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मां भगवती की आराधना परम कल्याणकारी
Updated Tue, 16 Oct 2018 11:36 PM IST
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जखनियां(गाजीपुर)। सिद्धपीठ हथियाराम मठ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति महाराज ने कहा कि इस कर्मभूमि के सपूतों के लिए मां दुर्गा की पूजा एवं आराधना कल्याणकारी है। नवरात्र में दुर्गाष्टमी एवं महानवमी पूजन का बड़ा ही महत्व है। अष्टमी एवं नवमी की कल्याणप्रद, शुभ बेला श्रद्धालुओं को मनोवांछित फल देने वाली है।
उन्होंने कहा कि मां दुर्गा की आराधना से व्यक्ति जीवन के अनेक शुभ लक्षणों धन, ऐश्वर्य, पत्नी, पुत्र, पौत्र एवं स्वास्थ्य से युक्त हो मोक्ष को भी सहज ही प्राप्त कर लेता है। बीमारी, महामारी, बाढ़, सूखा, प्राकृतिक उपद्रव एवं शत्रु से घिरे हुए किसी राज्य, देश एवं संपूर्ण विश्व के लिए भी मां भगवती की आराधना परम कल्याणकारी है। इस पूजा में पवित्रता, नियम एवं संयम तथा ब्रह्मचर्य का विशेेष महत्व है। पूजा के समय घर एवं देवालय को तोरण एवं विविध प्रकार के मांगलिक पत्र, पुष्पों से सजाना चाहिए तथा स्थापित सभी देवी-देवताओं का आह्वान उनके नाम मंत्रों से षोडषोपचार पूजा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मां भगवती संपूर्ण जगत में परमशक्ति अनंता, सर्वव्यापिनी, भावगम्या, आद्या आदि नाम से विख्यात है। जिन्हें माया, कात्यायनी, काली, दुर्गा, चामुंडा, सर्वमंगला, शंकरप्रिया, जगत जननी, जगदंबा, भवानी आदि अनेक रूपों में देव, दानव, राक्षस, गंधर्व, नाग, यक्ष, किन्नर, मनुष्य आदि अष्टमी एवं नवमी को पूजते हैं। मां भगवती का पूजन अष्टमी एवं नवमी को करने से कष्ट, दुख मिट जाते हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। यह तिथि परम कल्याणकारी, पवित्र, सुख को देने वाली और धर्म की वृद्धि करने वाली है।
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उन्होंने कहा कि मां दुर्गा की आराधना से व्यक्ति जीवन के अनेक शुभ लक्षणों धन, ऐश्वर्य, पत्नी, पुत्र, पौत्र एवं स्वास्थ्य से युक्त हो मोक्ष को भी सहज ही प्राप्त कर लेता है। बीमारी, महामारी, बाढ़, सूखा, प्राकृतिक उपद्रव एवं शत्रु से घिरे हुए किसी राज्य, देश एवं संपूर्ण विश्व के लिए भी मां भगवती की आराधना परम कल्याणकारी है। इस पूजा में पवित्रता, नियम एवं संयम तथा ब्रह्मचर्य का विशेेष महत्व है। पूजा के समय घर एवं देवालय को तोरण एवं विविध प्रकार के मांगलिक पत्र, पुष्पों से सजाना चाहिए तथा स्थापित सभी देवी-देवताओं का आह्वान उनके नाम मंत्रों से षोडषोपचार पूजा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मां भगवती संपूर्ण जगत में परमशक्ति अनंता, सर्वव्यापिनी, भावगम्या, आद्या आदि नाम से विख्यात है। जिन्हें माया, कात्यायनी, काली, दुर्गा, चामुंडा, सर्वमंगला, शंकरप्रिया, जगत जननी, जगदंबा, भवानी आदि अनेक रूपों में देव, दानव, राक्षस, गंधर्व, नाग, यक्ष, किन्नर, मनुष्य आदि अष्टमी एवं नवमी को पूजते हैं। मां भगवती का पूजन अष्टमी एवं नवमी को करने से कष्ट, दुख मिट जाते हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। यह तिथि परम कल्याणकारी, पवित्र, सुख को देने वाली और धर्म की वृद्धि करने वाली है।
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