फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   127 private hospitals registered in the district, 77 hospitals are operating on the certificate of others.

Ghazipur: जिले में 127 निजी अस्पताल पंजीकृत, दूसरे के प्रमाण पत्र पर संचालित हो रहे 77 अस्पताल

Thu, 04 Jan 2024 02:02 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर Published by: किरन रौतेला Updated Thu, 04 Jan 2024 02:02 PM IST
सार

शासन की ओर निजी अस्पताल खोलने के लिए शासन द्वारा निर्धारित मानक जैसे फायर ब्रिगेड की एनओसी, पर्याप्त प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी, प्रतिदिन एक एमबीबीएस चिकित्सक की तैनाती, बायोमेडिकल वेस्ट प्रमाण और प्रदूषण पत्र जरूरी है। स्थिति तो यह है कि पंजीकृत अधिकांश निजी अस्पतालों में इन मानकों को पूर्ण नहीं किया जाता है और जिन अस्पतालों में मानक पूर्ण किया जाता है, वहां एमबीबीएस चिकित्सक की तैनाती प्रतिदिन नहीं रहती है।

विज्ञापन
127 private hospitals registered in the district, 77 hospitals are operating on the certificate of others.
जिले में 127 निजी अस्पताल पंजीकृत - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जिले में लंबे समय से अप्रशिक्षित डॉक्टरों का मकड़जाल फैला हुआ है। पंजीकृत करीब 127 निजी अस्पतालों में 77 अस्पताल का पंजीकरण दूसरों के प्रमाण-पत्रों पर है। ऐसे में अस्पताल का संचालन कर रहे ये अप्रशिक्षित डॉक्टर उपचार और सर्जरी के नाम पर मरीजों की जान ले रहे हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मानक में होने की बात कहकर पल्ला झाड़ ले रहे हैं। यहीं नहीं घटना के बाद भी कार्रवाई के नाम पर इनकी तंद्रा टूटने का नाम नहीं ले रही है। जबकि पंजीकरण कागजों में जिस चिकित्सक की डिग्री दी गई है, उन्हें पार्ट टाइम और एएनएम को फूल टाइम वर्क करने के साथ संचालक को सिर्फ सहयोगी दर्शाया जा रहा है। जबकि हकीकत यह है कि संचालक पूरे दिन डॉक्टर तो डिग्री धारक एमबीबीएस अस्पतालों में झांकने तक नहीं आते हैं और गैर जनपदों में भी अपने रजिस्ट्रेशन संख्या से निजी अस्पताल का पंजीकरण कराए हैं। इस एवज में ऐसे अस्पतालों के संचालक डिग्री धाराकों को प्रतिमाह मोटी रकम मुहैया कराते हैं। ऐसे में यह रवैया आमजनों के लिए घातक सिद्ध हो रहा है।

विज्ञापन


शासन की ओर निजी अस्पताल खोलने के लिए शासन द्वारा निर्धारित मानक जैसे फायर ब्रिगेड की एनओसी, पर्याप्त प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी, प्रतिदिन एक एमबीबीएस चिकित्सक की तैनाती, बायोमेडिकल वेस्ट प्रमाण और प्रदूषण पत्र जरूरी है। स्थिति तो यह है कि पंजीकृत अधिकांश निजी अस्पतालों में इन मानकों को पूर्ण नहीं किया जाता है और जिन अस्पतालों में मानक पूर्ण किया जाता है, वहां एमबीबीएस चिकित्सक की तैनाती प्रतिदिन नहीं रहती है। ऐसे में अप्रशिक्षित चिकित्सक मोटी कमाई के चक्कर में दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में अस्पताल खोलते हैं। इनके चंगुल में फंसने के बाद आमजनों का धन और जन दोनों चला जाता है। इनके मकड़जाल में फंसने से सबसे अधिक मौत प्रसूतओं और नवजातों की होती है। कासिमाबाद: बीते 30 दिसंबर को आपरेशन के दौरान नस कटने से एक प्रसूता की मौत हो गई थी। संचालक ने महिला का आपरेशन किया था। अप्रशिक्षित होने के चलते महिला की जान चली गई थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग छानबीन तो दूर कार्रवाई के नाम से भी पल्ला झाड़ लिया। इस संबंध में सीएमओ डा. देश दीपक पाल ने बताया कि जिले में 127 निजी अस्पताल पंजीकृत है, जिसमें 77 ऐसे हैं जो दूसरों के प्रमाण-पत्र पर पंजीकृत हैं। यह मानक में तो शामिल हैं, लेकिन अस्पताल संचालन के लिए अन्य मानक को पूरा करना जरूरी है। ऐसे में जांच कराई जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed