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श्रमिक हड़ताल पर, लस्टर कारखानाें में सन्नटा
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Tue, 05 May 2015 11:30 PM IST
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माउथ ब्लोइंग कारखानों के बाद अब लस्टर कारखानों में हड़ताल हो गई। लस्टर कारखानों में श्रमिक सोमवार को अचानक कार्य बहिष्कार पर चले गए। श्रमिकों के अचानक कार्य बहिष्कार करने से सेवायोजकों के होश उड़ गए। हालांकि अभी तक श्रमिकों द्वारा कोई मांग पत्र नहीं दिया गया है।
सुहागनगरी में एक दर्जन से अधिक कारखानों में लस्टर की चूड़ी बनाई जाती है। लस्टर कारखानों में सैकड़ों श्रमिक दिन-रात काम करते हैं। कारखानों में कार्यरत श्रमिकों में न्यूनतम मजदूरी न मिलने के कारण लंबे समय से असंतोष है। श्रमिक लगातार न्यूनतम वेतन देने की मांग कर रहे हैं। सोमवार को इंडस्ट्रियल एरिया स्थित कारखानों में श्रमिकों द्वारा हंगामा करने के बाद सभी श्रमिक अचानक कार्य बहिष्कार कर चले गए। एक दर्जन से अधिक कारखानों में कार्य बहिष्कार के चलते सन्नाटा पसर गया। सोमवार को कार्य छोड़ गए श्रमिक मंगलवार को भी काम पर नहीं लौटे। इससे सेवायोजकों के होश उड़े हुए हैं। मंगलवार को महेश ग्लास, टेक्निकल ग्लास, जगदीश ग्लास, मलेनियम ग्लास, जीटी ग्लास, इंद्रा साइंटिफिक, महावीर ग्लास कारखानों में कामकाज ठप रहा। हालांकि कारखानों में कार्य बहिष्कार के संबंध में अभी तक किसी श्रमिक संगठन द्वारा जिम्मेदारी नहीं ली गई। श्रमिकों द्वारा सेवायोजकों, श्रमिक संगठनों अथवा सहायक श्रमायुक्त को कोई नोटिस भी नहीं दिया गया है। ऐसी स्थिति में कोई भी सेवायोजक अथवा अधिकारी कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है।
श्रमिकों का बिना नोटिस दिए कार्य छोड़ जाना उद्योग हित में नहीं हैं। श्रमिकों द्वारा इस तरह हड़ताल नहीं करनी चाहिए थी। श्रमिकों को यदि कोई समस्या थी तो हड़ताल पर जाने से पूर्व नोटिस देना चाहिए। सेवायोजक यदि सुनवाई नहीं करते तब श्रमिक संगठन अथवा एएलसी के पास जा सकते थे। बिना कारण हड़ताल करना गलत है।
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भूरीसिंह यादव
मंत्री, कांच उद्योग क्रांतिकारी मजदूर संघ
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सुहागनगरी में एक दर्जन से अधिक कारखानों में लस्टर की चूड़ी बनाई जाती है। लस्टर कारखानों में सैकड़ों श्रमिक दिन-रात काम करते हैं। कारखानों में कार्यरत श्रमिकों में न्यूनतम मजदूरी न मिलने के कारण लंबे समय से असंतोष है। श्रमिक लगातार न्यूनतम वेतन देने की मांग कर रहे हैं। सोमवार को इंडस्ट्रियल एरिया स्थित कारखानों में श्रमिकों द्वारा हंगामा करने के बाद सभी श्रमिक अचानक कार्य बहिष्कार कर चले गए। एक दर्जन से अधिक कारखानों में कार्य बहिष्कार के चलते सन्नाटा पसर गया। सोमवार को कार्य छोड़ गए श्रमिक मंगलवार को भी काम पर नहीं लौटे। इससे सेवायोजकों के होश उड़े हुए हैं। मंगलवार को महेश ग्लास, टेक्निकल ग्लास, जगदीश ग्लास, मलेनियम ग्लास, जीटी ग्लास, इंद्रा साइंटिफिक, महावीर ग्लास कारखानों में कामकाज ठप रहा। हालांकि कारखानों में कार्य बहिष्कार के संबंध में अभी तक किसी श्रमिक संगठन द्वारा जिम्मेदारी नहीं ली गई। श्रमिकों द्वारा सेवायोजकों, श्रमिक संगठनों अथवा सहायक श्रमायुक्त को कोई नोटिस भी नहीं दिया गया है। ऐसी स्थिति में कोई भी सेवायोजक अथवा अधिकारी कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है।
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श्रमिकों का बिना नोटिस दिए कार्य छोड़ जाना उद्योग हित में नहीं हैं। श्रमिकों द्वारा इस तरह हड़ताल नहीं करनी चाहिए थी। श्रमिकों को यदि कोई समस्या थी तो हड़ताल पर जाने से पूर्व नोटिस देना चाहिए। सेवायोजक यदि सुनवाई नहीं करते तब श्रमिक संगठन अथवा एएलसी के पास जा सकते थे। बिना कारण हड़ताल करना गलत है।
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भूरीसिंह यादव
मंत्री, कांच उद्योग क्रांतिकारी मजदूर संघ