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उपचार मिला न ऑक्सीजन, 12 मरीजों ने तोड़ा दम
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जिला अस्पताल के एमआईसीयू वार्ड में ऑक्सीजन खत्म होने के बाद एंबुलेंस से आक्सीजन लगाकर मरीज को सभ?
- फोटो : FIROZABAD
फिरोजाबाद। सुहागनगरी में ऑक्सीजन का संकट गहराता जा रहा है। तीमारदारों के हाथों में मरीज दम तोड़ रहे है। सोमवार को ऑक्सीजन के अभाव और समय से उपचार न मिलने के कारण 12 मरीजों ने दम तोड़ दिया। सरकारी ट्रॉमा सेंटर में पांच, वार्ड नंबर चार में तीन, सॉरी वार्ड में एक, हाईवे पर एक और एफएच मेडिकल कॉलेज में दो मरीजों ने दम तोड़ दिया।
जिला अस्पताल परिसर में बने सॉरी वार्ड में सोमवार सुबह करीब चार बजे ऑक्सीजन खत्म हो गई। वार्ड में भर्ती मरीज जीवन और मौत के बीच संघर्ष करने लगे। ऑक्सीजन खत्म होने की जानकारी पर वार्ड के बाहर बैठे तीमारदारों ने चिकित्सक और स्टाफ से संपर्क साधा।
स्वास्थ्य अधिकारियों के फोन पर संपर्क साधने की कोशिश की लेकिन सुबह साढ़े छह बजे तक किसी ने फोन नहीं उठाया। तीमारदार ऑक्सीजन के लिए इधर से उधर भटकते रहे। इस बीच सॉरी वार्ड में भर्ती छिबरामऊ निवासी ऊषा देवी की मौत हो गई। ऊषा देवी के बेटे शिवकांत ने बताया कि सुबह करीब चार बजे ऑक्सीजन खत्म होने से मां की मौत हुई है। उन्हें विगत 12 अप्रैल को सॉरी वार्ड में भर्ती कराया गया था। महिला की मौत के बाद ऊषा के परिजनों के साथ अन्य मरीजों के तीमारदारों में आक्रोश बढ़ गया और उन्होंने हंगामा कर दिया। इस पर स्टाफ और चिकित्सक सॉरी वार्ड में भर्ती अन्य मरीजों को भगवान भरोसे छोड़कर दूसरी मंजिल पर पहुंच गए।
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सूचना पर थाना उत्तर से फोर्स पहुंच गई। पुलिस ने आक्रोशित लोगों को समझाकर मामले को शांत किया। इसके बाद तकरीबन नौ बजे ऑक्सीजन लेकर एक गाड़ी अस्पताल पहुंची और मरीजों को ऑक्सीजन मिल सकी। इधर, दोपहर करीब तीन बजे सरकारी ट्रॉमा सेंटर में भर्ती विपिन कुमार गर्ग निवासी हिमायूंपुर की मौत हो गई।
वहीं शिकोहाबाद के निजी अस्पताल में भर्ती विधूना निवासी कुसुम की भी ऑक्सीजन न मिलने के कारण हालत बिगड़ गई। एकाएक अस्पताल में मरीज को बाहर ले जाने को कहा। दिल्ली ले जाते समय एंबुलेंस में मरीज की मौत हो गई। खैरगढ़ निवासी कमलेश की मौत ट्रामा सेंटर के गेट पर दम तोड़ दिया। कुसुम के पुत्र अमित ने बताया कि वह देर रात से मां को भर्ती करने की गुहार लगाता रहा लेकिन चिकित्सक व कर्मचारी नहीं आए।
जरौली कलां निवासी 20 वर्षीय बीना की भी सरकारी ट्रॉमा सेंटर में ऑक्सीजन के अभाव में मौत हो गई। बीना के पिता शिव नारायन ने अस्पताल प्रशासन पर आरोप लगाए। कहा यदि बेटी को समय से ऑक्सीजन मिल जाती तो उसकी जान बच जाती। वहीं तीन मरीजों ने वार्ड नंबर चार में दम तोड़ दिया। चौकी प्रभारी जिला अस्पताल का कहना है कि मृतक के परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया।
अच्छा इलाज चाहिए तो प्राइवेट अस्पताल ले जाओ
फिरोजाबाद। बढ़ते कोरोना संक्रमण में चिकित्सकों और अस्पताल स्टाफ का व्यवहार भी मरीजों और तीमारदारों की हिम्मत तोड़ रहा है। ऑक्सीजन खत्म होने पर सोमवार तड़के तीमारदारों ने चिकित्सक और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों से ऑक्सीजन का इंतजाम करने के लिए कहा लेकिन किसी ने संतोषजनक उत्तर नहीं दिया। चिकित्सक बोले, जो संसाधन है, उससे ही इलाज मिलेगा। कोई और व्यवस्था नहीं कर सकते। अच्छा और बेहतर इलाज चाहिए, तो मरीज को प्राइवेट ले जाओ।
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जिला अस्पताल परिसर में बने सॉरी वार्ड में सोमवार सुबह करीब चार बजे ऑक्सीजन खत्म हो गई। वार्ड में भर्ती मरीज जीवन और मौत के बीच संघर्ष करने लगे। ऑक्सीजन खत्म होने की जानकारी पर वार्ड के बाहर बैठे तीमारदारों ने चिकित्सक और स्टाफ से संपर्क साधा।
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स्वास्थ्य अधिकारियों के फोन पर संपर्क साधने की कोशिश की लेकिन सुबह साढ़े छह बजे तक किसी ने फोन नहीं उठाया। तीमारदार ऑक्सीजन के लिए इधर से उधर भटकते रहे। इस बीच सॉरी वार्ड में भर्ती छिबरामऊ निवासी ऊषा देवी की मौत हो गई। ऊषा देवी के बेटे शिवकांत ने बताया कि सुबह करीब चार बजे ऑक्सीजन खत्म होने से मां की मौत हुई है। उन्हें विगत 12 अप्रैल को सॉरी वार्ड में भर्ती कराया गया था। महिला की मौत के बाद ऊषा के परिजनों के साथ अन्य मरीजों के तीमारदारों में आक्रोश बढ़ गया और उन्होंने हंगामा कर दिया। इस पर स्टाफ और चिकित्सक सॉरी वार्ड में भर्ती अन्य मरीजों को भगवान भरोसे छोड़कर दूसरी मंजिल पर पहुंच गए।
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सूचना पर थाना उत्तर से फोर्स पहुंच गई। पुलिस ने आक्रोशित लोगों को समझाकर मामले को शांत किया। इसके बाद तकरीबन नौ बजे ऑक्सीजन लेकर एक गाड़ी अस्पताल पहुंची और मरीजों को ऑक्सीजन मिल सकी। इधर, दोपहर करीब तीन बजे सरकारी ट्रॉमा सेंटर में भर्ती विपिन कुमार गर्ग निवासी हिमायूंपुर की मौत हो गई।
वहीं शिकोहाबाद के निजी अस्पताल में भर्ती विधूना निवासी कुसुम की भी ऑक्सीजन न मिलने के कारण हालत बिगड़ गई। एकाएक अस्पताल में मरीज को बाहर ले जाने को कहा। दिल्ली ले जाते समय एंबुलेंस में मरीज की मौत हो गई। खैरगढ़ निवासी कमलेश की मौत ट्रामा सेंटर के गेट पर दम तोड़ दिया। कुसुम के पुत्र अमित ने बताया कि वह देर रात से मां को भर्ती करने की गुहार लगाता रहा लेकिन चिकित्सक व कर्मचारी नहीं आए।
जरौली कलां निवासी 20 वर्षीय बीना की भी सरकारी ट्रॉमा सेंटर में ऑक्सीजन के अभाव में मौत हो गई। बीना के पिता शिव नारायन ने अस्पताल प्रशासन पर आरोप लगाए। कहा यदि बेटी को समय से ऑक्सीजन मिल जाती तो उसकी जान बच जाती। वहीं तीन मरीजों ने वार्ड नंबर चार में दम तोड़ दिया। चौकी प्रभारी जिला अस्पताल का कहना है कि मृतक के परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया।
अच्छा इलाज चाहिए तो प्राइवेट अस्पताल ले जाओ
फिरोजाबाद। बढ़ते कोरोना संक्रमण में चिकित्सकों और अस्पताल स्टाफ का व्यवहार भी मरीजों और तीमारदारों की हिम्मत तोड़ रहा है। ऑक्सीजन खत्म होने पर सोमवार तड़के तीमारदारों ने चिकित्सक और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों से ऑक्सीजन का इंतजाम करने के लिए कहा लेकिन किसी ने संतोषजनक उत्तर नहीं दिया। चिकित्सक बोले, जो संसाधन है, उससे ही इलाज मिलेगा। कोई और व्यवस्था नहीं कर सकते। अच्छा और बेहतर इलाज चाहिए, तो मरीज को प्राइवेट ले जाओ।