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गंगा की लहरों पर नाव की खतरनाक यात्रा कर रहे लोग
Updated Thu, 05 Oct 2017 11:51 PM IST
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जमानिया। विरोध करने के बजाय लोग जान जोखिम में डाल गंगा नदी पार कर रहे हैँ। नाव पर जहां क्षमता से अधिक लोग सवार हो रहे हैं, वहीं नाव पर बाइक और साइकिल भी लाद दी जा रही है। करंडा के धरम्मपुर गंगा घाट से गंगा की लहरों के बीच नाव से यात्रा करने वालों की। नाविक अधिक कमाई के चक्कर में लोगों को ओवरलोडिंग नाव की यात्रा कराकर मंगलमय यात्रा की कामना कर रहे हैं। पुलिस प्रशासन इस खतरनाक यात्रा पर रोक नहीं लगा रही है।
नगर क्षेत्र के काजी गंगा घाट से करंडा के धरम्मपुर गंगा घाट तक सुबह से लेकर शाम तक छोटी - बड़ी नावों का संचालन होता है। बड़ी संख्या में लोग नाव से यात्रा करते है। अधिक कमाई के चक्कर में नाविक नावों पर छमता से अधिक सवारियों को बैठाते है। इसके अलावा नाव दो-चार से लेकर आधा दर्जन बाइकों के साथ ही इसके अधिक साइकिलों को लाद लेते है और चल देते है लहरों के बीच। इन यात्रियों में प्रतिदिन दर्जनों छात्र-छात्राएं भी शामिल रहते है। कई जगह बैठकर यात्रा करते है तो अधिकांश खड़े रहते है। गंगा पार करते समय खड़े लोगों द्वारा इधर-उधर होने पर नाव का संतुलन बिगड़ता है और वे डगमगाने लगती है। इससे नाव पर सवार अन्य लोगों के दिल की धड़कन तेज हो जाती है। इस दौरान नाविक द्वारा यात्रियों को न हिलने की हिदायत दी जाती है। एक तरफ जहां ओवरलोडिंग नाव के संचालन से हर समय दुर्घटना की संभावना बनी हुई है। वहीं शासन-प्रशासन इस खतरनाक यात्रा से बेखबर है। इस जोखिम भरी यात्रा के सिर्फ नाविक ही जिम्मेदार नहीं है। यात्रा करने वाले भी जिम्मेदार है। क्योंकि यात्रियों द्वारा नाविक से इस बात का विरोध नहीं किया जाता है कि वह क्षमता से अधिक सवारियों को न बैठाए। लोगों की यह खामोशी भी नाविकों को मनमानी करने को बल दे रही है। खास बात यह है इस खतरनाक यात्रा पर शासन-प्रशासन की तरफ से भी रोक लगाने का प्रयास नहीं किया जा रहा है। इसमें यह कहना गलत नहीं होगा कि शायद कोई बड़ी दुर्घटना होने पर शासन-प्रशासन ऐसे नाव संचालकों की सुधि ले।
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नगर क्षेत्र के काजी गंगा घाट से करंडा के धरम्मपुर गंगा घाट तक सुबह से लेकर शाम तक छोटी - बड़ी नावों का संचालन होता है। बड़ी संख्या में लोग नाव से यात्रा करते है। अधिक कमाई के चक्कर में नाविक नावों पर छमता से अधिक सवारियों को बैठाते है। इसके अलावा नाव दो-चार से लेकर आधा दर्जन बाइकों के साथ ही इसके अधिक साइकिलों को लाद लेते है और चल देते है लहरों के बीच। इन यात्रियों में प्रतिदिन दर्जनों छात्र-छात्राएं भी शामिल रहते है। कई जगह बैठकर यात्रा करते है तो अधिकांश खड़े रहते है। गंगा पार करते समय खड़े लोगों द्वारा इधर-उधर होने पर नाव का संतुलन बिगड़ता है और वे डगमगाने लगती है। इससे नाव पर सवार अन्य लोगों के दिल की धड़कन तेज हो जाती है। इस दौरान नाविक द्वारा यात्रियों को न हिलने की हिदायत दी जाती है। एक तरफ जहां ओवरलोडिंग नाव के संचालन से हर समय दुर्घटना की संभावना बनी हुई है। वहीं शासन-प्रशासन इस खतरनाक यात्रा से बेखबर है। इस जोखिम भरी यात्रा के सिर्फ नाविक ही जिम्मेदार नहीं है। यात्रा करने वाले भी जिम्मेदार है। क्योंकि यात्रियों द्वारा नाविक से इस बात का विरोध नहीं किया जाता है कि वह क्षमता से अधिक सवारियों को न बैठाए। लोगों की यह खामोशी भी नाविकों को मनमानी करने को बल दे रही है। खास बात यह है इस खतरनाक यात्रा पर शासन-प्रशासन की तरफ से भी रोक लगाने का प्रयास नहीं किया जा रहा है। इसमें यह कहना गलत नहीं होगा कि शायद कोई बड़ी दुर्घटना होने पर शासन-प्रशासन ऐसे नाव संचालकों की सुधि ले।
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