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राम के वन प्रस्थान के साथ बिलख पड़े अध्योध्यावासी
ब्यूरो अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Sat, 17 Oct 2015 11:46 PM IST
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माता कैकयी के आदेश पर मर्यादा पुरषोत्तम श्रीराम महलों का सुख छोड़कर वन के लिए प्रस्थान करते हैं। इस पर हर कोई अपने आराध्य को विदाई देते हुए बिलख पड़ता है। इन मनोहारी लीलाओं को देखकर रामलीला ग्राउंड में दर्शकों की आंखों से अश्रुधारा बही।
नगर की मुख्य रामलीला मैदान में आयोजित लीला में राम गमन की लीला ने सभी को भावविह्ïवल कर दिया। माता कैकयी अपनी दासी मंथरा के सिखाए जाने पर राजा दशरथ को उनके वचन की याद दिलाते हुए अपने पुत्र भरत को राजगद्ïदी और राम को चौदह वर्ष का वनवास मांगती हैं। इस पर राजा दशरथ परेशान हो उठते हैं और वह कैकयी को समझाने का बहुत प्रयत्न करते हैं। तभी कैकयी उन्हें याद दिलाती है कि ‘रघुकुल रीति सदा चलि आयी, प्राण जाएं पर वचन न जायी’Ð यह बात जब राम को पता चलती है तो वह अपने पिता के वचनों की रक्षार्थ वन जाने को तैयार हो जाते हैं। उनके साथ जनक नंदनी सीता और लघु भ्राता सुमित्रा नंदन लक्ष्मण भी संग जाने को उद्धत होते हैं। लीला को देख दर्शक अपने आंसुओं को रोक नहीं पाते। इसके बाद केवट द्वारा श्रीराम को गंगा पार करवाना और प्रभु से गंगा उतरवायी के रूप में भवसागर पार करवाने की विनती करने की लीला ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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नगर की मुख्य रामलीला मैदान में आयोजित लीला में राम गमन की लीला ने सभी को भावविह्ïवल कर दिया। माता कैकयी अपनी दासी मंथरा के सिखाए जाने पर राजा दशरथ को उनके वचन की याद दिलाते हुए अपने पुत्र भरत को राजगद्ïदी और राम को चौदह वर्ष का वनवास मांगती हैं। इस पर राजा दशरथ परेशान हो उठते हैं और वह कैकयी को समझाने का बहुत प्रयत्न करते हैं। तभी कैकयी उन्हें याद दिलाती है कि ‘रघुकुल रीति सदा चलि आयी, प्राण जाएं पर वचन न जायी’Ð यह बात जब राम को पता चलती है तो वह अपने पिता के वचनों की रक्षार्थ वन जाने को तैयार हो जाते हैं। उनके साथ जनक नंदनी सीता और लघु भ्राता सुमित्रा नंदन लक्ष्मण भी संग जाने को उद्धत होते हैं। लीला को देख दर्शक अपने आंसुओं को रोक नहीं पाते। इसके बाद केवट द्वारा श्रीराम को गंगा पार करवाना और प्रभु से गंगा उतरवायी के रूप में भवसागर पार करवाने की विनती करने की लीला ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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