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महिला समानता दिवस: महिलाएं बिजनेस के साथ-साथ संभाल रही परिवार की जिम्मेदारी
Tue, 25 Aug 2020 11:06 PM IST
आगरा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
Published by: आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2020 11:06 PM IST
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26 अगस्त को महिला समानता दिवस है। महिलाएं वर्तमान में सभी क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहीं हैं। चाहे बात व्यापार संभालने की हो या फिर घर की, देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी हो या फिर विज्ञान की वे सभी क्षेत्रों में अपनी भूमिका को बखूबी निभा रहीं हैं। महिलाओं को आगे बढ़ने में कई रुकावटे तो आती हैं, किंतु संघर्षशील महिलाएं उनका डटकर मुकाबला करके अपने मकसद में कामयाब हो जाती हैं।
स्वयं सहायता समूह का किया संचालन, दिया लोगों को रोजगार
गांव धरमई निवासी उमा सारस्वत ने परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए एक स्वयं सहायता समूह खोला है। इसके माध्यम से वह महिलाओं को भी रोजगार देती हैं। उन्होंने अकेले अचार और हवन सामग्री बनाकर बेचना शुरू किया। धीरे-धीरे कार्य इतना बढ़ गया कि महिलाओं को रोजगार देने लगीं। वह कहती हैं कि ग्रामीण परिवेश में महिलाएं घर से बाहर नहीं निकलती हैं। यदि महिलाओं को सशक्त बनना है तो अपने अधिकारों को किसी भी क्षेत्र में आगे लाना होगा।
277 स्वयं सहायता समूह बनाकर महिलाओं को दिलाया रोजगार
टापाकला निवासी गीता सिंह के परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी। उन्होंने नगर निगम द्वारा दिए गए प्रशिक्षण को प्राप्त किया और अनुपयोगी सामान से सजावटी सामान बनाने की विधि सीखी। 25 स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को भी प्रशिक्षण दिलाया। इसके बाद महिलाओं ने सजावटी सामान की बिक्री फुटपाथ पर करना शुरू कर दिया था। वही अब अब ऑनलाइन भी बिकने लगा है। उन्होंने बताया कि 277 स्वयं सहायता समूह बनाकर महिलाओं को रोजगार दिलाया है।
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पति की मृत्यु के बाद ममता ने संभाला कारोबार
जैन नगर निवासी ममता गुप्ता ने भी कम समय में ऊंचा नाम कमाया है। पति की मृत्यु के बाद परिवार पर आर्थिक संकट था। उस समय उन्होंने हिम्मत से काम लिया। उस समय सबसे बड़ी बेटी 12 साल की थी। इस दौरान उन्होंने अपने कांच कारोबार को संभाला। वह ग्लास और पॉट को कारखानों में बनवाती हैं और उनको एक्पोर्टर को बेचती हें। उनका कांच कारोबार सैलो नाम से ब्रांड बन चुका है, जो विदेशों में भी जाता है। उनका कहना है महिलाएं पुरुषों के मुकाबले कम नहीं हैं।
एक्सपोर्टर के रूप में बनाई अपनी पहचान
सोनिया गुप्ता ने शहर में एक्पोर्टर के रूप में अपनी पहचान बनाई है। वह एक्पोर्ट बिजनेस में सेल डिपोर्टमेंट और कम्यूनिकेशन डिपोर्टमेंट को संभालती हैं। जर्मनी फेयर, पेरिस और नोएडा में लगी प्रदर्शनी में अपने उत्पादों को ले जाती हैं। उनका जन्म और विवाह प्रतिष्ठित परिवार में हुआ। मगर बचपन से ही बिजनेस करने की चाहत थी। शादी के बाद अपने घर पर बिजनेस करना शुरू कर दिया था। अब वह परिवार की जिम्मेदारी के साथ प्रतिदिन अपना बिजनेस संभालती हैं।
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स्वयं सहायता समूह का किया संचालन, दिया लोगों को रोजगार
गांव धरमई निवासी उमा सारस्वत ने परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए एक स्वयं सहायता समूह खोला है। इसके माध्यम से वह महिलाओं को भी रोजगार देती हैं। उन्होंने अकेले अचार और हवन सामग्री बनाकर बेचना शुरू किया। धीरे-धीरे कार्य इतना बढ़ गया कि महिलाओं को रोजगार देने लगीं। वह कहती हैं कि ग्रामीण परिवेश में महिलाएं घर से बाहर नहीं निकलती हैं। यदि महिलाओं को सशक्त बनना है तो अपने अधिकारों को किसी भी क्षेत्र में आगे लाना होगा।
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277 स्वयं सहायता समूह बनाकर महिलाओं को दिलाया रोजगार
टापाकला निवासी गीता सिंह के परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी। उन्होंने नगर निगम द्वारा दिए गए प्रशिक्षण को प्राप्त किया और अनुपयोगी सामान से सजावटी सामान बनाने की विधि सीखी। 25 स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को भी प्रशिक्षण दिलाया। इसके बाद महिलाओं ने सजावटी सामान की बिक्री फुटपाथ पर करना शुरू कर दिया था। वही अब अब ऑनलाइन भी बिकने लगा है। उन्होंने बताया कि 277 स्वयं सहायता समूह बनाकर महिलाओं को रोजगार दिलाया है।
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पति की मृत्यु के बाद ममता ने संभाला कारोबार
जैन नगर निवासी ममता गुप्ता ने भी कम समय में ऊंचा नाम कमाया है। पति की मृत्यु के बाद परिवार पर आर्थिक संकट था। उस समय उन्होंने हिम्मत से काम लिया। उस समय सबसे बड़ी बेटी 12 साल की थी। इस दौरान उन्होंने अपने कांच कारोबार को संभाला। वह ग्लास और पॉट को कारखानों में बनवाती हैं और उनको एक्पोर्टर को बेचती हें। उनका कांच कारोबार सैलो नाम से ब्रांड बन चुका है, जो विदेशों में भी जाता है। उनका कहना है महिलाएं पुरुषों के मुकाबले कम नहीं हैं।
एक्सपोर्टर के रूप में बनाई अपनी पहचान
सोनिया गुप्ता ने शहर में एक्पोर्टर के रूप में अपनी पहचान बनाई है। वह एक्पोर्ट बिजनेस में सेल डिपोर्टमेंट और कम्यूनिकेशन डिपोर्टमेंट को संभालती हैं। जर्मनी फेयर, पेरिस और नोएडा में लगी प्रदर्शनी में अपने उत्पादों को ले जाती हैं। उनका जन्म और विवाह प्रतिष्ठित परिवार में हुआ। मगर बचपन से ही बिजनेस करने की चाहत थी। शादी के बाद अपने घर पर बिजनेस करना शुरू कर दिया था। अब वह परिवार की जिम्मेदारी के साथ प्रतिदिन अपना बिजनेस संभालती हैं।