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केंद्रों पर ताला लटका रहने से नौनिहालों को नहीं मिल रहा पोषाहार
Updated Fri, 08 Dec 2017 10:41 PM IST
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गाजीपुर। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की हड़ताल से आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन ठप है। विभिन्न ब्लाकों के सैकड़ों केंद्रों पर इन दिनों ताला लटका हुआ है। ऐसे में कुपोषित नौनिहालों को पोषाहार नहीं मिल पा रहा है। करीब डेढ़ माह से जिले के आंगनबाड़ी केंद्र बंद चल रहे हैं। केंद्र बंद होने से नौनिहाल मायूस हो वापस घर लौट जा रहे हैं, वहीं गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में कुल 17 बाल विकास परियोजनाएं संचालित हैं। इनमें 16 ग्रामीण क्षेत्रों के साथ एक नगर में संचालित किया जाता है। इन 17 बाल विकास परियोजनाओं में 3579 आंगनबाड़ी केंद्र तथा कुल 539 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र संचालित होते हैं। इस तरह से जिले के कुल 4118 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम पर छह माह से लेकर तीन साल तक के बच्चों को पौष्टिक आहार के रूप में पोषाहार वितरित करने के साथ ही उन्हें पढ़ने-लिखने का ढंग सिखाया जाता है। यही नहीं इन केंद्रों के माध्यम से गर्भवती और धात्री महिलाओं का भी ध्यान रखा जाता है।
पिछले डेढ़ माह से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के निरंरत चल रहे हड़ताल की वजह से गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के साथ ही नौनिहालों को इन दिनों केंद्र की सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वजह उनकी 13 सूत्रीय मांगें हैं, जिसे सरकार पूरा नहीं कर रही है। इसे लेकर अक्तूबर माह के अंतिम सप्ताह से हड़ताल जारी है। करीब डेढ़ महीने से जनपद के कई विकास खंडों में स्थित करीब डेढ़ हजार केंद्रों पर ताला लटका हुआ है। पोषाहार की चाह में केंद्र पर आने वाले नौनिहालों को खाली हाथ घर जाना पड़ रहा हैै। हड़ताल की वजह से वजन दिवस भी फ्लाप साबित हो रहा है। बताया गया कि पिछले महीने पोषाहार नहीं आया था। इस संबंध में जिला कार्यक्रम अधिकारी अमरनाथ मौर्य ने बताया कि अधिकांश केंद्र संचालित हो रहे हैं, जो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आंदोलनरत हैैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही हैै।
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जिले में कुल 17 बाल विकास परियोजनाएं संचालित हैं। इनमें 16 ग्रामीण क्षेत्रों के साथ एक नगर में संचालित किया जाता है। इन 17 बाल विकास परियोजनाओं में 3579 आंगनबाड़ी केंद्र तथा कुल 539 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र संचालित होते हैं। इस तरह से जिले के कुल 4118 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम पर छह माह से लेकर तीन साल तक के बच्चों को पौष्टिक आहार के रूप में पोषाहार वितरित करने के साथ ही उन्हें पढ़ने-लिखने का ढंग सिखाया जाता है। यही नहीं इन केंद्रों के माध्यम से गर्भवती और धात्री महिलाओं का भी ध्यान रखा जाता है।
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पिछले डेढ़ माह से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के निरंरत चल रहे हड़ताल की वजह से गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के साथ ही नौनिहालों को इन दिनों केंद्र की सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वजह उनकी 13 सूत्रीय मांगें हैं, जिसे सरकार पूरा नहीं कर रही है। इसे लेकर अक्तूबर माह के अंतिम सप्ताह से हड़ताल जारी है। करीब डेढ़ महीने से जनपद के कई विकास खंडों में स्थित करीब डेढ़ हजार केंद्रों पर ताला लटका हुआ है। पोषाहार की चाह में केंद्र पर आने वाले नौनिहालों को खाली हाथ घर जाना पड़ रहा हैै। हड़ताल की वजह से वजन दिवस भी फ्लाप साबित हो रहा है। बताया गया कि पिछले महीने पोषाहार नहीं आया था। इस संबंध में जिला कार्यक्रम अधिकारी अमरनाथ मौर्य ने बताया कि अधिकांश केंद्र संचालित हो रहे हैं, जो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आंदोलनरत हैैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही हैै।
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