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बीमार किशोरी के लिए चाचा की गोद बनी स्ट्रेचर, दादी के हाथ ड्रिप स्टैंड,
Updated Sat, 15 Oct 2016 12:18 AM IST
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गोद बनी स्टेचर
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13 साल की बालिका बुखार से तप रही थी। चार कदम चल पाना तो दूर ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी। उसकी हालत पर परिवारजन घबरा रहे थे, लेकिन डाक्टरों को रहम नहीं आया। ड्रिप लगाकर उसे वार्ड के लिए रेफर कर दिया। वहां तक ले जाने को न तो एबुलेंस का इंतजाम किया और नहीं स्ट्रेचर दी। चाचा और मां बीमार बालिका को बारी-बारी से गोद में लेकर करीब एक किमी दूर स्थित जिला अस्पताल के वार्ड तक पहुंचे। दादी नातिन की ड्रिप को पकड़े साथ-साथ चल रही थी। चिकित्सा विभाग की असंवेदनशीलता से मानवता तक मानवता कराह उठी।
गुरुवार रात साढे़ नौ बज रहे थे। इंदिरापुरी कालोनी निवासी साधना (13) को परिवारीजन इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर आए थे। उसे तेज बुखार था। सरकारी ट्रामा सेंटर में चिकित्सक ने ड्रिप लगाकर वार्ड के लिए रेफर कर दिया। ट्रामा सेंटर से जिला अस्पताल करीब एक किमी है। वार्ड और भी अंदर हैं।
परिवारीजनों ने बालिका को ले जाने के लिए स्ट्रेचर या एबुलेंस की मांग की तो चिकित्सक ने कहा ऐसे ही ले जाओ। बेबस परिवारीजन बालिका को गोद लेकर चल दिए। पहले चाचा ने बालिका गोद में उठाया जब वह थक गए तो मां ने बालिका को गोद में ले लिया। इस बीच बालिका की दादी बालिका को लगाई गयी ड्रिप की बोतल हाथ में लिए रही। वृद्धावस्था के कारण वह तेज चल नहीं पा रही थी। रात का अंधेरा और रास्ता ठीक न होने के कारण हाथ में लगी बोतल लेकर वह कई बार गिरते-गिरते बचीं।
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जैसे-तैसे ट्रामा सेंटर से जिला अस्पताल के गेट तक परिवारीजन बीस मिनट में बालिका को ला पाए। इस बीच बालिका की श्वांस उखड़ती देख परिवारीजन घबरा गए। परिवारीजन बालिका को वार्ड तीन में ले गए और यहां बेड पर उसे लिटा दिया। यहां मौजूद चिकित्साकर्मियों ने न नब्ज देखी और बालिका की हालत, झल्ला कर कहा इसे यहां से आरसीएच वार्ड में ले जाओ। अब तो बालिका के तीमारदारों का पारा हाई हो गया। यह उनकी वेदना थी तो गुस्से के शब्दों में बाहर आयी।
परिजन बोले क्या करें कहां ले जाएं इसे...।
ट्रामा सेंटर से कहा तीन नंबर वार्ड में ले जाओ तुम कह रहे दूसरे वार्ड में ले जाओ..। ऐसे तो यह बच्ची....जाएगी..। बालिका की दादी की आंखों से आंसू निकल पडे़। फिर भी चिकित्साकर्मी नहीं पसीजे यहां भी बालिका को स्ट्रेचर नहीं दिया गया। मायूस परिवारीजन बालिका को गोद में उठा कर आरसीएच वार्ड में ले गए। आधे घंटे तक भटकने के बाद यहां भी गंभीरता से बालिका का इलाज नहीं किया गया। यहां उसे आगरा रेफर कर दिया गया।
सीएमएस बोले, जांच कराएंगे
सीएमएस अजय शुक्ला का कहना है कि यदि मरीज को तीमारदारों को गोद में ले जाना पड़ा तो यह गंभीर मामला है। इसकी वह जांच कराएंगे जो भी दोषी होगा कार्रवाई होगी। अस्पताल की एबुलेंस आगरा गई थी। 108 एंबुलेंस वाले सहयोग नहीं करते हैं। ट्रामा सेंटर से अस्पताल वार्ड तक मरीजों को ले के लिए वाहन की व्यवस्था के शासन को पत्र लिखा जा रहा है।
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गुरुवार रात साढे़ नौ बज रहे थे। इंदिरापुरी कालोनी निवासी साधना (13) को परिवारीजन इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर आए थे। उसे तेज बुखार था। सरकारी ट्रामा सेंटर में चिकित्सक ने ड्रिप लगाकर वार्ड के लिए रेफर कर दिया। ट्रामा सेंटर से जिला अस्पताल करीब एक किमी है। वार्ड और भी अंदर हैं।
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परिवारीजनों ने बालिका को ले जाने के लिए स्ट्रेचर या एबुलेंस की मांग की तो चिकित्सक ने कहा ऐसे ही ले जाओ। बेबस परिवारीजन बालिका को गोद लेकर चल दिए। पहले चाचा ने बालिका गोद में उठाया जब वह थक गए तो मां ने बालिका को गोद में ले लिया। इस बीच बालिका की दादी बालिका को लगाई गयी ड्रिप की बोतल हाथ में लिए रही। वृद्धावस्था के कारण वह तेज चल नहीं पा रही थी। रात का अंधेरा और रास्ता ठीक न होने के कारण हाथ में लगी बोतल लेकर वह कई बार गिरते-गिरते बचीं।
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जैसे-तैसे ट्रामा सेंटर से जिला अस्पताल के गेट तक परिवारीजन बीस मिनट में बालिका को ला पाए। इस बीच बालिका की श्वांस उखड़ती देख परिवारीजन घबरा गए। परिवारीजन बालिका को वार्ड तीन में ले गए और यहां बेड पर उसे लिटा दिया। यहां मौजूद चिकित्साकर्मियों ने न नब्ज देखी और बालिका की हालत, झल्ला कर कहा इसे यहां से आरसीएच वार्ड में ले जाओ। अब तो बालिका के तीमारदारों का पारा हाई हो गया। यह उनकी वेदना थी तो गुस्से के शब्दों में बाहर आयी।
परिजन बोले क्या करें कहां ले जाएं इसे...।
ट्रामा सेंटर से कहा तीन नंबर वार्ड में ले जाओ तुम कह रहे दूसरे वार्ड में ले जाओ..। ऐसे तो यह बच्ची....जाएगी..। बालिका की दादी की आंखों से आंसू निकल पडे़। फिर भी चिकित्साकर्मी नहीं पसीजे यहां भी बालिका को स्ट्रेचर नहीं दिया गया। मायूस परिवारीजन बालिका को गोद में उठा कर आरसीएच वार्ड में ले गए। आधे घंटे तक भटकने के बाद यहां भी गंभीरता से बालिका का इलाज नहीं किया गया। यहां उसे आगरा रेफर कर दिया गया।
सीएमएस बोले, जांच कराएंगे
सीएमएस अजय शुक्ला का कहना है कि यदि मरीज को तीमारदारों को गोद में ले जाना पड़ा तो यह गंभीर मामला है। इसकी वह जांच कराएंगे जो भी दोषी होगा कार्रवाई होगी। अस्पताल की एबुलेंस आगरा गई थी। 108 एंबुलेंस वाले सहयोग नहीं करते हैं। ट्रामा सेंटर से अस्पताल वार्ड तक मरीजों को ले के लिए वाहन की व्यवस्था के शासन को पत्र लिखा जा रहा है।