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याग मंडल विधान में भक्ति की धूम, अतिशय क्षेत्र में गूंजे मंत्र
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फरिहा (फि रोजाबाद)। अतिशय तीर्थ जैन मरसलगंज स्थित दिगंबर जैन मंदिर नवग्रह एवं विद्यमान 20 तीर्थंकर जिनालय में चल रहे मज्जिनेंद्र ऋषभदेव पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की रविवार को धूम रही। फिरोजाबाद, शिकोहाबाद, टूंडला के अलावा अन्य शहरों से भी श्रद्धालु पहुंचे। विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई।
दूसरे दिन जैनाचार्य विवेक सागर के सानिध्य में याग मंडल विधान की शुरूआत हुई। पंडित अजित कुमार जैन शास्त्री एवं पंडित अखिलेश जैन शास्त्री द्वारा मंत्रोच्चारण किया गया। रामकुमार एंड पार्टी के संगीतमय मंत्रों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। मंत्रों के साथ नवीन वेदी की शुद्धि एवं वेदी संस्कार संपन्न हुआ। तीर्थंकर भगवान की माता बनीं सरिता जैन की छप्पन कुमारियों द्वारा गोद भराई एवं गर्भ संस्कार शुद्धि की क्रियाएं प्रारम्भ हुईं। महोत्सव में महाआरती का सौभाग्य वैद्य राजेश जैन सरल को मिला। इस अवसर पर अंकित जैन, अनिष्क जैन, हिमांक जैन, हर्ष जैन, अवनीश गुप्ता, ऋषभ जैन, अमन जैन, अशोक जैन, सतेंद्र जैन साहू, अशोक जैन, संजय जैन, अशोक कुमार जैन, प्रशांत जैन देवेंद्र जैन, अभय कुमार जैन, नैतिक जैन, जयचंद्र जैन, डॉ राजीव जैन, चक्रेश जैन, अभिषेक जैन, मोनू जैन आदि उपस्थित रहे।
आज के कार्यक्रम
महोत्सव समिति के मीडिया प्रभारी आदीश जैन ने बताया कि आज सुबह 11 बजे ऐरावत हाथी पर पांडुकशिला और जन्म कल्याणक की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। मेला प्रांगण में श्रीजी का 1008 कलशों से जन्माभिषेक होगा।
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चिंता से बुद्धि संकीर्ण होती है: विवेक सागर
जैनाचार्य विवेक सागर महाराज ने कहा कि अंत:करण की दो धाराएं होती हैं। एक होती है चिंता की धारा और दूसरी चिंतवन की धारा, विचार की धारा। जिसके जीवन में दिव्य विचार नहीं है, दिव्य चिंतन नहीं है। वह चिंता की खाई में गिरता है। चिंता से बुद्धि संकीर्ण होती है। मुनि महाराज ने कहा कि चिंता से बुद्धि का विनाश होता है। चिंता से बुद्धि कुण्ठित व विकार पैदा होते हैं।
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दूसरे दिन जैनाचार्य विवेक सागर के सानिध्य में याग मंडल विधान की शुरूआत हुई। पंडित अजित कुमार जैन शास्त्री एवं पंडित अखिलेश जैन शास्त्री द्वारा मंत्रोच्चारण किया गया। रामकुमार एंड पार्टी के संगीतमय मंत्रों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। मंत्रों के साथ नवीन वेदी की शुद्धि एवं वेदी संस्कार संपन्न हुआ। तीर्थंकर भगवान की माता बनीं सरिता जैन की छप्पन कुमारियों द्वारा गोद भराई एवं गर्भ संस्कार शुद्धि की क्रियाएं प्रारम्भ हुईं। महोत्सव में महाआरती का सौभाग्य वैद्य राजेश जैन सरल को मिला। इस अवसर पर अंकित जैन, अनिष्क जैन, हिमांक जैन, हर्ष जैन, अवनीश गुप्ता, ऋषभ जैन, अमन जैन, अशोक जैन, सतेंद्र जैन साहू, अशोक जैन, संजय जैन, अशोक कुमार जैन, प्रशांत जैन देवेंद्र जैन, अभय कुमार जैन, नैतिक जैन, जयचंद्र जैन, डॉ राजीव जैन, चक्रेश जैन, अभिषेक जैन, मोनू जैन आदि उपस्थित रहे।
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आज के कार्यक्रम
महोत्सव समिति के मीडिया प्रभारी आदीश जैन ने बताया कि आज सुबह 11 बजे ऐरावत हाथी पर पांडुकशिला और जन्म कल्याणक की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। मेला प्रांगण में श्रीजी का 1008 कलशों से जन्माभिषेक होगा।
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चिंता से बुद्धि संकीर्ण होती है: विवेक सागर
जैनाचार्य विवेक सागर महाराज ने कहा कि अंत:करण की दो धाराएं होती हैं। एक होती है चिंता की धारा और दूसरी चिंतवन की धारा, विचार की धारा। जिसके जीवन में दिव्य विचार नहीं है, दिव्य चिंतन नहीं है। वह चिंता की खाई में गिरता है। चिंता से बुद्धि संकीर्ण होती है। मुनि महाराज ने कहा कि चिंता से बुद्धि का विनाश होता है। चिंता से बुद्धि कुण्ठित व विकार पैदा होते हैं।