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टीटीएसपी घोटालाः तत्कालीन एक्सईएन, चहेते ठेकेदारों की फंसेगी गर्दन
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Sun, 29 Mar 2015 10:56 PM IST
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टीटीएसपी को मिले 47 करोड़ 99 लाख 83 हजार के बजट का हिसाब जलनिगम के अधिकारी नहीं दे सके। साढ़े नौ करोड़ रुपया कहां खर्च किया, इसका ब्योरा जांच टीम को नहीं मिल सका है। घपले में तत्कालीन एक्सईएन की गर्दन फंसती नजर आ रही है।
जिले में तेजी से गिरते जलस्तर के कारण ही हैंडपंपों के स्थान पर टीटीएसपी (टैंक टाइप स्टेंड पोस्ट) की स्थापना करने का निर्णय बसपा शासन में लिया गया था। शासन की ओर से इनकी स्थापना के लिए प्रतिवर्ष करोड़ों का बजट भी जारी किया था। जल निगम के अफसरों ने मनमाने ढंग से लाखों के बजट को खर्च किया। तत्कालीन सीडीओ हीरालाल ने टीटीएसपी की बीडीओ के माध्यम से जांच कराई तो टीटीएसपी कम मिली। वहीं अधिकांश चालू हालत में नहीं थी। इस पर डीएम विजय किरन आनंद ने मामले की जांच सीडीओ सुजीत कुमार को सौंप दी। जांच टीम में वरिष्ठ कोषाधिकारी पुष्पराज को भी शामिल किया गया। टीम ने जांच शुरू की तो जलनिगम अफसरों और स्टाफ की गलती की परतें खुलना शुरू हो गईं। सूत्रों की मानें विभाग ने 752 टीटीएसपी लगाने की बात कही थी। इसके बावजूद टीम को सूची 788 की सौंपी गई। बीडीओ के माध्यम से जांच कराई तो 701 की सूची मिली। 51 टंकियां आखिर कहां लगी हैं? इनकी जानकारी अब तक नहीं हो सकी है। वहीं 950.74 लाख रुपया विभाग ने कहां खर्च किया इसका हिसाब नहीं है।
टीटीएसपी स्थापना को मिला धन का ब्योरा...
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वित्तीय वर्ष मिला धन खर्च अवशेष
2008-09 213.94 00.00 213.94
2009-10 213.14 203.97 09.97
2010-11 534.84 311.85 222.99
2011-12 1825.30 1298.06 527.24
2012-13 1420.185 1531.80 -111.625
2013-14 591.625 503.41 88.215
---------------------------------
कुल 4799.83 3849.09 950.74
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नोट: जल निगम को टीटीएसपी स्थापना को मिली धनराशि लाख में है।
जांच कमेटी के प्रारूप ने खोले कई राज
सीडीओ सुजीत कुमार की अध्यक्षता में गठित कमेटी द्वारा जलनिगम से दिए गए प्रारूप में रिपोर्ट मांगी गई तो काफी कुछ राज रिपोर्ट में ही खुल गए। इसमें एक ही ठेकेदार को काम अधिक क्यों दिया? आदि कई ऐसे सवाल है। कुछ एक्सईएन ने अपने रिश्तेदारों और चहेतों को काम दे डाला। उनकी भी गर्दन फंसती दिखाई दे रही है।
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जिले में तेजी से गिरते जलस्तर के कारण ही हैंडपंपों के स्थान पर टीटीएसपी (टैंक टाइप स्टेंड पोस्ट) की स्थापना करने का निर्णय बसपा शासन में लिया गया था। शासन की ओर से इनकी स्थापना के लिए प्रतिवर्ष करोड़ों का बजट भी जारी किया था। जल निगम के अफसरों ने मनमाने ढंग से लाखों के बजट को खर्च किया। तत्कालीन सीडीओ हीरालाल ने टीटीएसपी की बीडीओ के माध्यम से जांच कराई तो टीटीएसपी कम मिली। वहीं अधिकांश चालू हालत में नहीं थी। इस पर डीएम विजय किरन आनंद ने मामले की जांच सीडीओ सुजीत कुमार को सौंप दी। जांच टीम में वरिष्ठ कोषाधिकारी पुष्पराज को भी शामिल किया गया। टीम ने जांच शुरू की तो जलनिगम अफसरों और स्टाफ की गलती की परतें खुलना शुरू हो गईं। सूत्रों की मानें विभाग ने 752 टीटीएसपी लगाने की बात कही थी। इसके बावजूद टीम को सूची 788 की सौंपी गई। बीडीओ के माध्यम से जांच कराई तो 701 की सूची मिली। 51 टंकियां आखिर कहां लगी हैं? इनकी जानकारी अब तक नहीं हो सकी है। वहीं 950.74 लाख रुपया विभाग ने कहां खर्च किया इसका हिसाब नहीं है।
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टीटीएसपी स्थापना को मिला धन का ब्योरा...
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वित्तीय वर्ष मिला धन खर्च अवशेष
2008-09 213.94 00.00 213.94
2009-10 213.14 203.97 09.97
2010-11 534.84 311.85 222.99
2011-12 1825.30 1298.06 527.24
2012-13 1420.185 1531.80 -111.625
2013-14 591.625 503.41 88.215
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कुल 4799.83 3849.09 950.74
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नोट: जल निगम को टीटीएसपी स्थापना को मिली धनराशि लाख में है।
जांच कमेटी के प्रारूप ने खोले कई राज
सीडीओ सुजीत कुमार की अध्यक्षता में गठित कमेटी द्वारा जलनिगम से दिए गए प्रारूप में रिपोर्ट मांगी गई तो काफी कुछ राज रिपोर्ट में ही खुल गए। इसमें एक ही ठेकेदार को काम अधिक क्यों दिया? आदि कई ऐसे सवाल है। कुछ एक्सईएन ने अपने रिश्तेदारों और चहेतों को काम दे डाला। उनकी भी गर्दन फंसती दिखाई दे रही है।
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