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Ghazipur News: अब अनुमान नहीं, मशीन बताएगी कितनी हुई बारिश
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जमानियां। क्षेत्र में कितनी बारिश हुई है, यह पता करने के लिए अब ब्लॉक मुख्यालय परिसर में स्वचालित वर्षामापी स्टेशन स्थापित किया गया है।
राहत एवं आपदा विभाग के आयुक्त के निर्देश पर लगे हाईटेक रेन गेज से बारिश का सटीक और वैज्ञानिक आंकड़ा मिल सकेगा। खास बात यह है कि स्टेशन सौर ऊर्जा से संचालित होगा और बारिश का आंकड़ा ऑनलाइन सर्वर तक भेजने में सक्षम है।
एडीओ पंचायत उमेंद्र सिंह ने बताया कि स्टेशन में सेंसर, टिपिंग बकेट, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और डेटा लॉगर लगाए गए हैं।
बारिश का पानी फनल के जरिए सेंसरयुक्त बकेट में पहुंचता है। निर्धारित मात्रा पूरी होने पर बकेट पलट जाती है और सेंसर इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल के माध्यम से डेटा लॉगर को सूचना भेज देता है। इस तरह बारिश की मात्रा डिजिटल रूप से दर्ज होती रहती है।
उन्होंने बताया कि स्टेशन से घंटे, दिन और महीने के हिसाब से बारिश की वास्तविक स्थिति की निगरानी की जा सकेगी। अत्यधिक बारिश होने पर बाढ़ और जलभराव के खतरे का आकलन करने में प्रशासन को मदद मिलेगी।
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वहीं कृषि विभाग और किसानों को सिंचाई, जल उपलब्धता और मौसम आधारित खेती की योजना बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रमाणिक आंकड़े मिल सकेंगे।
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राहत एवं आपदा विभाग के आयुक्त के निर्देश पर लगे हाईटेक रेन गेज से बारिश का सटीक और वैज्ञानिक आंकड़ा मिल सकेगा। खास बात यह है कि स्टेशन सौर ऊर्जा से संचालित होगा और बारिश का आंकड़ा ऑनलाइन सर्वर तक भेजने में सक्षम है।
एडीओ पंचायत उमेंद्र सिंह ने बताया कि स्टेशन में सेंसर, टिपिंग बकेट, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और डेटा लॉगर लगाए गए हैं।
बारिश का पानी फनल के जरिए सेंसरयुक्त बकेट में पहुंचता है। निर्धारित मात्रा पूरी होने पर बकेट पलट जाती है और सेंसर इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल के माध्यम से डेटा लॉगर को सूचना भेज देता है। इस तरह बारिश की मात्रा डिजिटल रूप से दर्ज होती रहती है।
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उन्होंने बताया कि स्टेशन से घंटे, दिन और महीने के हिसाब से बारिश की वास्तविक स्थिति की निगरानी की जा सकेगी। अत्यधिक बारिश होने पर बाढ़ और जलभराव के खतरे का आकलन करने में प्रशासन को मदद मिलेगी।
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वहीं कृषि विभाग और किसानों को सिंचाई, जल उपलब्धता और मौसम आधारित खेती की योजना बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रमाणिक आंकड़े मिल सकेंगे।