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फिरोजाबाद में प्रशासनिक भूचाल: तहसीलदार ने उच्चाधिकारी पर लगाए भ्रष्टाचार के संगीन आरोप, दर्ज कराई एफआईआर

Fri, 17 Apr 2026 09:01 PM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Published by: Arun Parashar Updated Fri, 17 Apr 2026 09:01 PM IST
सार

यूपी के फिरोजाबाद जिले में प्रशासनिक भूचाल का मामला सामने आया है। तहसीलदार ने उच्चाधिकारियों पर संगीन आरोप लगाए हैं। साथ ही एक एफआईआर दर्ज कराई है। वहीं, पूरे मामले में जिला प्रशासन की ओर से भी सफाई दी गई है।

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Tundla Tehsildar Rakhi Sharma levels serious allegations against Firozabad DM
तहसीलदार राखी शर्मा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

फिरोजाबाद के जनपद के प्रशासनिक गलियारे में बृहस्पतिवार रात खलबली मच गई। टूंडला तहसीलदार राखी शर्मा ने अपने तबादले के बाद जिले के शीर्ष अधिकारी और अधीनस्थ कर्मचारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। तहसीलदार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगाए। साथ ही देर रात टूंडला इलाके के एक व्यक्ति पर प्राथमिकी दर्ज कराई है। इधर, तहसीलदार के आरोपों के जवाब में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ ने भी लामबंद हो गया। तहसीलदार के दावों को झूठा करार देते हुए उनके विरुद्ध मंडलायुक्त आगरा से कार्रवाई की मांग की है।
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पूरे घटनाक्रम की पटकथा बृहस्पतिवार को तब लिखी गई जब तहसीलदार राखी शर्मा का स्थानांतरण टूंडला से शिकोहाबाद तहसील के लिए कर दिया गया। तबादले का आदेश आते ही तहसीलदार ने देर रात प्रेस वार्ता बुलाकर उच्चाधिकारियों पर सीधा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ एक विभागीय जांच को रफा-दफा करने के एवज में उनसे 1.75 लाख रुपये का कीमती आईफोन रिश्वत के तौर पर लिया गया। तहसीलदार ने आला अधिकारियों के साथ-साथ उनके करीबियों पर भी मानसिक शोषण का आरोप मढ़ा। 
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प्रेस वार्ता के दौरान तहसीलदार ने जिले में बड़े स्तर पर चल रहे कथित जमीन घोटाले का दावा भी किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले के बाबुओं और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की सरकारी जमीनों की बंदरबांट की गई है। इसे जनपद का सबसे बड़ा भू-घोटाला बताते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गुहार लगाई है।

प्रशासनिक रार के बीच प्राथमिकी दर्ज
प्रशासनिक रार के बीच तहसीलदार राखी शर्मा ने टूंडला के ब्रजविहार कॉलोनी निवासी रंजित गुप्ता के विरुद्ध भी शिकंजा कसा। तहसीलदार की तहरीर पर पुलिस ने रंजित के खिलाफ ब्लैकमेलिंग, मानहानि और आईटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। तहसीलदार का आरोप है कि रंजित अवैध कार्यों के लिए दबाव बना रहा था और असफल होने पर सोशल मीडिया के माध्यम से अधिकारी की छवि धूमिल करने की कोशिश कर रहा था।

 

शुक्रवार को कर्मचारी संघ ने मोर्चा खोल, कमिश्नर को लिखा पत्र
तहसीलदार के इन आरोपों के बीच शुक्रवार को उत्तर प्रदेश मिनिस्ट्रियल कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ ने तहसीलदार के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे उनकी हताशा बताया है। संघ के जिला अध्यक्ष प्रदीप शर्मा ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी राजेंद्र खन्ना और ओएसडी शीलेंद्र शर्मा पर लगाए गए आरोप निराधार हैं। संघ ने इस संबंध में मंडलायुक्त (कमिश्नर) आगरा मंडल को पत्र लिखकर तहसीलदार के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।

 
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प्रशासनिक साख पर संकट
एक अधीनस्थ अधिकारी द्वारा जिले के उच्चाधिकारी पर इस तरह के खुले भ्रष्टाचार के आरोप लगाना फिरोजाबाद के इतिहास की विरली घटना मानी जा रही है। जहां एक ओर तहसीलदार अपने आरोपों पर अडिग हैं, वहीं दूसरी ओर उच्चाधिकारियों और कर्मचारी संगठनों की एकजुटता ने इस विवाद को और गहरा कर दिया है। अब सबकी नजरें शासन के रुख और होने वाली संभावित जांच/कार्रवाई पर टिकी हैं।

 

प्रशासनिक की सफाईः तबादले से उपजा आक्रोश हैं तहसीलदार के आरोप
टूंडला तहसीलदार राखी शर्मा द्वारा उच्चाधिकारी पर लगाए गए भ्रष्टाचार और शोषण के आरोपों को जिला प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर निराधार और तबादले से उपजा आक्रोश करार दिया है। हालांकि प्रशासन ने यह सफाई जरूर जारी की है। मगर, इसे किसी के नाम-पदनाम के हवाले से नहीं दिया है। जिला प्रशासन की ओर से जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, राखी शर्मा का स्थानांतरण 16 अप्रैल 2026 को प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत अन्य तहसीलदारों के साथ किया गया था। प्रशासन का कहना है कि वे लगातार शासकीय कार्यों में लापरवाही बरत रही थीं और राजस्व परिषद के आदेशों की अवहेलना के चलते उन्हें पहले भी प्रतिकूल प्रविष्टि दी जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने उच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद नोटिसों का जवाब नहीं दिया, जो कर्मचारी आचरण नियमावली का सीधा उल्लंघन है। प्रशासन का दावा है कि तहसीलदार अपने विरुद्ध चल रही जांचों को प्रभावित करने के लिए ओएसडी शीलेंद्र शर्मा और अन्य अधीनस्थ कर्मचारियों पर मनगढ़ंत आरोप लगा रही हैं। वहीं, रंजीत के विरुद्ध प्राथमिकी न होने का उनका दावा भी गलत पाया गया है, क्योंकि पुलिस द्वारा मामला दर्ज किया जा चुका है।

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