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काैन है तहसीलदार: सुशील ने संभाला प्रभार, राखी बोलीं- मैंने चार्ज नहीं छोड़ा; दिनभर पसोपेश में रही जनता
Sun, 19 Apr 2026 09:12 AM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Published by: Arun Parashar
Updated Sun, 19 Apr 2026 09:12 AM IST
सार
राखी शर्मा ने कहा कि मैंने अब तक प्रभार नहीं छोड़ा है और न ही किसी को चार्ज साैंपा है। बिना प्रभार हस्तांतरण की निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया के कोई दूसरा व्यक्ति कुर्सी पर कैसे बैठ सकता है। उन्होंने इसे नियमों के विरुद्ध बताते हुए आशंका जताई कि उनके कार्यालय की महत्वपूर्ण फाइलों और दस्तावेजों के साथ छेड़खानी की जा सकती है।
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तहसीलदार राखी शर्मा।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
टूंडला तहसील में शनिवार को अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई। सिरसागंज से स्थानांतरित होकर आए सुशील कुमार ने तहसीलदार का पदभार ग्रहण कर लिया लेकिन टूंडला की तहसीलदार राखी शर्मा ने उनकी तैनाती को अवैध बताते हुए प्रभार छोड़ने से साफ इन्कार कर दिया। उधर, देर शाम उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने राखी शर्मा के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें राजस्व परिषद (लखनऊ) मुख्यालय से संबद्ध कर दिया। गंभीर अनुशासनहीनता और नियमों के उल्लंघन पर यह कार्रवाई की गई है। वहीं, उत्तर प्रदेश शासन ने राखी शर्मा की ओर से जिले के उच्चाधिकारी व उनके अधीनस्थों पर लगाए कथित जमीन घोटाले के आरोपों की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। जांच लखनऊ मंडल आयुक्त को सौंपी गई है।
शनिवार को दिन में टूंडला में जहां तहसीलदार के प्रभार को लेकर खींचतान जारी रही। वहीं, यह चर्चा रही कि राखी शर्मा का स्थानांतरण कर दिया गया है, लेकिन राखी शर्मा ने कहा, मैंने अब तक प्रभार नहीं छोड़ा है और न ही किसी को चार्ज साैंपा है। बिना प्रभार हस्तांतरण की निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया के कोई दूसरा व्यक्ति कुर्सी पर कैसे बैठ सकता है। उन्होंने इसे नियमों के विरुद्ध बताते हुए आशंका जताई कि उनके कार्यालय की महत्वपूर्ण फाइलों और दस्तावेजों के साथ छेड़खानी की जा सकती है। दिन में राखी शर्मा ने दावा किया कि उन्हें शिकोहाबाद तहसील में तबादले का कोई आधिकारिक आदेश प्राप्त ही नहीं हुआ है। साथ ही चुनौती दी कि यदि किसी ने उन्हें तबादला आदेश रिसीव कराया है तो उसकी प्रति सार्वजनिक की जाए।
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शनिवार को दिन में टूंडला में जहां तहसीलदार के प्रभार को लेकर खींचतान जारी रही। वहीं, यह चर्चा रही कि राखी शर्मा का स्थानांतरण कर दिया गया है, लेकिन राखी शर्मा ने कहा, मैंने अब तक प्रभार नहीं छोड़ा है और न ही किसी को चार्ज साैंपा है। बिना प्रभार हस्तांतरण की निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया के कोई दूसरा व्यक्ति कुर्सी पर कैसे बैठ सकता है। उन्होंने इसे नियमों के विरुद्ध बताते हुए आशंका जताई कि उनके कार्यालय की महत्वपूर्ण फाइलों और दस्तावेजों के साथ छेड़खानी की जा सकती है। दिन में राखी शर्मा ने दावा किया कि उन्हें शिकोहाबाद तहसील में तबादले का कोई आधिकारिक आदेश प्राप्त ही नहीं हुआ है। साथ ही चुनौती दी कि यदि किसी ने उन्हें तबादला आदेश रिसीव कराया है तो उसकी प्रति सार्वजनिक की जाए।
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स्वतंत्र जांच के लिए सीएम को लिखा था पत्र
भ्रष्टाचार के आरोपों पर अडिग राखी शर्मा ने पूरे मामले की लिखित शिकायत शासन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजी थी। उन्होंने मांग की थी कि उनके द्वारा जिले के शीर्ष अधिकारियों पर लगाए गए 1.75 लाख के आईफोन रिश्वत कांड की निष्पक्ष जांच हो। जनपद में करोड़ों रुपये की सरकारी जमीनों की बंदरबांट और कथित भू-घोटाले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि उनके तबादले की कार्रवाई असल में इस घोटाले की आवाज को दबाने की एक कोशिश है।
दिनभर जनता पसोपेश में रही, अधिकारी मौन
तहसील में चल रही इस नूरा-कुश्ती के बीच आम जनता और अधिवक्ता शनिवार को दिनभर असमंजस में रहे। राजस्व और अन्य सरकारी कार्यों के लिए आने वाले लोग यह तय नहीं कर पा रहे थे कि फिलहाल आधिकारिक हस्ताक्षर किसके मान्य होंगे। इस पूरे हाई वोल्टेज ड्रामे पर जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने अब तक चुप्पी साध रखी है।
भ्रष्टाचार के आरोपों पर अडिग राखी शर्मा ने पूरे मामले की लिखित शिकायत शासन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजी थी। उन्होंने मांग की थी कि उनके द्वारा जिले के शीर्ष अधिकारियों पर लगाए गए 1.75 लाख के आईफोन रिश्वत कांड की निष्पक्ष जांच हो। जनपद में करोड़ों रुपये की सरकारी जमीनों की बंदरबांट और कथित भू-घोटाले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि उनके तबादले की कार्रवाई असल में इस घोटाले की आवाज को दबाने की एक कोशिश है।
दिनभर जनता पसोपेश में रही, अधिकारी मौन
तहसील में चल रही इस नूरा-कुश्ती के बीच आम जनता और अधिवक्ता शनिवार को दिनभर असमंजस में रहे। राजस्व और अन्य सरकारी कार्यों के लिए आने वाले लोग यह तय नहीं कर पा रहे थे कि फिलहाल आधिकारिक हस्ताक्षर किसके मान्य होंगे। इस पूरे हाई वोल्टेज ड्रामे पर जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने अब तक चुप्पी साध रखी है।