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- लेबर के भुगतान के लाले, कारखानों में काम पर ‘ताले’
अमर उजाला
Updated Fri, 11 Nov 2016 01:16 AM IST
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लेबर के भुगतान के लाले, कारखानों में काम पर ‘ताले’
- फोटो : अमर उजाला
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500 व 1000 के नोट बंद होने का असर गुरुवार को कांच उद्योग में उत्पादन ठप होने के रूप में दिखा। करीब आधा दर्जन से अधिक कारखानों में काम पूरी तरह बंद रहा। जिन कारखानों में श्रमिक कार्य पर पहुंचे वहां भी लेबर के भुगतान में आई परेशानी ने उत्पादन को प्रभावित कर दिया। वहीं घंटों तक बैंक की लाइन में लगे श्रमिक खाता न होने के कारण पैसा चेंज कराए बिना ही लौटने को मजबूर हुए।
कारखानों में अधिकांश श्रमिक दिहाड़ी पर कार्य करते हैं। उनको प्रतिदिन भुगतान करना होता है। 500 व 1000 के नोट बंद होने से लेबर को भुगतान की समस्या खड़ी हो गई। मेहनताना न मिलने पर श्रमिक गुरुवार को कामकाज छोड़कर सुबह से बैंकों की लाइन में लगे रहे। इससे कई कारखानों में कामकाज पर खासा प्रभाव पड़ा। बैंकाें की लाइन में घंटों में लगने के बाद श्रमिकों को खाता न होने के कारण वापस लौटना पड़ा। वहीं आसफाबाद स्थित एस. राजीव ग्लास, स्टेशन रोड स्थत बीएम ग्लास, नगला भाऊ स्थित बापू ग्लास सहित करीब आधा दर्जन से अधिक कारखानों में काम पूरी तरह बंद रहा।
बोले उद्यमी
यूपीजीएमएस अध्यक्ष राजकुमार मित्तल का कहना है कि मोदी का यह कदम बहुत अच्छा है, परंतु इससे कुछ दिनों के लिए उद्योग प्रभावित रहेगा। कारखानों में प्रतिदिन लाखों रुपये का भुगतान करना होता है। बड़े नोट बंद होने के कारण कार्य पर विपरीत असर पड़ा है।
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द ग्लास इंडस्ट्रियल सिंडीके ट के अध्यक्ष हनुमान प्रसाद गर्ग का कहना है कि अचानक पांच सौ व एक हजार के नोट बंद करना थोड़ा जल्दबाजी वाला कदम रहा। इससे कांच उद्योग के साथ श्रमिकों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सुपर ग्लास के स्वामी अनिल जैन का कहना है कि भविष्य को देखते हुए मोदी ने अच्छा कार्य किया है। कैश ट्रांजेक्शन में असुविधा न हो, इसके लिए समुचित प्रयास करने होंगे। बैंकों में काउंटर बढ़ाए जाएं।
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कारखानों में अधिकांश श्रमिक दिहाड़ी पर कार्य करते हैं। उनको प्रतिदिन भुगतान करना होता है। 500 व 1000 के नोट बंद होने से लेबर को भुगतान की समस्या खड़ी हो गई। मेहनताना न मिलने पर श्रमिक गुरुवार को कामकाज छोड़कर सुबह से बैंकों की लाइन में लगे रहे। इससे कई कारखानों में कामकाज पर खासा प्रभाव पड़ा। बैंकाें की लाइन में घंटों में लगने के बाद श्रमिकों को खाता न होने के कारण वापस लौटना पड़ा। वहीं आसफाबाद स्थित एस. राजीव ग्लास, स्टेशन रोड स्थत बीएम ग्लास, नगला भाऊ स्थित बापू ग्लास सहित करीब आधा दर्जन से अधिक कारखानों में काम पूरी तरह बंद रहा।
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बोले उद्यमी
यूपीजीएमएस अध्यक्ष राजकुमार मित्तल का कहना है कि मोदी का यह कदम बहुत अच्छा है, परंतु इससे कुछ दिनों के लिए उद्योग प्रभावित रहेगा। कारखानों में प्रतिदिन लाखों रुपये का भुगतान करना होता है। बड़े नोट बंद होने के कारण कार्य पर विपरीत असर पड़ा है।
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द ग्लास इंडस्ट्रियल सिंडीके ट के अध्यक्ष हनुमान प्रसाद गर्ग का कहना है कि अचानक पांच सौ व एक हजार के नोट बंद करना थोड़ा जल्दबाजी वाला कदम रहा। इससे कांच उद्योग के साथ श्रमिकों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सुपर ग्लास के स्वामी अनिल जैन का कहना है कि भविष्य को देखते हुए मोदी ने अच्छा कार्य किया है। कैश ट्रांजेक्शन में असुविधा न हो, इसके लिए समुचित प्रयास करने होंगे। बैंकों में काउंटर बढ़ाए जाएं।