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खंडपीठ की मांग के लिए अधिवक्ताओं ने किया ट्रैक जाम
ब्यूरो अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Thu, 05 Feb 2015 11:24 PM IST
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खंडपीठ की मांग को लेकर अधिवक्ता न्यायालय परिसर से मार्च करते हुए मक्खनपुर रेलवे स्टेशन पहुंच गए। यहां उन्होंने ट्रैक पर कब्जा कर दो मालगाड़ियों को रुकवा दिया। एसडीएम सदर और मुख्यालय के साथ काफी संख्या में जीआरपी, आरपीएफ, पीएसी और कई थानों की पुलिस पहुंच गई। ट्रैक जाम होने से दिल्ली कानपुर रेल मार्ग पूरी तरह बाधित रहा।
खंडपीठ की मांग को लेकर गुरुवार को अधिवक्ताओं में शासन के प्रति आक्रोश दिखाई दिया। न्यायालय परिसर में बार अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान अधिवक्ताओं ने विचार व्यक्त किए। इसके बाद वकीलों का एक जुलूस न्यायालय परिसर से शुरू हुआ। जो मैन गेट होते ही हाईवे पर पहुंच गया। इससे यातायात बाधित हो गया। खंडपीठ की मांग को लेकर नारेबाजी करते हुए वकील हाईवे से मक्खनपुर रेलवे स्टेशन पर आ धमके। उन्होंने रेलवे ट्रैक पर कब्जा जमा लिया। इस पर स्टेशन मास्टर ने कंट्रोल रूम कोे ट्रैक पर कब्जा करने की जानकारी दी। इसके तुरंत बाद अलीगढ़ से कानपुर जाने वाली पनकी गुर्ड्स मालगाड़ी को लूप लाइन पर रोक दिया गया। यह ट्रेन एक बजकर 49 मिनट पर ट्रैक पर पहुंची थी। जबकि एमटी बैगनआर को स्टेशन मास्टर ने कानपुर जाने वाली मैन लाइन पर ही रोक लिया। यह ट्रेन एक बजकर 55 मिनट पर स्टेशन पर पहुंची थी। ट्रेनों के रुकते ही अधिवक्ता उनके इंजन पर चढ़ गए तो कुछ अधिवक्ता ट्रैक पर धरने पर बैठ गए। करीब आधा घंटे तक ट्रैक पर कब्जा किए जाने के कारण दिल्ली कानपुर रेल मार्ग पूरी तरह से बाधित हो गया। बाद में एसडीएम सदर और मुख्यालय ने आक्रोशित अधिवक्ताओं को समझा बुझाकर ट्रैक से हटाया। इसके बाद ट्रेनों को गंतव्य स्थान के लिए रवाना किया गया। बार अध्यक्ष की ओर से एसडीएम सदर को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। सर्वेश यादव, धर्म सिंह यादव, अजय यादव, नृपत सिंह यादव, प्रभात नगीना, राजेश यादव आदि अधिवक्ता मौजूद थे।
डीएम के कहने पर बदला आंदोलन का स्थान
वकीलों द्वारा जिला मुख्यालय के सामने दबरई फाटक पर ट्रैक जाम करने की प्लानिंग थी लेकिन वहां पर सिग्नल न होने के कारण प्रशासन द्वारा की गई अपील के बाद अधिवक्ताओं ने मक्खनपुर स्टेशन पर ट्रेन रोकने का निर्णय लिया था।
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छावनी बना दिया न्यायालय परिसर और स्टेशन
आंदोलन को देखते हुए न्यायालय परिसर के साथ मक्खनपुर रेलवे स्टेशन को छावनी बना दिया था। आरपीएफ, जीआरपी थाने के फोर्स के साथ पीएसी, थानाध्यक्ष मक्खनपुर, बसई मोहम्मदपुर, मटसेना तथा लाइनपार थानाध्यक्ष पुलिस बल के साथ पूरे आंदोलन के दौरान मौजूद रहे।
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खंडपीठ की मांग को लेकर गुरुवार को अधिवक्ताओं में शासन के प्रति आक्रोश दिखाई दिया। न्यायालय परिसर में बार अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान अधिवक्ताओं ने विचार व्यक्त किए। इसके बाद वकीलों का एक जुलूस न्यायालय परिसर से शुरू हुआ। जो मैन गेट होते ही हाईवे पर पहुंच गया। इससे यातायात बाधित हो गया। खंडपीठ की मांग को लेकर नारेबाजी करते हुए वकील हाईवे से मक्खनपुर रेलवे स्टेशन पर आ धमके। उन्होंने रेलवे ट्रैक पर कब्जा जमा लिया। इस पर स्टेशन मास्टर ने कंट्रोल रूम कोे ट्रैक पर कब्जा करने की जानकारी दी। इसके तुरंत बाद अलीगढ़ से कानपुर जाने वाली पनकी गुर्ड्स मालगाड़ी को लूप लाइन पर रोक दिया गया। यह ट्रेन एक बजकर 49 मिनट पर ट्रैक पर पहुंची थी। जबकि एमटी बैगनआर को स्टेशन मास्टर ने कानपुर जाने वाली मैन लाइन पर ही रोक लिया। यह ट्रेन एक बजकर 55 मिनट पर स्टेशन पर पहुंची थी। ट्रेनों के रुकते ही अधिवक्ता उनके इंजन पर चढ़ गए तो कुछ अधिवक्ता ट्रैक पर धरने पर बैठ गए। करीब आधा घंटे तक ट्रैक पर कब्जा किए जाने के कारण दिल्ली कानपुर रेल मार्ग पूरी तरह से बाधित हो गया। बाद में एसडीएम सदर और मुख्यालय ने आक्रोशित अधिवक्ताओं को समझा बुझाकर ट्रैक से हटाया। इसके बाद ट्रेनों को गंतव्य स्थान के लिए रवाना किया गया। बार अध्यक्ष की ओर से एसडीएम सदर को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। सर्वेश यादव, धर्म सिंह यादव, अजय यादव, नृपत सिंह यादव, प्रभात नगीना, राजेश यादव आदि अधिवक्ता मौजूद थे।
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डीएम के कहने पर बदला आंदोलन का स्थान
वकीलों द्वारा जिला मुख्यालय के सामने दबरई फाटक पर ट्रैक जाम करने की प्लानिंग थी लेकिन वहां पर सिग्नल न होने के कारण प्रशासन द्वारा की गई अपील के बाद अधिवक्ताओं ने मक्खनपुर स्टेशन पर ट्रेन रोकने का निर्णय लिया था।
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छावनी बना दिया न्यायालय परिसर और स्टेशन
आंदोलन को देखते हुए न्यायालय परिसर के साथ मक्खनपुर रेलवे स्टेशन को छावनी बना दिया था। आरपीएफ, जीआरपी थाने के फोर्स के साथ पीएसी, थानाध्यक्ष मक्खनपुर, बसई मोहम्मदपुर, मटसेना तथा लाइनपार थानाध्यक्ष पुलिस बल के साथ पूरे आंदोलन के दौरान मौजूद रहे।