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सर्दी के सितम से आम जन-जीवन बेहाल
Updated Tue, 09 Jan 2018 11:13 PM IST
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गाजीपुर। ठंड का प्रभाव घटने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। रात से लेकर दूसरे दिन सुबह तक कोहरे की चादर तनी रही। कोहरा के बीच वाहन मार्गों पर रेंगते नजर आए। गलन और ठंड के प्रभाव के आगे धूप से भी राहत नहीं मिल पा रही है। सर्दी के सितम से आम जनजीवन पूरी तरह से बेहाल रहा।
सोमवार की रात आठ बजे से कोहरे का कहर शुरु हो गया था। रात नौ बजे तक कोहरे की चादर से पूरा जिला ढक गया। हालत यह थी कि पांच कदम की दूर की वस्तु भी नहीं दिखाई दे रही थी। धुंध के आगे लोगों के घरों के बाहर और खंभों पर लगी स्ट्रीट लाइटों की रोशनी भी पूरी तरह से गायब हो गई थी। कोहरा के बीच ठिठुरते हुए वहीं लोग आवागमन करते नजर आए, जिनकी कुछ मजबूरी थी। दो पहिया और चारपहिया वाहन चालक लाइट के सहारे मार्गों पर रेंगते नजर आए। जिन चालकों की कोहरा देख हिम्मत टूट गई, उन्होंने अपने वाहनों को सुरक्षित स्थानों पर खड़ा कर दिया। मंगलवार को दिन में 11 बजे तक कोहरे का प्रभाव रहा। गर्म कपड़ों के बीच छोटे-छोटे बच्चे ठिठुरते हुए स्कूल पहुंचे। दिन में करीब 12 बजे धूप निकलते ही लोगों ने इसका सहारा लेना शुरू कर दिया लेकिन गलन के आगे धूप भी बेदम रही। इसके बीच रहने पर भी ठंड लगती रहा। तीन बजे के बाद धूप बेअसर हो गई और ठंड के साथ ही गलन में वृद्धि हो गई। जिनको कोई काम नहीं था वह शाम ढलते ही घरों में दुबक गए। राहत के लिए बुजुर्गों के साथ ही युवाओं ने भी अलाव का सहारा लेना प्रारंभ कर दिया।
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सोमवार की रात आठ बजे से कोहरे का कहर शुरु हो गया था। रात नौ बजे तक कोहरे की चादर से पूरा जिला ढक गया। हालत यह थी कि पांच कदम की दूर की वस्तु भी नहीं दिखाई दे रही थी। धुंध के आगे लोगों के घरों के बाहर और खंभों पर लगी स्ट्रीट लाइटों की रोशनी भी पूरी तरह से गायब हो गई थी। कोहरा के बीच ठिठुरते हुए वहीं लोग आवागमन करते नजर आए, जिनकी कुछ मजबूरी थी। दो पहिया और चारपहिया वाहन चालक लाइट के सहारे मार्गों पर रेंगते नजर आए। जिन चालकों की कोहरा देख हिम्मत टूट गई, उन्होंने अपने वाहनों को सुरक्षित स्थानों पर खड़ा कर दिया। मंगलवार को दिन में 11 बजे तक कोहरे का प्रभाव रहा। गर्म कपड़ों के बीच छोटे-छोटे बच्चे ठिठुरते हुए स्कूल पहुंचे। दिन में करीब 12 बजे धूप निकलते ही लोगों ने इसका सहारा लेना शुरू कर दिया लेकिन गलन के आगे धूप भी बेदम रही। इसके बीच रहने पर भी ठंड लगती रहा। तीन बजे के बाद धूप बेअसर हो गई और ठंड के साथ ही गलन में वृद्धि हो गई। जिनको कोई काम नहीं था वह शाम ढलते ही घरों में दुबक गए। राहत के लिए बुजुर्गों के साथ ही युवाओं ने भी अलाव का सहारा लेना प्रारंभ कर दिया।
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