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जमानिया में पुल का एप्रोच अधूरा
Updated Wed, 28 Nov 2018 11:43 PM IST
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जमानिया(गाजीपुर)। जमानिया में डेढ़ वर्षों से गंगा पर बनने वाला पुल अधर में लटका हुआ है। इस पुल की नींव वर्ष 2006 में रखी गई थी। भाजपा सरकार में पुल का निर्माण काफी तेजी से किया गया, लेकिन आज तक इसका एप्रोच अधूरा पड़ा है। इससे लोगों को पुल की सुविधा का अभी भी इंतजार है। हालांकि अभी पुल के एप्र्रोच मार्ग के लिए भूमि का अधिग्रहण तक नहीं हो सका है।
वर्ष 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने जमानियां क्षेत्र को करंडा क्षेत्र से जोड़ने के लिए गंगा नदी पर पक्का पुल की आधारशिला रखी थी। निर्माण का दायित्व संभालने वाली यूपी सेतु निर्माण निगम के हवाले से तब दावा किया गया था कि यह पुल महज ढाई वर्षों में बन कर तैयार हो जाएगा। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। चुनाव के बाद सत्ता पर काबिज बसपा सरकार ने इस सेतु के निर्माण को पांच वर्ष तक प्राथमिकता में शामिल नहीं की। जिससे सेतु का निर्माण 25 प्रतिशत भी पूरा नहीं हो सका। अखिलेश यादव ने भी अपने पिता का मान रखते हुए एलान कर दिया कि उनके पिता के हाथों यूपी में जितने भी पुलों का शिलान्यास हुआ था, उन सभी को डेढ़ वर्ष के अंदर बनवा दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अखिलेश यादव के पांच वर्षों के कार्यकाल में भी पुल का निर्माण कच्छप गति से आगे बढ़ता रहा। 14 वर्षों का वनवास काट कर भाजपा सत्ता में आई और सत्ता की कमान संभालते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार को एक्शन वाली सरकार बताया। लोगों को पुल निर्माण की गति तेज होने की उम्मीद जगी। सरकार ने आवाम के इस उम्मीद पर खरा उतरते हुए कच्छप गति से हुए 35 फीसदी निर्माण कार्य को चीते की चाल पकड़ा दिया। अप्रैल 2017 से निर्माण ने जोर पकड़ा तो महज 13 महीने में ही जून 2018 तक, करीब एक किलोमीटर लंबा और 20 पिलरों वाला दो लेन का पक्का सेतु बनकर तैयार हो गया। हालांकि पुल बनकर तैयार होने के बाद भी दोनों तरफ एप्रोच मार्ग के अभाव में पुल अधर में लटका हुआ है। जबकि पुल के अभाव में लोग नाव के सहारे जान जोखिम में डाल कर नदी पार कर रहे हैं। अमूमन पुल का निर्माण अंतिम चरण में होता है, तभी दोनों तरफ एप्रोच मार्ग का निर्माण करा दिया जाता है। परंतु जमानियां का यह पुल यूपी का शायद पहला ऐसा पुल है जो बनकर तैयार होने के पांच महीने बाद भी हवा में लटका हुआ है। एप्रोच मार्ग बनाने के लिए अभी तक जमीन का अधिग्रहण नहीं किया गया है। ऐसे में एप्रोच निर्माण का जिम्मा लेने वाला लोक निर्माण विभाग भी हाथ पर हाथ धरे बैठा है। प्रशासनिक अधिकारी समय रहते अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किए होते, तो आज लाखों की आबादी का सफर आसान हो गया होता।
इनसेट...
पुल से यूपी ही नहीं बिहार को भी होगा फायदा
जमानिया। गंगा पर बनने वाले पुल के अधर में लटके होने से जमानिया, गहमर और बिहार प्रांत से आने वाले लोगों को गाजीपुर होकर करंडा, नंदगंज, वाराणसी आदि जगहों का सफर करना पड़ रहा है। यही हाल करंडा के लोगों का भी है। इस कवायद में 70 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करना पड़ रहा है। समय के साथ धन की भी बर्बादी हो रही है। तेज गति से पुल का निर्माण कराने पर योगी सरकार की पीठ थपथपा चुके लोग एप्रोच मार्ग के निर्माण में हो रही देरी से अपनी धारणा को बदलता देख रहे हैं।
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वर्ष 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने जमानियां क्षेत्र को करंडा क्षेत्र से जोड़ने के लिए गंगा नदी पर पक्का पुल की आधारशिला रखी थी। निर्माण का दायित्व संभालने वाली यूपी सेतु निर्माण निगम के हवाले से तब दावा किया गया था कि यह पुल महज ढाई वर्षों में बन कर तैयार हो जाएगा। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। चुनाव के बाद सत्ता पर काबिज बसपा सरकार ने इस सेतु के निर्माण को पांच वर्ष तक प्राथमिकता में शामिल नहीं की। जिससे सेतु का निर्माण 25 प्रतिशत भी पूरा नहीं हो सका। अखिलेश यादव ने भी अपने पिता का मान रखते हुए एलान कर दिया कि उनके पिता के हाथों यूपी में जितने भी पुलों का शिलान्यास हुआ था, उन सभी को डेढ़ वर्ष के अंदर बनवा दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अखिलेश यादव के पांच वर्षों के कार्यकाल में भी पुल का निर्माण कच्छप गति से आगे बढ़ता रहा। 14 वर्षों का वनवास काट कर भाजपा सत्ता में आई और सत्ता की कमान संभालते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार को एक्शन वाली सरकार बताया। लोगों को पुल निर्माण की गति तेज होने की उम्मीद जगी। सरकार ने आवाम के इस उम्मीद पर खरा उतरते हुए कच्छप गति से हुए 35 फीसदी निर्माण कार्य को चीते की चाल पकड़ा दिया। अप्रैल 2017 से निर्माण ने जोर पकड़ा तो महज 13 महीने में ही जून 2018 तक, करीब एक किलोमीटर लंबा और 20 पिलरों वाला दो लेन का पक्का सेतु बनकर तैयार हो गया। हालांकि पुल बनकर तैयार होने के बाद भी दोनों तरफ एप्रोच मार्ग के अभाव में पुल अधर में लटका हुआ है। जबकि पुल के अभाव में लोग नाव के सहारे जान जोखिम में डाल कर नदी पार कर रहे हैं। अमूमन पुल का निर्माण अंतिम चरण में होता है, तभी दोनों तरफ एप्रोच मार्ग का निर्माण करा दिया जाता है। परंतु जमानियां का यह पुल यूपी का शायद पहला ऐसा पुल है जो बनकर तैयार होने के पांच महीने बाद भी हवा में लटका हुआ है। एप्रोच मार्ग बनाने के लिए अभी तक जमीन का अधिग्रहण नहीं किया गया है। ऐसे में एप्रोच निर्माण का जिम्मा लेने वाला लोक निर्माण विभाग भी हाथ पर हाथ धरे बैठा है। प्रशासनिक अधिकारी समय रहते अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किए होते, तो आज लाखों की आबादी का सफर आसान हो गया होता।
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पुल से यूपी ही नहीं बिहार को भी होगा फायदा
जमानिया। गंगा पर बनने वाले पुल के अधर में लटके होने से जमानिया, गहमर और बिहार प्रांत से आने वाले लोगों को गाजीपुर होकर करंडा, नंदगंज, वाराणसी आदि जगहों का सफर करना पड़ रहा है। यही हाल करंडा के लोगों का भी है। इस कवायद में 70 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करना पड़ रहा है। समय के साथ धन की भी बर्बादी हो रही है। तेज गति से पुल का निर्माण कराने पर योगी सरकार की पीठ थपथपा चुके लोग एप्रोच मार्ग के निर्माण में हो रही देरी से अपनी धारणा को बदलता देख रहे हैं।
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