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खंभा टूटने से पूरी रात गुल रही बती
Updated Mon, 18 Jun 2018 10:44 PM IST
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दिलदारनगर (गाजीपुर)। रविवार की देर रात आई आंधी के दौरान फुल्ली गांव के पास 33 हजार का चार पोल गिर गए। इससे शायर, सेवराई, कामाख्या, बारा विद्युत उपकेंद्र से जुड़े सैकड़ों गांव की बत्ती गुल हो गई। पूरी रात बिजली गायब रहने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
रविवार की रात करीब साढ़े आठ बजे तेज आई थी। इससे फुल्ली गांव के पास 33 हजार के चार पोल गिर गया। इससे शायर, सेवराई, कामाख्या धाम और बारा विद्युत उपकेंद्र से संबंधित सैकड़ों गांव की बत्ती गुल हो गई। बिजली कटते ही गर्मी की वजह से लोगों की परेशानी बढ़ गई। परेशान हाल लोग इस सोच में थे कि आंधी बंद होने के बाद शायद अब-तब बिजली आ जाए, लेकिन इंतजार में सुबह होने के बाद भी बिजली का दर्शन नहीं हुआ। रात में बिजली न होने से एक तरफ जहां लोग चैन की नींद नहीं सो सके, वहीं सुबह पानी के लिए हाहाकार मच गया। प्यास बुझाने के लिए लोगों को घरों के आसपास स्थित हैंडपंपों और कुओं तक की दौड़ लगानी पड़ी। थोड़ा-बहुत पानी की व्यवस्था कर लोगों ने किसी तरह से काम चलाया। अनापूर्ति की वजह से बिजली पर आधारित हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। मोबाइल चार्ज करने के लिए लोग इधर-उधर भाग-दौड़ करते रहे। सोमवार को दिन में दो बजे बिजली का दर्शन होने पर लोगों ने राहत की सास ली, लेकिन आधे घंटे बाद पुन: बत्ती गुल हो गई और इसके बाद रात सात बजे तक आने-जाने का क्रम बना रहा।
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रविवार की रात करीब साढ़े आठ बजे तेज आई थी। इससे फुल्ली गांव के पास 33 हजार के चार पोल गिर गया। इससे शायर, सेवराई, कामाख्या धाम और बारा विद्युत उपकेंद्र से संबंधित सैकड़ों गांव की बत्ती गुल हो गई। बिजली कटते ही गर्मी की वजह से लोगों की परेशानी बढ़ गई। परेशान हाल लोग इस सोच में थे कि आंधी बंद होने के बाद शायद अब-तब बिजली आ जाए, लेकिन इंतजार में सुबह होने के बाद भी बिजली का दर्शन नहीं हुआ। रात में बिजली न होने से एक तरफ जहां लोग चैन की नींद नहीं सो सके, वहीं सुबह पानी के लिए हाहाकार मच गया। प्यास बुझाने के लिए लोगों को घरों के आसपास स्थित हैंडपंपों और कुओं तक की दौड़ लगानी पड़ी। थोड़ा-बहुत पानी की व्यवस्था कर लोगों ने किसी तरह से काम चलाया। अनापूर्ति की वजह से बिजली पर आधारित हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। मोबाइल चार्ज करने के लिए लोग इधर-उधर भाग-दौड़ करते रहे। सोमवार को दिन में दो बजे बिजली का दर्शन होने पर लोगों ने राहत की सास ली, लेकिन आधे घंटे बाद पुन: बत्ती गुल हो गई और इसके बाद रात सात बजे तक आने-जाने का क्रम बना रहा।
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