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सिरसागंज क्षेत्र में फिर से सक्रिय हुआ फाईनेंस गिरोह
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सिरसागंज। कई महीनों बाद एक बार फिर से सिरसागंज क्षेत्र में फाइनेंस ठगों का गिरोह सक्रिय होता दिख रहा है। एक ऐसी ही वारदात सोमवार को सिरसागंज कठफोरी टोल पर हुई। यहां एक व्यक्ति की गाड़ी रुकवाकर कार की किस्त न भरने को लेकर उनसे कुल 27 हजार रुपये ऐंठ लिए। बताते चलें कि टोल के साथ पुलिस का भी पहरा होता है। ऐसे में वारदात होना पुलिस विभाग पर भी सवालिया निशान खड़ा करता है।
रीतेश कुमार पुत्र नेपाल सिंह निवासी ग्राम आमरी थाना शिकोहाबाद ने सोमवार को सिरसागंज थाने पर तहरीर देते हुए कहा कि 23 दिसंबर को वह अपने पिताजी को दवा दिलवाने के लिए परिवार के साथ कार से इटावा से आगरा की ओर जा रहे थे। आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे पर कठफोरी के पास दो लोगों ने जबरदस्ती उनकी गाड़ी को रुकवा लिया और कहा कि हम लोग फाइनेंसर हैं, आपने तीन महीने से अपनी कार की किस्त नहीं भरी है, आपको गाड़ी को यहीं छोड़ कर किराए से जाना पड़ेगा। सभी लोग उनके पिता और महिलाओं से अभद्रता करने लगे। पीड़ित रीतेश ने उनको गूगल पे से 25 हजार रुपये और दो हजार रुपये नगद दिए। बदले में एक भुगतान की पर्ची, जो कि महिंद्रा फाइनेंस के नाम से थीं, उन्हें थमा दी गयी। 27 दिसंबर को जब वह इटावा जा रहे थे तो रास्ते मे गुराऊ टोल प्लाजा के पास एक दूसरी फाइनेंस टीम ने उसकी गाड़ी को रोक लिया और किस्त भरने की बात कही। जब उन्होंने कहा कि 23 दिसंबर को किश्तें भर दी है और रसीदें दिखाई तो पता लगा कि यह रसीद फर्जी थी और पैसा कंपनी के खाते में जमा ही नहीं हुआ। खुद को ठगा हुआ पाकर रितेश ने तत्काल ही 112 नंबर पर फोन लगाए, लेकिन कोई मोबाइल नंबर नही उठा। इस मामले में थानाध्यक्ष आजाद पाल सिंह का कहना है कि तहरीर मिली है, मामले की जांच कराई जा रही है।
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रीतेश कुमार पुत्र नेपाल सिंह निवासी ग्राम आमरी थाना शिकोहाबाद ने सोमवार को सिरसागंज थाने पर तहरीर देते हुए कहा कि 23 दिसंबर को वह अपने पिताजी को दवा दिलवाने के लिए परिवार के साथ कार से इटावा से आगरा की ओर जा रहे थे। आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे पर कठफोरी के पास दो लोगों ने जबरदस्ती उनकी गाड़ी को रुकवा लिया और कहा कि हम लोग फाइनेंसर हैं, आपने तीन महीने से अपनी कार की किस्त नहीं भरी है, आपको गाड़ी को यहीं छोड़ कर किराए से जाना पड़ेगा। सभी लोग उनके पिता और महिलाओं से अभद्रता करने लगे। पीड़ित रीतेश ने उनको गूगल पे से 25 हजार रुपये और दो हजार रुपये नगद दिए। बदले में एक भुगतान की पर्ची, जो कि महिंद्रा फाइनेंस के नाम से थीं, उन्हें थमा दी गयी। 27 दिसंबर को जब वह इटावा जा रहे थे तो रास्ते मे गुराऊ टोल प्लाजा के पास एक दूसरी फाइनेंस टीम ने उसकी गाड़ी को रोक लिया और किस्त भरने की बात कही। जब उन्होंने कहा कि 23 दिसंबर को किश्तें भर दी है और रसीदें दिखाई तो पता लगा कि यह रसीद फर्जी थी और पैसा कंपनी के खाते में जमा ही नहीं हुआ। खुद को ठगा हुआ पाकर रितेश ने तत्काल ही 112 नंबर पर फोन लगाए, लेकिन कोई मोबाइल नंबर नही उठा। इस मामले में थानाध्यक्ष आजाद पाल सिंह का कहना है कि तहरीर मिली है, मामले की जांच कराई जा रही है।
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