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व्यक्ति अगर व्यक्ति से प्रेम करना सीख ले तो समाज स्वस्थ रहेगा

Wed, 27 Dec 2017 11:13 PM IST
Updated Wed, 27 Dec 2017 11:13 PM IST
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व्यक्ति अगर व्यक्ति से प्रेम करना सीख ले तो समाज स्वस्थ रहेगा
सुहवल। क्षेत्र के बवाड़ा गांव स्थित गंगा तट पर एक कुंडीय श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ एवं रामचरितमानस कथा आयोजित है। छठवें दिन बुधवार को अयोध्या से आए शिवराम दास फलहारी बाबा ने भौतिकता और आध्यात्मिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक व्यक्ति है दूसरी वस्तु लेकिन वस्तु व्यक्ति के लिए है न कि व्यक्ति वस्तु के लिए। व्यक्ति अगर व्यक्ति से प्रेम करना सीख ले तो समाज स्वस्थ रहेगा लेकिन आज के समाज में इसकी परिभाषा बदल गई है।
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उन्होंने कहा कि आज हर क्षेत्र में जड़ता फैल रही है। आध्यात्मिकता दर्शन को महत्व देता है प्रदर्शन को नहीं। तीन शब्द महत्व के हैं दर्शन, तत्व दर्शन और आध्यात्म। उसी के कारण भारतीय संस्कृति में विविध प्रकार के दर्शन हमें प्राप्त हुए हैं। आज वस्तु से प्रेम के चलते दर्शनवादी मिटकर प्रदर्शनवादी बनते जा रहे हैं। कथा वाचक फलहारी बाबा ने कहा कि हमारे यहां चार पुरुषार्थ हैं-धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। चारो तरफ कीर्ति और प्रदर्शन की जबरदस्त स्पर्धा दिख रही है। समाज को इस जड़ता से कोई बाहर निकाल सकता है तो वह है आध्यात्मिकता। आध्यात्मिकता स्व के लाभ के साथ समाज को जोड़ती है, जबकि भौतिकता इंसान और समाज को तोड़ती है।
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