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सुहागनगरी में छाई धुंध ने बढ़ाई अस्थमा रोगियों की परेशानी
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रफ़रोजाबाद ! दीपावली पर पटाखे चलाने के दौरान पटाखों से निकलता धुंआ
- फोटो : FIROZABAD
फिरोजाबाद। दिवाली पर देररात तक की गई आतिशबाजी से अस्थमा एवं श्वांस रोगियों की मुश्किलें बढ़ गईं। आसमान में धुंध छाने के कारण अस्थमा और श्वांस रोगियों को सांस लेने में दिक्कत हुई। बढ़े प्रदूषण के कारण राहगीरों को भी मुंह पर मास्क लगाने पर मजबूर होना पड़ा। मौसम में हुए बदलाव के कारण भी समस्या बढ़ी।
सुहागनगरी में दिवाली पर जमकर आतिशबाजी की गई। आतिशबाजी का असर शुक्रवार सुबह भी नजर आया। आसमान में धुंध के साथ सुबह दस बजे तक धूप नहीं निकली। लोगों को 11 बजे के बाद सूर्यदेव के दर्शन हुए। आतिशबाजी के कारण हवा में हानिकारक तत्वों कार्बन आदि की मात्रा बढ़ने से सांस संबंधी समस्याओं से पीड़ित मरीजों को परेशानी हुई।
वाहन चलाने वाले को सुबह-सुबह धुंध से मुश्किल हुई। कई लोग वायु प्रदूषण से बचाव को मुंह पर मास्क लगाकर घरों से बाहर निकले। कुछ लोगों ने शुक्रवार को आंखों में जलन भी महसूस होने की बात भी कही। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. नीरज गुप्ता ने बताया कि यह मौसम श्वांस की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए खतरनाक है। इसमें सावधानी बरतनी चाहिए। मास्क का इस्तेमाल करें। धुंध होने पर जल्द सुबह टहलने न निकलें। बाहर से आने के बाद आंखें पानी से धोएं।
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‘एक्यूआई बढ़ने पर छाती है धुंध’
तापमान कम होने से ऑक्साइड ऑफ नाइट्रोजन, ऑक्साइड ऑफ सल्फर, पर्टिकुलेट मैटर (धूल कण) सतह से ऊपर नहीं उठते हैं। इससे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) का स्तर लगातार बढ़ने लगता है। सतह पर मौजूद प्रदूषण के कण कोहरा और नमी से मिलकर धुंध बनाते हैं। जहरीली हवा और नमी से मिलकर बना धुआं स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।
डॉ. अजय सिंह, रसायन विज्ञानी और प्रधानाचार्य, गोपीनाथ इंटर कॉलेज
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सुहागनगरी में दिवाली पर जमकर आतिशबाजी की गई। आतिशबाजी का असर शुक्रवार सुबह भी नजर आया। आसमान में धुंध के साथ सुबह दस बजे तक धूप नहीं निकली। लोगों को 11 बजे के बाद सूर्यदेव के दर्शन हुए। आतिशबाजी के कारण हवा में हानिकारक तत्वों कार्बन आदि की मात्रा बढ़ने से सांस संबंधी समस्याओं से पीड़ित मरीजों को परेशानी हुई।
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वाहन चलाने वाले को सुबह-सुबह धुंध से मुश्किल हुई। कई लोग वायु प्रदूषण से बचाव को मुंह पर मास्क लगाकर घरों से बाहर निकले। कुछ लोगों ने शुक्रवार को आंखों में जलन भी महसूस होने की बात भी कही। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. नीरज गुप्ता ने बताया कि यह मौसम श्वांस की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए खतरनाक है। इसमें सावधानी बरतनी चाहिए। मास्क का इस्तेमाल करें। धुंध होने पर जल्द सुबह टहलने न निकलें। बाहर से आने के बाद आंखें पानी से धोएं।
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‘एक्यूआई बढ़ने पर छाती है धुंध’
तापमान कम होने से ऑक्साइड ऑफ नाइट्रोजन, ऑक्साइड ऑफ सल्फर, पर्टिकुलेट मैटर (धूल कण) सतह से ऊपर नहीं उठते हैं। इससे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) का स्तर लगातार बढ़ने लगता है। सतह पर मौजूद प्रदूषण के कण कोहरा और नमी से मिलकर धुंध बनाते हैं। जहरीली हवा और नमी से मिलकर बना धुआं स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।
डॉ. अजय सिंह, रसायन विज्ञानी और प्रधानाचार्य, गोपीनाथ इंटर कॉलेज