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पशुओं के इलाज के लिए पर्याप्त चिकित्सक न वैक्सीन
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पशुओं के इलाज के लिए पर्याप्त चिकित्सक न वैक्सीन
जिले में पांच लाख हैं दुधारू पशु, चिकित्सक मात्र 24, अन्य स्टॉफ भी कम
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। गर्मी के दिनों में दुधारू एवं पालतू पशुुओं में गलाघोंटू, मुंहपका और खुरपका जैसी संक्रामक बीमारी का अंदेशा बढ़ जाता है। लेकिन इनके इलाज के लिए पशु चिकित्सा विभाग के पास इंतजाम पर्याप्त नहीं हैं। पशु चिकित्सकों और स्टाफ की है। जिले में 4.95 लाख पशुओं के उपचार के लिए महज 24 चिकित्सक तैनात है। यानि 20,625 पशुओं पर एक चिकित्सक की उपलब्धता है। एक साल से संक्रामक बीमारी से बचाव के लिए जरूरी वैक्सीन शासन से उपलब्ध नहीं हुई है।
जिले में दूूध देने वाले एवं प्रजनन योग्य पशु गाय और भैंस की कुल संख्या चार लाख 95 हजार है। जिले की पांच तहसील एवं 25 ब्लॉक न्याय पंचायत स्तर पर संचालित पशु चिकित्सालयों में विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों एवं पशुधन प्रसार अधिकारियों की कमी है। इसके अलावा पशु चिकित्सकों की सहायता के लिए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद रिक्त होने के कारण व्यवस्थाएं चौपट रहती हैं।
पशु चिकित्सकों के स्वीकृत पद - 30
उपलब्ध पशु चिकित्सक - 24
पशुधन प्रसार अधिकारी के स्वीकृत पद - 40
उपलब्ध पशुधन प्रसार अधिकारी - 26
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के स्वीकृत पद - 65
उपलब्ध चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी - 30
इटारी और फरिहा में पशु चिकित्सालय बने पर चिकित्सक नहीं
वित्तीय वर्ष 2020-21 में इटारी और फरिहा में दो पशु अस्पताल भवन बने हुए हैं लेकिन पशु चिकित्सकों का इंतजार है। पशु चिकित्सकों की कमी के कारण इन दोनों जगहों पर चिकित्सा सेवा कार्य शुरू नहीं हो सका है। विभाग ने दो अतिरिक्त पशु चिकित्सकों की तैनाती को पद सृजन की मांग की है।
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दुधारू पशुओं को संक्रामक बीमारी से बचाव के लिए ग्रामीणों और पशु पालकों को जागरूक कर रहे हैं। गलाघोंटू, मुंहपका और खुरपका जैसी बीमारी से बचाव को अभी वैक्सीन की सप्लाई नहीं मिली है। जहां तक चिकित्सा स्टॉफ की बात है, जिले में 06 चिकित्सक के अलावा 14 पैरामेडिकल स्टाफ व 35 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की आवश्यकता है।
जितेंद्र कुमार, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
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जिले में पांच लाख हैं दुधारू पशु, चिकित्सक मात्र 24, अन्य स्टॉफ भी कम
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। गर्मी के दिनों में दुधारू एवं पालतू पशुुओं में गलाघोंटू, मुंहपका और खुरपका जैसी संक्रामक बीमारी का अंदेशा बढ़ जाता है। लेकिन इनके इलाज के लिए पशु चिकित्सा विभाग के पास इंतजाम पर्याप्त नहीं हैं। पशु चिकित्सकों और स्टाफ की है। जिले में 4.95 लाख पशुओं के उपचार के लिए महज 24 चिकित्सक तैनात है। यानि 20,625 पशुओं पर एक चिकित्सक की उपलब्धता है। एक साल से संक्रामक बीमारी से बचाव के लिए जरूरी वैक्सीन शासन से उपलब्ध नहीं हुई है।
जिले में दूूध देने वाले एवं प्रजनन योग्य पशु गाय और भैंस की कुल संख्या चार लाख 95 हजार है। जिले की पांच तहसील एवं 25 ब्लॉक न्याय पंचायत स्तर पर संचालित पशु चिकित्सालयों में विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों एवं पशुधन प्रसार अधिकारियों की कमी है। इसके अलावा पशु चिकित्सकों की सहायता के लिए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद रिक्त होने के कारण व्यवस्थाएं चौपट रहती हैं।
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पशु चिकित्सकों के स्वीकृत पद - 30
उपलब्ध पशु चिकित्सक - 24
पशुधन प्रसार अधिकारी के स्वीकृत पद - 40
उपलब्ध पशुधन प्रसार अधिकारी - 26
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के स्वीकृत पद - 65
उपलब्ध चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी - 30
इटारी और फरिहा में पशु चिकित्सालय बने पर चिकित्सक नहीं
वित्तीय वर्ष 2020-21 में इटारी और फरिहा में दो पशु अस्पताल भवन बने हुए हैं लेकिन पशु चिकित्सकों का इंतजार है। पशु चिकित्सकों की कमी के कारण इन दोनों जगहों पर चिकित्सा सेवा कार्य शुरू नहीं हो सका है। विभाग ने दो अतिरिक्त पशु चिकित्सकों की तैनाती को पद सृजन की मांग की है।
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दुधारू पशुओं को संक्रामक बीमारी से बचाव के लिए ग्रामीणों और पशु पालकों को जागरूक कर रहे हैं। गलाघोंटू, मुंहपका और खुरपका जैसी बीमारी से बचाव को अभी वैक्सीन की सप्लाई नहीं मिली है। जहां तक चिकित्सा स्टॉफ की बात है, जिले में 06 चिकित्सक के अलावा 14 पैरामेडिकल स्टाफ व 35 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की आवश्यकता है।
जितेंद्र कुमार, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी