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होली पर बिखरे कैसे-कैसे रंग, 'जोगीरा सा रा रा रा...'
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 13 Mar 2017 11:14 AM IST
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कानपुर में होली
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सोमवार की सुबह रंगोत्सव पर धूम मचाते होलियारों की फौज टोलियां बनाकर गली मोहल्लों में घूमने लगीं। चारों ओर उड़ता रंग-गुलाल और डीजे व फाग की धुन पर थिरकते लोग होली का जश्न मना रहे हैं। ये सीन है शहर कानपुर का।
होली को लेकर पुलिस-प्रशासन शांति व्यवस्था को लेकर चौकस रही। रविवार की रात हर होलिका दहन स्थल पर पुलिस सक्रिय रही। देर शाम तक पूजन कर होलिका दहन किया गया।
होली का पर्व सुख और समृद्धि का होता है। होली के पर्व पर होलिका दहन की प्रथा है। कुछ लोग होली दहन के पहले पूजा करते हैं। रंगों के त्योहार होली पर जिले भर के सैकड़ों स्थानों पर शाम को शुभ मुहूर्त देखकर आचार्यों ने विधिविधान से पूजन कराया। होलिका दहन में लोगों ने गोबर के बल्ले आदि डालकर गन्ना और गेहूं की बालियां भूंजी। इसके बाद विधिविधान से होलिका की परिक्रमा कर सुख-समृद्धि की कामना की। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग फाग की धुनपर झूमते रहे।
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आम तौर पर पांच रुपये में बिकने वाला गन्ना होली पर्व के चलते बीस रुपये तक बिका। कानपुर शहर के अलावा अकबरपुर अंडरपास, रूरा चौराहा सहित साप्ताहिक बाजार में लोगों की गन्ना खरीदने के लिए जम कर मारा मारी रही। इसका फायदा दुकानदारों ने जम कर उठाया और गन्ने की 15 से बीस रुपये तक की बिक्री की। इस दौरान लोगों ने बेर की खरीददारी की।
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होली को लेकर पुलिस-प्रशासन शांति व्यवस्था को लेकर चौकस रही। रविवार की रात हर होलिका दहन स्थल पर पुलिस सक्रिय रही। देर शाम तक पूजन कर होलिका दहन किया गया।
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होली का पर्व सुख और समृद्धि का होता है। होली के पर्व पर होलिका दहन की प्रथा है। कुछ लोग होली दहन के पहले पूजा करते हैं। रंगों के त्योहार होली पर जिले भर के सैकड़ों स्थानों पर शाम को शुभ मुहूर्त देखकर आचार्यों ने विधिविधान से पूजन कराया। होलिका दहन में लोगों ने गोबर के बल्ले आदि डालकर गन्ना और गेहूं की बालियां भूंजी। इसके बाद विधिविधान से होलिका की परिक्रमा कर सुख-समृद्धि की कामना की। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग फाग की धुनपर झूमते रहे।
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आम तौर पर पांच रुपये में बिकने वाला गन्ना होली पर्व के चलते बीस रुपये तक बिका। कानपुर शहर के अलावा अकबरपुर अंडरपास, रूरा चौराहा सहित साप्ताहिक बाजार में लोगों की गन्ना खरीदने के लिए जम कर मारा मारी रही। इसका फायदा दुकानदारों ने जम कर उठाया और गन्ने की 15 से बीस रुपये तक की बिक्री की। इस दौरान लोगों ने बेर की खरीददारी की।