प्रभारी सुभाष प्रजापति ने भोजपुरी भाषा को भोजपुरी समाज की भाषा बताते हुए कहा कि हमारे यहां भोजपुरी समाज के सारे संस्थान भोजपुरी गीतों के माध्यम से किए जाते हैं। बच्चे के जन्म के समय से लेकर मृत्युपर्यंत भोजपुरी गीतों का प्रयोग किया जाता है। विशेष रूप से बच्चों के जन्म के समय सोहर, विवाह के समय विवाह गीत तथा जीत-त्योहारों में मौसम के अनुसार भोजपुरी गीत गाए जाते है। सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुरुआत करते हुए लोकगीत गायक रामकृत यादव ने विभिन्न सुविधाओं में भोजपुरी गीत की प्रस्तुत किया। डा. एसएन सिंह ने लोगों से भोजपुरी भाषा के विकास में सहयोग करने की अपील की। कार्यक्रम में महेंद्र कुशवाहा, शिवशंकर, विजय बहादुर, संतारा सिंह, रामाधार यादव, रामनरेश ने भी विचार व्यक्त किये। अध्यक्षता उपेंद्र मिश्र तथा संचालन मुन्ना भारती ने किया। अंत में परिषद की तरफ से माधव कृष्ण ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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