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सिरसागंज में होगी टिश्यू कल्चर लैब की स्थापना
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Mon, 22 Jun 2015 11:52 PM IST
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विश्व स्तरीय मानक की टिश्यू कल्चर लैब की स्थापना सिरसागंज में होगी। ऐसे में यहां पंजाब और हिमाचल की तरह आलू और केले का वायरस फ्री बीज तैयार होगा। इससे व्यापार में चार चांद लगेंगे। करोड़ों की लागत से तैयार होने वाले प्रोजेक्ट का शुभारंभ 24 जून को डीएम करेंगे।
आलू के व्यापार में सिरसागंज का महत्वपूर्ण स्थान है। अब आगे आने वाले समय में आलू के व्यापार में सिरसागंज अपनी अलग पहचान बनाएगा। इसके लिए सिरसागंज के अरांव रोड पर शांति कोल्ड स्टोर में टिश्यू कल्चर लैब की स्थापना की जा रही है। लैब की स्थापना होने के बाद अब किसानों को विश्वस्तरीय आलू का बीज मिलेगा। प्रोजेक्ट की जानकारी देते हुए हिमाचल से आए टेक्निकल असिस्टेंट ललित डढ़वाल ने बताया कि टिश्यू कल्चर लैब में सेंट्रल पोटेटो इंस्टीटयूट से आने वाले टेस्ट ट्यूब पौधे को विकसित किया जाएगा। इसके बाद कलम विधि से उसके अन्य पौधे तैयार किए जाएंगे। इस विधि में पहले लैब में पौधा तैयार किया जाएगा और उसके विकसित होने के बाद उसको नेट में रखकर उसकी फसल विधि से बीज की प्राप्ति की जाएगी। आगरा, अलीगढ़ और कानपुर मंडल का यह पहला टिश्यू कल्चर लैब होगा।
कैसे होगा आलू का प्रजनन
टिश्यू कल्चर लैब में सीपीआरआई शिमला से आने वाला वायरस फ्री 10 सेंटीमीटर का पौधा एक टेस्ट ट्यूब के माध्यम से सिरसागंज लाया जाएगा। कयहां कृषि वैज्ञानिक इस पौधे के इसके 15 सेंटीमीटर के होने पर कटिंग कर अन्य टेस्ट ट्यूब पौधे तैयार करेेंगे। इसके बाद इसे जांच के लिए यूएसए भेजा जाऐगा। जांच की संतुष्टि होने पर पौधे को नेट हाउस में लगा दिया जाएगा। यहां 70 से 90 दिन में पौधों से नई फसल प्राप्त हो जाएगी। इसे वैज्ञानिक जी जीरो स्टेज कहते हैं। इस विधि को तीन बार प्रयोग किया जाएगा। इसमें अंत में जी 3 बीज प्राप्त होगा, जो किसानों के लिए शुद्ध आलू का बीज होगा।
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किसानों को लाभ
ललित डढ़वाल ने बताया कि सीपीआरआई शिमला से आने वाला बीज पूर्णत: वायरस फ्री होगा। जब तक इन पौधों के माध्यम से जी जीरो से जी 3 तक के बीज प्राप्त किए जाएंगे, तब तक इसे पूर्णत: विशेषज्ञों की देखरेख में रखा जाएगा। इस विधि से किसानों को आलू का उम्दा और विश्व स्तरीय किस्म का बीज प्राप्त होगा। इससे किसान की पैदावार भी अच्छी होगी और आलू विदेशों में भी बिक्री के लिये भेजा जा सकेगा।
किसानों के सपनों को मिलेगी नई उड़ान
टिश्यू कल्चर लैब और शांति कोल्ड के स्वामी गोपाल सिंह ने बताया कि इस लैब के माध्यम से किसानों के सपनों को नयी उड़ान मिलेगी। सिरसागंज का आलू पहले भारत में नाम कमा चुका है और अब सिरसागंज का किसान विश्व में अपनी अलग पहचान बना सकेगा। लैब से युवाओं को भी रोजगार मिलेगा और नयी कृषि तकनीक से जुड़ने का मौका भी।
चित्र परिचय- सिरसागंज के शांती शीतग्रह में बना टिश्यू कल्चर लैव
- टिश्यू कल्चर लैव में तैयार आलू के टैस्ट टयूव पौधे
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आलू के व्यापार में सिरसागंज का महत्वपूर्ण स्थान है। अब आगे आने वाले समय में आलू के व्यापार में सिरसागंज अपनी अलग पहचान बनाएगा। इसके लिए सिरसागंज के अरांव रोड पर शांति कोल्ड स्टोर में टिश्यू कल्चर लैब की स्थापना की जा रही है। लैब की स्थापना होने के बाद अब किसानों को विश्वस्तरीय आलू का बीज मिलेगा। प्रोजेक्ट की जानकारी देते हुए हिमाचल से आए टेक्निकल असिस्टेंट ललित डढ़वाल ने बताया कि टिश्यू कल्चर लैब में सेंट्रल पोटेटो इंस्टीटयूट से आने वाले टेस्ट ट्यूब पौधे को विकसित किया जाएगा। इसके बाद कलम विधि से उसके अन्य पौधे तैयार किए जाएंगे। इस विधि में पहले लैब में पौधा तैयार किया जाएगा और उसके विकसित होने के बाद उसको नेट में रखकर उसकी फसल विधि से बीज की प्राप्ति की जाएगी। आगरा, अलीगढ़ और कानपुर मंडल का यह पहला टिश्यू कल्चर लैब होगा।
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कैसे होगा आलू का प्रजनन
टिश्यू कल्चर लैब में सीपीआरआई शिमला से आने वाला वायरस फ्री 10 सेंटीमीटर का पौधा एक टेस्ट ट्यूब के माध्यम से सिरसागंज लाया जाएगा। कयहां कृषि वैज्ञानिक इस पौधे के इसके 15 सेंटीमीटर के होने पर कटिंग कर अन्य टेस्ट ट्यूब पौधे तैयार करेेंगे। इसके बाद इसे जांच के लिए यूएसए भेजा जाऐगा। जांच की संतुष्टि होने पर पौधे को नेट हाउस में लगा दिया जाएगा। यहां 70 से 90 दिन में पौधों से नई फसल प्राप्त हो जाएगी। इसे वैज्ञानिक जी जीरो स्टेज कहते हैं। इस विधि को तीन बार प्रयोग किया जाएगा। इसमें अंत में जी 3 बीज प्राप्त होगा, जो किसानों के लिए शुद्ध आलू का बीज होगा।
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किसानों को लाभ
ललित डढ़वाल ने बताया कि सीपीआरआई शिमला से आने वाला बीज पूर्णत: वायरस फ्री होगा। जब तक इन पौधों के माध्यम से जी जीरो से जी 3 तक के बीज प्राप्त किए जाएंगे, तब तक इसे पूर्णत: विशेषज्ञों की देखरेख में रखा जाएगा। इस विधि से किसानों को आलू का उम्दा और विश्व स्तरीय किस्म का बीज प्राप्त होगा। इससे किसान की पैदावार भी अच्छी होगी और आलू विदेशों में भी बिक्री के लिये भेजा जा सकेगा।
किसानों के सपनों को मिलेगी नई उड़ान
टिश्यू कल्चर लैब और शांति कोल्ड के स्वामी गोपाल सिंह ने बताया कि इस लैब के माध्यम से किसानों के सपनों को नयी उड़ान मिलेगी। सिरसागंज का आलू पहले भारत में नाम कमा चुका है और अब सिरसागंज का किसान विश्व में अपनी अलग पहचान बना सकेगा। लैब से युवाओं को भी रोजगार मिलेगा और नयी कृषि तकनीक से जुड़ने का मौका भी।
चित्र परिचय- सिरसागंज के शांती शीतग्रह में बना टिश्यू कल्चर लैव
- टिश्यू कल्चर लैव में तैयार आलू के टैस्ट टयूव पौधे