फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   उपचुनाव में सताधारी दल को लगा जोर का झटका

उपचुनाव में सताधारी दल को लगा जोर का झटका

Mon, 03 Jul 2017 11:27 PM IST
Updated Mon, 03 Jul 2017 11:27 PM IST
विज्ञापन
उपचुनाव में सताधारी दल को लगा जोर का झटका
कासिमाबाद/करंडा (गाजीपुर)। जिला पंचायत के उपचुनाव में सत्ताधारी दल को जोर का झटका लगा है। इस चुनाव में भाजपा और भासपा के अलग-अलग ताल ठोंकने के कारण मतदाताओं ने इनको पूरी तरह से नकारते हुए बसपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान कर इन्हें सबक सिखाने का काम किया है।
विज्ञापन

तीन महीने पहले हुए विधानसभा के चुनाव में जनता ने भाजपा-भासपा गठबंधन को दो तिहाई बहुमत की भारी भरकम जीत से नवाजा था तब किसी को यह पता नहीं था कि तीन माह में ही इस दल को पंचायत उपचुनाव में पराजय का मुंह देखना पड़ेगा। जिले में जिला पंचायत की दोनों सीटों पर हुए उपचुनाव में उनको करारी मात मिली है। कासिमावाद तृतीय सीट से बसपा उम्मीदवार रीता देवी ने चुनाव जीतकर सत्ताधारी दल को बड़ा झटका दिया है। इस सीट पर भाजपा और भासपा ने अलग-अलग जोर आजमाइश की थी। दोनों ही दलों को यहां पर हार का सामना करना पड़ा है। भारतीय समाज पार्टी इस चुनाव में दूसरे स्थान पर रही है जबकि भारतीय जनता पार्टी चौथे स्थान पर रही है। अगर यहां पर दोनों दल मिलकर लड़े होते तो हो सकता है कि इनको विजय मिल जाती। इस चुनाव ने भासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के लिए भी चुनौती पेश की है। विधानसभा चुनाव के बाद इन दोनों दलों के बीच की खटास का परिणाम है कि उपचुनाव में उनको पराजय का सामना करना पड़ा। इस सीट पर समाजवादी पार्टी भी अपना दमखम दिखाने में पूरी तरह से नाकाम रही है। इस सीट पर बसपा उम्मीदवार रीता देवी के जेठ कांताराम अपनी प्रतिष्ठा बचाने में पूरी तरह से सफल रहे हैं। इसी प्रकार गाजीपुर सदर सीट से निर्वाचित विधायक डा. संगीता बलवंत को भी झटका लगा है। जिला पंचायत सदस्य करंडा प्रथम जैसी महत्वपूर्ण सीट पर जंगीपुर से विधायक रहे और जिला पंचायत के निवर्तमान अध्यक्ष वीरेंद्र यादव अपनी इस सीट पर पार्टी उम्मीदवार को जिताकर अपना दमखम दिखाने में सफल रहे हैं। यहां पर भाजपा तीसरे स्थान पर खिसककर उसके जनाधार में सेंध लगती दिख रही है। बिंद बाहुल्य सीट पर भाजपा प्रत्याशी की हार के पीछे पार्टी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और जिले के कुछ नेताओं की जिद को कारण बताया जा रहा है। चर्चा है कि इसी नाराजगी के कारण कई निष्ठावान कार्यकर्ता चुनाव से दूर रहे। कुल मिलाकर इस चुनाव ने सत्ताधारी दल और उसके सहयोगी भासपा को एक नसीहत देने का काम किया है। अगर इन दोनों दलों में इसी तरह ठनी रही और जनता की अपेक्षा पर खरे नहीं उतरे तो आने वाला समय इनके लिए और चुनौती भरा साबित हो सकता है। जिला पंचायत सदस्य के उपचुनाव का परिणाम भाजपा-भासपा गठबंधन के लिए चेतावनी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed