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5000 स्टूडेंट्स फिर से देंगे एग्जाम
Ghaziabad
Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
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गाजियाबाद। एमटीयू की सम सेमेस्टर परीक्षाओं में मंगलवार को एमसीए चौथे सेमेस्टर का पेपर लीक होने का प्रकरण बुधवार को चर्चा का विषय रहा। इस मामले पर महानगर के कालेजों ने चिंता जाहिर की। साथ ही उत्तर प्रदेश टेक्निकल इंस्टीट्यूशंस फाउंडेशन (यूपीटिफ) ने एमटीयू से इस प्रकरण की कड़ी जांच कराने और ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। पेपर लीक होने के कारण गाजियाबाद के 30 एमसीए कालेजों के सेकेंड और फोर्थ सेमेस्टर के 5000 स्टूडेंट्स को अब फिर से परीक्षा देनी पड़ेगी। चूंकि कई स्टूडेंट्स परीक्षा से पूर्व ही प्लेस्ड हो चुके हैं, ऐसे में परीक्षा कंडक्ट कराने में देरी की संभावना से भी वे परेशान हैं।
यूपीटिफ के महासचिव अतुल जैन ने कहा कि पेपर लीक की यह घटना ऐसी अन्य घटनाओं की पुनरावृत्ति का माहौल बना सकती है। किसी भी परीक्षा की एक गरिमा होती है और किसी अनुभवी व्यक्ति को पेपर सेट करने की जिम्मेदारी दी जाती है। पेपर किसी एक व्यक्ति से सेट नहीं कराया जाता। कई प्रोफेसर पेपर बनाते हैं और उनमें से पेपर बनाया जाता है। इस मामले में ऐसा हुआ या नहीं। परीक्षक के साथ यूनिवर्सिटी स्तर पर भी खामी हो सकती है। ऐसे में कड़ी जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है। वहीं, आरकेजीआईटी के प्रशासनिक अधिकारी विपुल गोयल ने कहा कि बच्चों को पेपर फिर से देना होगा और यह परेशानी वाली बात तौ है ही। पेपर बनाने में एक नहीं कई शिक्षकों को लगाने का नियम है। ऐसे में यह चूक काफी गंभीर है और इससे परीक्षाओं पर प्रश्न चिन्ह भी लग सकता है। इस मामले की जांच के बाद दोषी व्यक्ति को ब्लैक लिस्ट किया जाना चाहिए। इस मामले में एमसीए के स्टूडेंट गौरव शर्मा ने कहा कि इससे इतना साफ है कि विवि द्वारा पेपर बनवाने की प्रक्रिया ही गलत है। शायद यही वजह है कि कई ऐसे स्टूडेंट्स अधिक नंबर पा जाते हैं जो मेहनत कम करते हैं। पेपर सेट करने की प्रक्रिया में बड़े बदलाव की जरूरत है। वहीं, संभावना व्यक्त की जा रही है कि परीक्षाओं के खत्म होने के बाद रद्द पेपर की परीक्षा की तिथि घोषित हो सकती है।
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यूपीटिफ के महासचिव अतुल जैन ने कहा कि पेपर लीक की यह घटना ऐसी अन्य घटनाओं की पुनरावृत्ति का माहौल बना सकती है। किसी भी परीक्षा की एक गरिमा होती है और किसी अनुभवी व्यक्ति को पेपर सेट करने की जिम्मेदारी दी जाती है। पेपर किसी एक व्यक्ति से सेट नहीं कराया जाता। कई प्रोफेसर पेपर बनाते हैं और उनमें से पेपर बनाया जाता है। इस मामले में ऐसा हुआ या नहीं। परीक्षक के साथ यूनिवर्सिटी स्तर पर भी खामी हो सकती है। ऐसे में कड़ी जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है। वहीं, आरकेजीआईटी के प्रशासनिक अधिकारी विपुल गोयल ने कहा कि बच्चों को पेपर फिर से देना होगा और यह परेशानी वाली बात तौ है ही। पेपर बनाने में एक नहीं कई शिक्षकों को लगाने का नियम है। ऐसे में यह चूक काफी गंभीर है और इससे परीक्षाओं पर प्रश्न चिन्ह भी लग सकता है। इस मामले की जांच के बाद दोषी व्यक्ति को ब्लैक लिस्ट किया जाना चाहिए। इस मामले में एमसीए के स्टूडेंट गौरव शर्मा ने कहा कि इससे इतना साफ है कि विवि द्वारा पेपर बनवाने की प्रक्रिया ही गलत है। शायद यही वजह है कि कई ऐसे स्टूडेंट्स अधिक नंबर पा जाते हैं जो मेहनत कम करते हैं। पेपर सेट करने की प्रक्रिया में बड़े बदलाव की जरूरत है। वहीं, संभावना व्यक्त की जा रही है कि परीक्षाओं के खत्म होने के बाद रद्द पेपर की परीक्षा की तिथि घोषित हो सकती है।
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