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दो छात्राओं ने की जान देने की कोशिश, तोड़फोड़ और हंगामा

Wed, 09 Dec 2015 11:18 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद Updated Wed, 09 Dec 2015 11:18 PM IST
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Two students had tried to kill, sabotage and chaos
एफएच मेडिकल कालेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के 150 में से 87 छात्र-छात्राएं फेल हो गए। इससे तनाव में आई दो छात्राओं ने मंगलवार की रात नींद की गोलियां खाकर जान देने की कोशिश की। गंभीर हालत में उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है। इससे गुस्साए छात्र-छात्राओं ने कालेज में हंगामा किया। तोड़फोड़ करने के बाद भूख हड़ताल पर बैठ गए।
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एफएच मेडिकल कालेज कानपुर-आगरा हाईवे पर स्थित है। इस बार एमबीबीएस प्रथम वर्ष में कुल 150 छात्र-छात्राएं हैं। मंगलवार सायं पहले सत्र का परीक्षा परिणाम घोषित किया गया तो 87 छात्र-छात्राएं फेल थे। मंगलवार रात फेल होने से आहत होकर जान देने की कोशिश वाली छात्रा सुष्मिता आगरा व प्रिया बिहार की रहने वाली हैं, इन्हें गंभीर हालत में हास्टल की वार्डन रीता श्रीवास्तव ने आईसीयू में भर्ती कराया। इसकी जानकारी बुधवार सुबह अन्य फेल हुए छात्र-छात्राओं को हुई तो उनमें आक्रोश भड़क गया। उन्होंने कालेज प्रशासन पर जान बूझकर फेल करने का आरोप लगाते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया। कालेज में रखे गमले उठाकर फेंकने शुरू कर दिए, कालेज परिसर में तोड़फोड़ की। छात्रों का आरोप है कि उनकी परीक्षाएं अच्छी हुई थी, फिर भी उन्हें फेल किया गया हैं, जबकि कालेज प्रबंधतंत्र के डायरेक्टर के पुत्र अनस जावेद को तीसरी रैंक दी गई है। हास्टल वार्डन पर भी उन्होंने अभद्रता करने और जेल भिजवाने की धमकी देन ेका आरोप लगाया। हंगामे की जानकारी मिलने पर थाना पुलिस  मौके पहुंच गई और छात्रों को समझाने का प्रयास किया। छात्र नहीं माने और भूख हड़ताल पर बैठ गए।
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आरोप, धोखे में रखकर कराया एग्रीमेंट
एमबीबीएस प्रथम वर्ष में फेल हुए छात्र-छात्राओं का आरोप है कि कालेज प्रशासन ने उन्हें धोखे में रखकर उनसे एक एग्रीमेंट कराया है। इसके अनुसार फेल होने वाले छात्रों को सप्लीमेंट्री परीक्षा देने के लिए चार-चार लाख रुपये अतिरिक्त देने होंगे। इसके अलावा फाइन के नाम पर लाखों रुपये वसूले जाते हैं, जिनकी कोई रसीद नहीं दी जाती है।
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वर्जन
फेल और पास करने का काम आगरा विवि का है। जो छात्र मेहनत करता है, उसे सफलता हासिल होती है और जो नहीं पढ़ता है वह फेल होता है। छात्र-छात्राओं की शिकायत सही नहीं हैं। कालेज छात्रों का बुरा क्यों चाहेगा। हम उनके हितैषी हैं। फाइन में वसूले जाने वाला पैसा छात्रों के वेलफेयर पर खर्च होता है। छात्राओं की तबियत दर्द निवारक दवा का अधिक सेवन करने की वजह से खराब हुई है। फेल होने पर उन्होंने आत्मघाती कदम नहीं उठाया। वे अब ठीक है।
कर्नल एके शुक्ला,
प्राचार्य-एफएच मेडिकल कालेज, टूंडला
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