{"_id":"7a2f3ba81a714dfb5bce6d0ac33d0ec6","slug":"which-pay-tribute-to-those-who-have-sacrificed-my-homeland-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वतन पे जो हुए कुर्बान उनको नमन है मेरा...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वतन पे जो हुए कुर्बान उनको नमन है मेरा...
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Fri, 18 Dec 2015 09:56 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नारायण कालेज के वार्षिकोत्सव के अवसर पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि जेएस विश्वविद्यालय के कुलपति डा. हरीमोहन शर्मा थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। कवियों ने देश की वर्तमान व्यवस्था पर करारी चोट करते हुए काव्य पाठ किया। इटावा से आए कवि हरीशंकर त्रिपाठी ने कहा, सिंह का स्वभाव नहीं घासपात खाना बंधु, खाता है वो मांस मांसाहारी कहलाता है, यदि वही फंस जाए जाल में शिकारियों के, पूंछ को उठाता नाच के दिखाता है। देश के तथा कथित साधुओं पर व्यंग्य करते हुए मैनपुरी से आए कवि पूरन सिंह पूरन ने कहा, जैसे बीज आशाराम, रामपाल बोते रहे, वैसे फल जेल की सलाखों बीच खाएंगे। दिल्ली से आए कवि विनय विनम्र ने कहा, वतन पे जो हुए कुर्बान उनको नमन है मेरा, मिटा सर्वस्व है अनजान उनको है नमन मेरा, बढ़ाई राष्ट्रध्वज की शान उनको है नमन मेरा। बस्ती से आईं कवियत्री शिवा त्रिपाठी सरस ने काव्यपाठ करते हुए कहा, कभी शिकवा घृणा और द्वेष का तुम बीज मत बोना, न जाने कौन सा पल आखिरी हो इस जमाने में। टूंडला के कवि लटूरी सिंह लट्ठ ने बेटियों की तारीफ करते हुए कहा, वो चुपचाप खा लेती जो रोटी बाद में बचतीं, कर दो ब्याह बेशक तुम हमेशा बाप को पचतीं, अगर पूरा मिले मौका तो नव को छूके लौटतीं, बुलंदी पर पहुंच बेटी नया इतिहास है रचतीं। इलाहाबाद से आए कवि अखिलेश द्विवेद्वी ने कहा, मोहब्बत के तराने जब लबों तक ही न आएंगे, वहां पर देशभक्ति के हम कैसे गीत गाएंगे। इससे पूर्व प्राचार्य डा. रामसेवक शर्मा, डा.आरके त्रिपाठी, डा. पीके सारस्वत व डा. अनुपमा चतुर्वेदी ने मुख्य अतिथियों व आए हुए कवियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। मंच संचालन डा. अमित अग्रवाल व डा. अनुपमा चुतर्वेदी ने किया।
विज्ञापन
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। कवियों ने देश की वर्तमान व्यवस्था पर करारी चोट करते हुए काव्य पाठ किया। इटावा से आए कवि हरीशंकर त्रिपाठी ने कहा, सिंह का स्वभाव नहीं घासपात खाना बंधु, खाता है वो मांस मांसाहारी कहलाता है, यदि वही फंस जाए जाल में शिकारियों के, पूंछ को उठाता नाच के दिखाता है। देश के तथा कथित साधुओं पर व्यंग्य करते हुए मैनपुरी से आए कवि पूरन सिंह पूरन ने कहा, जैसे बीज आशाराम, रामपाल बोते रहे, वैसे फल जेल की सलाखों बीच खाएंगे। दिल्ली से आए कवि विनय विनम्र ने कहा, वतन पे जो हुए कुर्बान उनको नमन है मेरा, मिटा सर्वस्व है अनजान उनको है नमन मेरा, बढ़ाई राष्ट्रध्वज की शान उनको है नमन मेरा। बस्ती से आईं कवियत्री शिवा त्रिपाठी सरस ने काव्यपाठ करते हुए कहा, कभी शिकवा घृणा और द्वेष का तुम बीज मत बोना, न जाने कौन सा पल आखिरी हो इस जमाने में। टूंडला के कवि लटूरी सिंह लट्ठ ने बेटियों की तारीफ करते हुए कहा, वो चुपचाप खा लेती जो रोटी बाद में बचतीं, कर दो ब्याह बेशक तुम हमेशा बाप को पचतीं, अगर पूरा मिले मौका तो नव को छूके लौटतीं, बुलंदी पर पहुंच बेटी नया इतिहास है रचतीं। इलाहाबाद से आए कवि अखिलेश द्विवेद्वी ने कहा, मोहब्बत के तराने जब लबों तक ही न आएंगे, वहां पर देशभक्ति के हम कैसे गीत गाएंगे। इससे पूर्व प्राचार्य डा. रामसेवक शर्मा, डा.आरके त्रिपाठी, डा. पीके सारस्वत व डा. अनुपमा चतुर्वेदी ने मुख्य अतिथियों व आए हुए कवियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। मंच संचालन डा. अमित अग्रवाल व डा. अनुपमा चुतर्वेदी ने किया।