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गर्भाश्य से निकाला छह किलो का ट्यूमर
Ghaziabad
Updated Fri, 17 Jan 2014 05:49 AM IST
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चार महीने से महिला का लगातार बढ़ता जा रहा था पेट
डा. निशी सिरोही ने ऑपरेशन कर महिला की जान बचायी
गाजियाबाद/वैशाली। शहर को गर्भाशय ट्यूमर के इलाज में एक बड़ी कामयाबी मिली है। चिकित्सकों ने गर्भाशय से छह किलो का ट्यूमर निकालकर न सिर्फ महिला को जीवन दान दिया बल्कि शहर के लिए एक इतिहास भी रचा। चिकित्सकों के मुताबिक अगर सही समय पर महिला का ऑपरेशन नहीं होता तो उसकी जान भी जा सकती थी।
नेहरू नगर स्थित गुलमोहर एंक्लेव निवासी अमरेश (45) का पेट पिछले चार महीनों से बढ़ता जा रहा था। पति राकेश ने अमरेश को मेरठ में दिखाया तो डाक्टरों ने कैंसर बताकर एम्स, दिल्ली भेज दिया। परीक्षण के बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन के लिए 9 अप्रैल 14 की तारीख दी। इसी बीच राकेश अशोक नगर निवासी डॉ. निशी सिरोही के संपर्क में आया। डॉ. निशी सिरोही ने बताया कि अमरेश का ट्यूमर तेजी से बढ़ रहा था। अगर शीघ्र ही ऑपरेशन न किया जाता तो वह 9 अप्रैल से पहले ही फट सकता था। करीब दो घंटे चले ऑपरेशन के बाद छह किलो का ट्यूमर निकाला गया। अमरेश को 24 घंटे के लिए आब्जर्वेशन में रखा गया। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है।
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डा. निशी सिरोही ने ऑपरेशन कर महिला की जान बचायी
गाजियाबाद/वैशाली। शहर को गर्भाशय ट्यूमर के इलाज में एक बड़ी कामयाबी मिली है। चिकित्सकों ने गर्भाशय से छह किलो का ट्यूमर निकालकर न सिर्फ महिला को जीवन दान दिया बल्कि शहर के लिए एक इतिहास भी रचा। चिकित्सकों के मुताबिक अगर सही समय पर महिला का ऑपरेशन नहीं होता तो उसकी जान भी जा सकती थी।
नेहरू नगर स्थित गुलमोहर एंक्लेव निवासी अमरेश (45) का पेट पिछले चार महीनों से बढ़ता जा रहा था। पति राकेश ने अमरेश को मेरठ में दिखाया तो डाक्टरों ने कैंसर बताकर एम्स, दिल्ली भेज दिया। परीक्षण के बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन के लिए 9 अप्रैल 14 की तारीख दी। इसी बीच राकेश अशोक नगर निवासी डॉ. निशी सिरोही के संपर्क में आया। डॉ. निशी सिरोही ने बताया कि अमरेश का ट्यूमर तेजी से बढ़ रहा था। अगर शीघ्र ही ऑपरेशन न किया जाता तो वह 9 अप्रैल से पहले ही फट सकता था। करीब दो घंटे चले ऑपरेशन के बाद छह किलो का ट्यूमर निकाला गया। अमरेश को 24 घंटे के लिए आब्जर्वेशन में रखा गया। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है।
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