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कविताओं से श्रोताओं को झूमने पर किया मजबूर
Updated Mon, 05 Nov 2018 11:53 PM IST
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सुहवल। साहित्य परिषद डेढ़गांवा की ओर से डेढ़गांवा में रविवार को सरस कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सच्चिदानंद राय चाचा ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर कवियों ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
सम्मेलन की शुरूआत मां वीणापाणि की वंदना से हुई। इसके बाद बिहार से आए डॉ. विनोद कैमूरी ने भले तन धूल धुसरित हो वो मन मैला नहीं होता, वतन के वीर सपूतों का कफन मैला नहीं होता एवं गोपाल गौरव ने कहीं मस्जिद कहीं शिवाला है, फिर भी होता नहीं उजाला है सुनाकर श्रोताओं की सराहना बटोरी। डॉ अक्षय पांडेय ने एक पल तू गीत जैसा मन बना ले संग मेरे गुनगुना ले, वक्त की खामोशियां छट जाएंगी तथा हास्य कवि फ़जीहत गहमरी ने अपनी दिलकश अदाओं से निमंत्रण मूक देती है, गिराके हुस्न की बिजली मेरा दिल फूंक देती है। करूं मैं किस तरह से प्यार का इजहार तुम बोलो, मैं उसको फूल देता हूं वो मुंह पर थूक देती है पर खूब वाहवाही लूटी। उत्तम चौबे की रचना जेठ बैसखवा के तपे दुपहरिया, नाचे ला घाम मोर बखरिया, हास्य कवि बद्री विशाल ने थमहा के नीम हमहन के उ चंदन ले गइल राजा, कारोबार समेट आपन लंदन ले गइल राजा प्रस्तुत की। इसके अलावा मिथिलेश गहमरी, दामोदर दबंग, विनय राय बबुरंग, आनंद कुशवाहा आदि कवियों ने काव्य पाठ कर कार्यक्रम को ऊंचाई प्रदान की। कवि सम्मेलन का संचालन कुमार प्रवीण ने किया। अंत में कार्यक्रम के आयोजक कैलाश कुशवाहा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
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सम्मेलन की शुरूआत मां वीणापाणि की वंदना से हुई। इसके बाद बिहार से आए डॉ. विनोद कैमूरी ने भले तन धूल धुसरित हो वो मन मैला नहीं होता, वतन के वीर सपूतों का कफन मैला नहीं होता एवं गोपाल गौरव ने कहीं मस्जिद कहीं शिवाला है, फिर भी होता नहीं उजाला है सुनाकर श्रोताओं की सराहना बटोरी। डॉ अक्षय पांडेय ने एक पल तू गीत जैसा मन बना ले संग मेरे गुनगुना ले, वक्त की खामोशियां छट जाएंगी तथा हास्य कवि फ़जीहत गहमरी ने अपनी दिलकश अदाओं से निमंत्रण मूक देती है, गिराके हुस्न की बिजली मेरा दिल फूंक देती है। करूं मैं किस तरह से प्यार का इजहार तुम बोलो, मैं उसको फूल देता हूं वो मुंह पर थूक देती है पर खूब वाहवाही लूटी। उत्तम चौबे की रचना जेठ बैसखवा के तपे दुपहरिया, नाचे ला घाम मोर बखरिया, हास्य कवि बद्री विशाल ने थमहा के नीम हमहन के उ चंदन ले गइल राजा, कारोबार समेट आपन लंदन ले गइल राजा प्रस्तुत की। इसके अलावा मिथिलेश गहमरी, दामोदर दबंग, विनय राय बबुरंग, आनंद कुशवाहा आदि कवियों ने काव्य पाठ कर कार्यक्रम को ऊंचाई प्रदान की। कवि सम्मेलन का संचालन कुमार प्रवीण ने किया। अंत में कार्यक्रम के आयोजक कैलाश कुशवाहा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
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