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आखिर कैसे महफूज रहेंगी बेटियां ?
Updated Fri, 24 Nov 2017 11:38 PM IST
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दिलदारनगर (गाजीपुर)। अभिभावकों की आंखों में आज भी सवाल तैर रहा है कि आखिर कैसे महफूज रहेंगी हमारी बेटियां ? 11वीं की छात्रा की हुई हत्या के बाद लोगों को इस सवाल को लेकर चिंता में डूबे हुए हैं। हत्यारोपी की साहस और निर्ममता को देख सबकी जुबान बंद है। लोगों की आंखों में गम के साथ गुस्सा भी साफ दिखाई दे रहा है। अब बेटियों की सुरक्षा का भय सबको सताने लगा है। अपनी लाडली बिटिया के लिए बड़े सपने देखने वाले माता-पिता सोचने पर मजबूर हैं कि आखिर कहां जाएं ? क्या करें, जिससे हम और हमारी बेटियां महफूज रहे।
बहुअरा गांव के ग्रामीण और क्षेत्र के लोगों को जैसे ही घटना की जानकारी हुई। सभी पहले पीड़ित परिवार के घर पहुंचे। इसके बाद ग्रामीण थाने की तरफ दौड़ पड़े, जहां पीड़ित परिवार से पुलिस पूछताछ कर रही थी। हर कोई चुपचाप एक-दूसरे को निहार रहा था। खौफ के मारे अंदर ही अंदर लोग घुट रहे थे। उनके समझ में ही नहीं आ रहा था कि आखिर बेटियां इस असुरक्षित समाज में कैसे उच्च शिक्षा और कामयाबी को हासिल कर पाएगी। रोते -बिलखते परिजनों की आवाज सुनकर खड़े अभिभावकों के बंद पड़े जुबान इस निर्ममता को देख कांप उठा था। उनके चेहरे पर उदासी और बेटियों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल कौंध रहे थे। समाज के बदलते दौर में इन नई पीढ़ी के युवकों को क्या हो गया है। आखिर कब तक बेटियों की सुरक्षा के लिए मां-बाप को भयभीत रहना पड़ेगा। इन तमाम सवालों को अपने जेहन में सिमटे इन अभिभावकों की गहरी सोच को मृतका के परिजनों के रोने-बिलखने की आवाज बार-बार तोड़ती दिख रही थी। इन सबके बीच घटना से जहां वे भयभीत दिखाई पड़ रहे थे, वहीं पुलिस की कार्य-प्रणाली को लेकर उनके चेहरे पर आक्रोश साफ झलक रहा था।
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बहुअरा गांव के ग्रामीण और क्षेत्र के लोगों को जैसे ही घटना की जानकारी हुई। सभी पहले पीड़ित परिवार के घर पहुंचे। इसके बाद ग्रामीण थाने की तरफ दौड़ पड़े, जहां पीड़ित परिवार से पुलिस पूछताछ कर रही थी। हर कोई चुपचाप एक-दूसरे को निहार रहा था। खौफ के मारे अंदर ही अंदर लोग घुट रहे थे। उनके समझ में ही नहीं आ रहा था कि आखिर बेटियां इस असुरक्षित समाज में कैसे उच्च शिक्षा और कामयाबी को हासिल कर पाएगी। रोते -बिलखते परिजनों की आवाज सुनकर खड़े अभिभावकों के बंद पड़े जुबान इस निर्ममता को देख कांप उठा था। उनके चेहरे पर उदासी और बेटियों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल कौंध रहे थे। समाज के बदलते दौर में इन नई पीढ़ी के युवकों को क्या हो गया है। आखिर कब तक बेटियों की सुरक्षा के लिए मां-बाप को भयभीत रहना पड़ेगा। इन तमाम सवालों को अपने जेहन में सिमटे इन अभिभावकों की गहरी सोच को मृतका के परिजनों के रोने-बिलखने की आवाज बार-बार तोड़ती दिख रही थी। इन सबके बीच घटना से जहां वे भयभीत दिखाई पड़ रहे थे, वहीं पुलिस की कार्य-प्रणाली को लेकर उनके चेहरे पर आक्रोश साफ झलक रहा था।
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