{"_id":"59c54b494f1c1b98688b5f40","slug":"121506102089-ghazipur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"भगवान श्रीराम का दर्शन कर धन्य हुए निषाद राज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भगवान श्रीराम का दर्शन कर धन्य हुए निषाद राज
Updated Fri, 22 Sep 2017 11:11 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गाजीपुर। हरिशंकरी की अति प्राचीन रामलीला में गुरुवार की रात श्रीराम वन गमन, निषाद राज मिलन, तमसा नदी पर विश्राम लीला की गई। रघुकुल की मर्यादाओं का पालन करते हुए भगवान श्रीराम वन गमन के लिए प्रस्थान करते हैं। यह लीला देख वहां उपस्थित लोग भावुक हो गए।
श्रीराम को सभी ने वन जाने से रोकने की कोशिश की लेकिन उन्होंने किसी की एक भी नहीं सुनी और रथ पर सवार होकर तीनों वन के लिए प्रस्थान कर जाते हैं। वन जाते समय रास्ते में नर-नारियों की ओर से भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण का एक तरफ जहां पुष्प वर्षा कर स्वागत किया जाता रहा, वहीं उनकी आंखों में मर्यादा पुरुषोत्तम राम के वन जाने का दुख साफ झलक रहा था। रास्ते में कई कष्ट सहते हुए माता सीता, राम और लक्ष्मण मतसा नदी रूपी पहाड़ खां के पोखरे पर पहुंचे और वहां स्थित रामजानकी मंदिर पर रात्रि विश्राम किया। पहले से ही उनके आगमन में तमसा नदी के पास मौजूद वटवृक्ष को साफ-कर उनके आगमन की राह निहार रहे थे। निषाद राज भगवान श्रीराम का दर्शन पाकर धन्य हो गए। अयोध्या से आए कलाकारों की लीला देखकर वहां उपस्थित लोग भावुक हो गए। इस अवसर पर दीनानाथ गुप्ता, ओमप्रकाश तिवारी उर्फ बच्चा, लव कुमार त्रिवेदी, गिरीशराम वर्मा, शिवपूजन तिवारी, गोपालजी पांडेय, श्यामनारायण पांडेय, जगदीश नारायण दीक्षित, अशोक कुमार अग्रवाल, रोहित कुमार अग्रवाल, सुधीर कुमार अग्रवाल, हिमांशु अग्रवाल, कुश कुमार त्रिवेदी, कृष्णांश त्रिवेदी, अजय पाठक तथा मीडिया प्रभारी पंडित कृष्णबिहारी त्रिवेदी आदि उपस्थित थे। मनिहारी संवाददाता के अनुसार अति प्राचीन श्री पवहारी बाबा रामलीला समिति की रामलीला में तीसरे दिन रावण-बाणासुर संवाद आदि लीला का मंचन किया गया। इस अवसर पर पंचम सिंह, रामाशीष दुबे, बृजकिशोर दुबे, रामअवध, अजयप्रताप सिंह, दिनेश भट्ट आदि उपस्थित थे।
विज्ञापन
श्रीराम को सभी ने वन जाने से रोकने की कोशिश की लेकिन उन्होंने किसी की एक भी नहीं सुनी और रथ पर सवार होकर तीनों वन के लिए प्रस्थान कर जाते हैं। वन जाते समय रास्ते में नर-नारियों की ओर से भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण का एक तरफ जहां पुष्प वर्षा कर स्वागत किया जाता रहा, वहीं उनकी आंखों में मर्यादा पुरुषोत्तम राम के वन जाने का दुख साफ झलक रहा था। रास्ते में कई कष्ट सहते हुए माता सीता, राम और लक्ष्मण मतसा नदी रूपी पहाड़ खां के पोखरे पर पहुंचे और वहां स्थित रामजानकी मंदिर पर रात्रि विश्राम किया। पहले से ही उनके आगमन में तमसा नदी के पास मौजूद वटवृक्ष को साफ-कर उनके आगमन की राह निहार रहे थे। निषाद राज भगवान श्रीराम का दर्शन पाकर धन्य हो गए। अयोध्या से आए कलाकारों की लीला देखकर वहां उपस्थित लोग भावुक हो गए। इस अवसर पर दीनानाथ गुप्ता, ओमप्रकाश तिवारी उर्फ बच्चा, लव कुमार त्रिवेदी, गिरीशराम वर्मा, शिवपूजन तिवारी, गोपालजी पांडेय, श्यामनारायण पांडेय, जगदीश नारायण दीक्षित, अशोक कुमार अग्रवाल, रोहित कुमार अग्रवाल, सुधीर कुमार अग्रवाल, हिमांशु अग्रवाल, कुश कुमार त्रिवेदी, कृष्णांश त्रिवेदी, अजय पाठक तथा मीडिया प्रभारी पंडित कृष्णबिहारी त्रिवेदी आदि उपस्थित थे। मनिहारी संवाददाता के अनुसार अति प्राचीन श्री पवहारी बाबा रामलीला समिति की रामलीला में तीसरे दिन रावण-बाणासुर संवाद आदि लीला का मंचन किया गया। इस अवसर पर पंचम सिंह, रामाशीष दुबे, बृजकिशोर दुबे, रामअवध, अजयप्रताप सिंह, दिनेश भट्ट आदि उपस्थित थे।
विज्ञापन