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टीबी रोग के लक्षण मिलने वाले लोगों को जानकारी दी
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गाजीपुर। जिला क्षयरोग विभाग की ओर से 23 से 28 मार्च तक विश्व क्षय रोग दिवस मनाया जा रहा है। इसी क्रम में मंगलवार को जिला क्षयरोग कार्यालय परिसर में टीबी दिवस जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में क्षय रोग से पीड़ित और लक्षण के आधार पर चिह्नित रोगियों बीमारी के प्रति जागरूक किया गया। बता दें कि छह दिवसीय ट्यूबर क्लोसिस डिजिज जागरूकता अभियान में जिले में कार्यरत सभी सात टीबी यूनिट के माध्यम से टीबी के लक्षण और उससे बचाव के बारे में जागरूकता का कार्य किया जा रहा है।
जिला समन्वयक डॉ. मिथिलेश सिंह ने बताया कि इस जागरूकता अभियान के तहत 23 मार्च को मुहम्मदाबाद के सरायबहादुर में हेल्थ कैंप का आयोजन किया गया था, जबकि 25 मार्च को कासिमाबाद, सुभाकरपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और जखनिया में मदरसा के शिक्षक और छात्रों के बीच किया गया। इस अवसर पर सभी को टीबी के लक्षण एवं उसके निदान और जांच के साथ ही मरीजों को दी जाने वाली डीबीटी योजना और दवा के बारे में जानकारी दी गई। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि वर्ष 2018 में सरकारी स्तर पर 2756 मरीज मिले, जबकि प्राइवेट स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से 733 मरीजों को चिन्हित किया गया था। एमडीआर यानी मल्टी ड्रग रेसिस्टेंस के 127 मरीज मिले थे। सभी को इलाज पर रखकर डीबीटी योजना का लाभ दिया जा रहा है। 2019 के लिए शासन स्तर से 4628 मरीजों के इलाज का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि टीबी को तपेदिक के नाम से भी जाना जाता है। यह बीमारी किसी भी राष्ट्र के लोगों के लिए बहुत बड़ी बीमारी है। जिसको फैलने से रोकने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। विश्व टीबी दिवस 24 मार्च को हर वर्ष मनाया जाता है। यह एक ऐसी बीमारी है, जिसके प्रति लोगों को जागरूक करना बहुत जरूरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में सबसे ज्यादा टीबी के मरीज हैं। भारत में 2016 के अनुसार टीबी से 4.2 लाख टीबी के मरीजों की मृत्यु हो चुकी है। इस आंकड़े के अनुसार अनुमान लगाया जा सकता है कि यह बीमारी कितनी जानलेवा है।
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जिला समन्वयक डॉ. मिथिलेश सिंह ने बताया कि इस जागरूकता अभियान के तहत 23 मार्च को मुहम्मदाबाद के सरायबहादुर में हेल्थ कैंप का आयोजन किया गया था, जबकि 25 मार्च को कासिमाबाद, सुभाकरपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और जखनिया में मदरसा के शिक्षक और छात्रों के बीच किया गया। इस अवसर पर सभी को टीबी के लक्षण एवं उसके निदान और जांच के साथ ही मरीजों को दी जाने वाली डीबीटी योजना और दवा के बारे में जानकारी दी गई। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि वर्ष 2018 में सरकारी स्तर पर 2756 मरीज मिले, जबकि प्राइवेट स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से 733 मरीजों को चिन्हित किया गया था। एमडीआर यानी मल्टी ड्रग रेसिस्टेंस के 127 मरीज मिले थे। सभी को इलाज पर रखकर डीबीटी योजना का लाभ दिया जा रहा है। 2019 के लिए शासन स्तर से 4628 मरीजों के इलाज का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि टीबी को तपेदिक के नाम से भी जाना जाता है। यह बीमारी किसी भी राष्ट्र के लोगों के लिए बहुत बड़ी बीमारी है। जिसको फैलने से रोकने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। विश्व टीबी दिवस 24 मार्च को हर वर्ष मनाया जाता है। यह एक ऐसी बीमारी है, जिसके प्रति लोगों को जागरूक करना बहुत जरूरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में सबसे ज्यादा टीबी के मरीज हैं। भारत में 2016 के अनुसार टीबी से 4.2 लाख टीबी के मरीजों की मृत्यु हो चुकी है। इस आंकड़े के अनुसार अनुमान लगाया जा सकता है कि यह बीमारी कितनी जानलेवा है।
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