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पौने चौबीस लाख का बिजली बिल देख उड़े होश
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मुहम्मदाबाद(गाजीपुर)। नगर के शैवटोला निवासी उमाशंकर गुप्ता के उस समय होश उड़ गए जब मीटर रीडर ने उन्हें 23 लाख 67 हजार 434 रुपये का बिजली बिल थमाया। घरेलू बत्ती और पंखे का बिल देख पूरा परिवार चिंता में डूबा हुआ है। यह बिल महज एक महीने का है। खास बात यह है कि दो माह पहले भी बिजली के बिल में गड़बड़ी हुई थी, जिसे काफी दौड़-धूप करने के बाद किसी तरह दुरुस्त कराया गया था। बिजली विभाग के अधिकारी इसे तकनीकी गड़बड़ी मानते हुए बिल संशोधित कर देने की बात कर रहे हैं।
इसे विभाग की लापरवाही कहें या तकनीकी गड़बड़ी। बिल में बार-बार हो रही गड़बड़ी से उपभोक्ता काफी परेशान हैं। संशोधन कराने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को सुविधा शुल्क देना पड़ता है। पहले बिल में गड़बड़ी, फिर संशोधन के लिए धन उगाही बिजली विभाग के लिए आम बात हो गई है। उमाशंकर एक किलोवाट के उपभोक्ता हैं। पूर्व में करीब 22 हजार का बिल आया था। जिसे ठीक कराने के बाद अक्तूबर माह में उन्होंने संशोधित राशि 696 रुपये जमा किया। संशोधन के लिए जहां काफी भागदौड़ करनी पड़ी, वहीं सुविधा शुल्क भी लिया गया। इसके बाद नवंबर माह में सामान्य बिल आया। जिसका उन्होंने राशि 145 रुपये जमा किया। अभी हाल ही में घर आए मीटर रीडर ने 19 नवंबर से 21 दिसंबर 2018 तक का बिल 23 लाख 67 हजार 434 का बिल निकाल दिया। यह बिल देख परिजनों के होश उड़ गए। अब इस बिल के संशोधन के लिए उपभोक्ता विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। एसडीओ आरके यादव ने बताया कि मीटर रीडिंग मेें तकनीकी गड़बड़ी से ऐसा हुआ है। बिल को संशोधित कर दिया जाएगा। उधर, अधीक्षण अभियंता आरआर प्रसाद ने बताया कि बिल में त्रुटिवश गड़बड़ी हुई है। इसे संशोधित कर उपभोक्ता को न्याय दिया जाएगा। हालांकि इस प्रकरण में अभी तक किसी ने हमसे शिकायत नहीं की है।
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इसे विभाग की लापरवाही कहें या तकनीकी गड़बड़ी। बिल में बार-बार हो रही गड़बड़ी से उपभोक्ता काफी परेशान हैं। संशोधन कराने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को सुविधा शुल्क देना पड़ता है। पहले बिल में गड़बड़ी, फिर संशोधन के लिए धन उगाही बिजली विभाग के लिए आम बात हो गई है। उमाशंकर एक किलोवाट के उपभोक्ता हैं। पूर्व में करीब 22 हजार का बिल आया था। जिसे ठीक कराने के बाद अक्तूबर माह में उन्होंने संशोधित राशि 696 रुपये जमा किया। संशोधन के लिए जहां काफी भागदौड़ करनी पड़ी, वहीं सुविधा शुल्क भी लिया गया। इसके बाद नवंबर माह में सामान्य बिल आया। जिसका उन्होंने राशि 145 रुपये जमा किया। अभी हाल ही में घर आए मीटर रीडर ने 19 नवंबर से 21 दिसंबर 2018 तक का बिल 23 लाख 67 हजार 434 का बिल निकाल दिया। यह बिल देख परिजनों के होश उड़ गए। अब इस बिल के संशोधन के लिए उपभोक्ता विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। एसडीओ आरके यादव ने बताया कि मीटर रीडिंग मेें तकनीकी गड़बड़ी से ऐसा हुआ है। बिल को संशोधित कर दिया जाएगा। उधर, अधीक्षण अभियंता आरआर प्रसाद ने बताया कि बिल में त्रुटिवश गड़बड़ी हुई है। इसे संशोधित कर उपभोक्ता को न्याय दिया जाएगा। हालांकि इस प्रकरण में अभी तक किसी ने हमसे शिकायत नहीं की है।
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