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प्रसूती महिलाओं को नहीं मिल रहा नाश्ता अैर भोजन
Updated Wed, 29 Nov 2017 11:01 PM IST
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गाजीपुर।
जिले की तीन महिला अस्पतालों सहित 10 सीएचसी पर भर्ती होने वाली प्रसूती महिलाओं को उपलब्ध होने वाला नाश्ता-भोजन स्वास्थ्य कर्मी खुद ही हजम कर जाते हैं। पूरे जिले में एक माह में करीब ढाई हजार डिलिवरी होती है। जिला महिला अस्पताल, मुहम्मदाबाद और सैदपुर अस्पताल में भर्ती प्रति प्रसूती महिलाओं के लिए 160 रुपए तो करीब 10 सीएचसी को प्रति प्रसूति 100 रुपए बतौर भोजन और नाश्ते के लिए मिलता है।
टेंडर और ऑनलाइन भुगतान का बहाना बनाकर स्वास्थ्य कर्मियों की ओर से लाखों रुपए का गोल-माल कर दिया जाता है। अगर विभागीय आंकड़ों को देखा जाए तो प्रत्येक महीने में ढाई हजार गर्भवती महिलाओं की डिलिवरी जिला महिला अस्पताल, मुहम्मदाबाद, सैदपुर सहित जखनिया, जमानिया, सुभाकरपुर, कासिमाबाद, मरदह, बाराचवर, गोड़उर, मिर्जापुर, देवकली, मनिहारी सामुदायिक अस्पतालों पर होती है। इन प्रसूति महिलाओं को तीन दिन तक रुकने का समय निर्धारित किया गया है। अस्पताल में रुकने पर उन्हें सुबह नाश्ता, दोपहर में भोजन और शाम को भोजन देने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से प्रति प्रसूति 100 रुपए और राज्य सरकार की तरफ से दूध सहित फल के लिए 60 रुपए दिए जाते हैं। जबकि सीएचसी पर भर्ती होने वाली प्रति प्रसूति महिलाओं के हिसाब से 100 रुपए दिया जाता है। विभाग की ओर से बकायदे इसके लिए टेंडर कराया जाता है और टेंडर कराने के बाद मिली धनराशि में गोलमाल करने का काम किया जाता है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक मुहम्मदाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर हुए टेंडर कर्मी से पैसा लेकर खुद स्वास्थ्य कर्मी प्रसूति महिलाओं को भोजन उपलब्ध कराने के नाम पर जमकर खेल कर रहे है। इस संबंध में सीएमओ डॉ. जेसी मौर्या ने बताया कि टेंडर के जरिए भर्ती प्रसूति महिलाओं को भोजन और नाश्ता उपलब्ध कराया जाता है। समय-समय पर टीम द्वारा इसकी जांच भी की जाती है।
यह है व्यवस्था
गाजीपुर। प्रसूती महिलाओं को सुबह चाय, ब्रेड और बिस्कुट देने का प्रावधान है। साथ ही दोपहर में चावल, रोटी और सब्जी। इसके बाद शाम को चाय , देर शाम को भोजन देने का प्रावधान है। साथ ही एक लीटर दूध भी उपलब्ध कराने का शासन का निर्देश है लेकिन विभाग की ओर से कागजी खानापूर्ति कर पल्ला झाड़ लिया जाता है।
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जिले की तीन महिला अस्पतालों सहित 10 सीएचसी पर भर्ती होने वाली प्रसूती महिलाओं को उपलब्ध होने वाला नाश्ता-भोजन स्वास्थ्य कर्मी खुद ही हजम कर जाते हैं। पूरे जिले में एक माह में करीब ढाई हजार डिलिवरी होती है। जिला महिला अस्पताल, मुहम्मदाबाद और सैदपुर अस्पताल में भर्ती प्रति प्रसूती महिलाओं के लिए 160 रुपए तो करीब 10 सीएचसी को प्रति प्रसूति 100 रुपए बतौर भोजन और नाश्ते के लिए मिलता है।
टेंडर और ऑनलाइन भुगतान का बहाना बनाकर स्वास्थ्य कर्मियों की ओर से लाखों रुपए का गोल-माल कर दिया जाता है। अगर विभागीय आंकड़ों को देखा जाए तो प्रत्येक महीने में ढाई हजार गर्भवती महिलाओं की डिलिवरी जिला महिला अस्पताल, मुहम्मदाबाद, सैदपुर सहित जखनिया, जमानिया, सुभाकरपुर, कासिमाबाद, मरदह, बाराचवर, गोड़उर, मिर्जापुर, देवकली, मनिहारी सामुदायिक अस्पतालों पर होती है। इन प्रसूति महिलाओं को तीन दिन तक रुकने का समय निर्धारित किया गया है। अस्पताल में रुकने पर उन्हें सुबह नाश्ता, दोपहर में भोजन और शाम को भोजन देने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से प्रति प्रसूति 100 रुपए और राज्य सरकार की तरफ से दूध सहित फल के लिए 60 रुपए दिए जाते हैं। जबकि सीएचसी पर भर्ती होने वाली प्रति प्रसूति महिलाओं के हिसाब से 100 रुपए दिया जाता है। विभाग की ओर से बकायदे इसके लिए टेंडर कराया जाता है और टेंडर कराने के बाद मिली धनराशि में गोलमाल करने का काम किया जाता है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक मुहम्मदाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर हुए टेंडर कर्मी से पैसा लेकर खुद स्वास्थ्य कर्मी प्रसूति महिलाओं को भोजन उपलब्ध कराने के नाम पर जमकर खेल कर रहे है। इस संबंध में सीएमओ डॉ. जेसी मौर्या ने बताया कि टेंडर के जरिए भर्ती प्रसूति महिलाओं को भोजन और नाश्ता उपलब्ध कराया जाता है। समय-समय पर टीम द्वारा इसकी जांच भी की जाती है।
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यह है व्यवस्था
गाजीपुर। प्रसूती महिलाओं को सुबह चाय, ब्रेड और बिस्कुट देने का प्रावधान है। साथ ही दोपहर में चावल, रोटी और सब्जी। इसके बाद शाम को चाय , देर शाम को भोजन देने का प्रावधान है। साथ ही एक लीटर दूध भी उपलब्ध कराने का शासन का निर्देश है लेकिन विभाग की ओर से कागजी खानापूर्ति कर पल्ला झाड़ लिया जाता है।
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