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मौसम परिवर्तन का असर फसलों पर

Wed, 06 Jan 2016 11:20 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला फीरोजाबाद
ब्यूरो अमर उजाला फीरोजाबाद Updated Wed, 06 Jan 2016 11:20 PM IST
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The impact of climate change on crops
बदलते मौसम ने एक बार फिर अन्नदाता की चिंता बढ़ा दी है। मौसम में अचानक आए बदलाव ने रबी की फसलों पर असर डालना शुरू कर दिया है। मौसम की मार का सीधा असर फसलों की पैदावार पर पड़ेगा। रबी की फसलों के लिए तापमान आठ डिग्री से 12 डिग्री के बीच होना चाहिए। लेकिन जनवरी आने के बाद भी तापमान कम नहीं हो रहा है। इससे पौधे में दाना नहीं पड़ेगा। गेहूं की लंबाई काफी कम होने के कारण भूसा कम होगा वहीं दाना पतला रहेगा।
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 फीरोजाबाद कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक 10-15 दिन पहले तापमान न्यूनतम पांच डिग्री व अधिकतम 20 डिग्री के बीच में रहा, लेकिन अभी हाल ही में न्यूनतम तापमान 11 व अधिकतम 29 डिग्री तक पहुंच गया है।  खासकर गेहूं, इसबगोल, सरसों व अरंडी की फसल पर मौसम की मार का असर पड़ेगा। तापमान यूं ही बढ़ता रहा तो रबी की फसलों में कीटों का प्रकोप भी बढ़ेगा।
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 मौसम का मिजाज इस बार काफी बदला हुआ है। सर्दी का लोगों को पता ही नहीं चला। दिसंबर के अंतिम और जनवरी माह के शुरूआत में तो सर्दी की वजह से प्रशासन को स्कूल तक बंद कराने पड़ते थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। सर्दी कम पड़ने की वजह से गेहूं की फसल की लंबाई जितनी बढ़ती थी वह नहीं बढ़ी। किसानों को सर्दी के मौसम में भी फसलों की सिंचाई करने को विवश होना पड़ रहा है। सिंचाई नहीं करेंगे तो गेहूं की फसल में किल्ला काफी कम आएंगे। इससे सीधे 25 से 30 प्रतिशत तक पैदावार प्रभावित होगी। आलू की फसल की पैदावार पर भी प्रभाव पड़ेगा। कृषि वैज्ञानिक डा.सुभाषचंद्र शर्मा का कहना है कि सर्दी कम पड़ने के कारण आलू की फसल में जड़ गलन रोग लगने की संभावना है। मिट्टी में कम बारिश और सर्दी नहीं पड़ने के कारण खुस्कपन है। जनवरी माह के अंत में पिछैली झुलसा लगने की संभावना है। कम सर्दी से रबी की हर फसल प्रभावित होगी।
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कम सर्दी के कारण आलू का साइज घट जाएगा। नमी में ही आलू की बढ़वार होती है। हालांकि फसलों की सिंचाई करके नमी रखने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन खर्चा बढ़ रहा है।
संतोषपाल सिंह, नारखी धौंकल

कम सर्र्दी का असर गेहूं की फसल पर दिखाई देने लगा है। अभी तक गेहूं की फसल आठ से दस इंच लंबी हो जानी चाहिए। लेकिन पांच से छह इंच लंबाई हुई है। गेहूं का दाना भी काफी पतला होगा।
संजीव कुमार, गढ़ी हंसराम

कम बारिश और सर्दी काफी कम होने के कारण जमीन खुस्क है। इससे पैदावार प्रभावित होगी। आलू का साइज छोटा होगा। झुलसा रोग लगने की संभावना अधिक हो गई है।
सत्यवीर, गांव पवली

सर्दी कम पड़ने के कारण गेहूं में कल्ले काफी कम निकलेंगे और इससे वृद्धि बाधित होगी। फूल जल्दी निकल आने के कारण दाना पतला होगा। देर से बोई जाने वाली फसलों पर सर्वाधिक प्रभाव पड़ेगा।

अखिलेश पांडेय, जिला कृषि अधिकारी फीरोजाबाद

जिले में रबी की बोई गई मुख्य फसल

फसल का नाम        हेक्टेयर
 गेहूं                   98 हजार हेक्टेयर
 आलू                 65 हजार हेक्टेयर
 जौ                   7900 हेक्टेयर
 सरसों               12205 हेक्टेयर
 तोरिया                740 हेक्टेयर
 चना                  385 हेक्टेयर
 मटर                  350 हेक्टेयर

जड़गलन रोकने को यह करें प्रयास: डा.सुभाष
उद्यान विभाग के वैज्ञानिक डा. सुभाषचंद्र शर्मा ने कहा आलू की फसल को जड़गलन और अन्य बीमारी से बचाव को फफूंदनाशी दवा कापरआक्सीक्लोराइड या फायोफ्लेड मिथाइल या कार्बन्डाजिम तीनों में से कोई एक दो किलो ग्राम एवं कीटनाशी दवा में डाईक्लोरावास, डाईनिथोइट में से कोई एक-एक लीटर। एंटीवायोटिक में एग्रोमाईसीन, स्टेप्टोसाइक्लीन, वैल्डामाइसीन में किसी एक की चार पुड़िया मिलाकर इनका 800 लीटर पानी का घोल बना छिड़काव करें तो आलू की फसल को इस रोग से बचाया जा सकेगा। नमी बनाए रखने को सिंचाई करते रहें।
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