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तुम सरीखे संत प्रिय मोरे.....
Ghaziabad
Updated Sun, 07 Jul 2013 05:31 AM IST
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गाजियाबाद । श्री दूधेश्वरनाथ मठ मंदिर में चल रहे 27वें संत सनातन महाकुंभ में तीसरे दिन भी रामकथा जारी रही। शनिवार को कथा व्यास जगद्गुरु विश्वेस प्रपन्नाचार्य ने की। उन्होंने श्रीराम कथा रस वर्षा करते हुए कहा कि धर्म की स्थापना और दुष्टों के नाश के लिए परमात्मा धरती पर अवतार लेते हैं। भगवान ने स्वयं विभीषण से कहा है कि तुम सरीके संत प्रिय मोरे, धरहुं देह नहि आन निहोरे... अर्थात तुम्हारे जैसे संत साधक मुझे प्रिय हैं। इसी कारण मैंने शरीर धारण किया है, वर्ना किसी अन्य की प्रार्थना सुन कर मैं देह धारण नहीं करता। उनका कहना है कि जो प्रभु के साक्षात दर्शन करना चाहते हैं उन्हें पहले अपने आप को प्रभु चरणों में सर्पित करना होगा। महंत नारायण गिरि ने बताया कि सत्कर्मों की ओर जाने का सबसे सरल मार्ग है संतों की शरण में जाना।इस अवसर पर सपा के लोकसभा प्रत्याशी सुधन रावत, विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री शंभुनाथ श्रीवास्तव, देवबंद से महाराज ब्रह्मानंद, दिनेेश गोयल, धर्मपाल गर्ग, डा. राजेंद्र शर्मा, सुबोध शर्मा, हरिशंकर शर्मा, महेश पंडित, विनोद शर्मा प्रवीण गुप्ता मौजूद रहे।
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