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Firozabad News: परवान नहीं चढ़ा शासन का आदेश, 40 दिन में 74 की मौत, 165 घायल
Sun, 09 Mar 2025 01:03 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Sun, 09 Mar 2025 01:03 AM IST
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फिरोजाबाद। जिले में शासन का नो हेलमेट नो पेट्रोल का अभियान सिर्फ एक दिखावा बनकर रह गया है। आदेश 26 जनवरी से लागू किया गया था। आदेश जारी होने के बाद भी सड़क हादसों में कोई खास गिरावट नहीं आई है। जिले में हुए सड़क हादसों में 40 दिन में 74 लोग जान गवां चुके हैं। जबकि 165 लोग घायल भी हो गए थे। इनमें हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग न करने वालों की संख्या अधिक है। मरने वालों में हाईस्कूल और इंटर के छात्र भी हैं। हादसों के बाद भी एक बाइक पर पांच-पांच छात्र फर्राटा भरते देखते जाते हैं।
40 दिन बीत जाने के बाद भी शासन का आदेश परवान नहीं चढ़ सका है। जिले में धड़ल्ले से बिना हेलमेट और सीट बेल्ट के पेट्रोल की बिक्री की जा रही है। पंप स्वामियों को सिर्फ अपनी बिक्री से मतलब रह गया है फिर चाहें किसी की जान क्यूं न चली जाए। इधर वाहन चालक भी जागरूक होने को तैयार नहीं है। इसी कारण अभियान 26 जनवरी से शुरू किया गया था। जिससे लोग पेट्रोल की खरीद के लिए हेलमेट और सीटबेल्ट के साथ अन्य यातायात नियमों का पालन करेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। जिले भर में पिछले 40 दिन में कई सड़क हादसे हुए हैं। जिनमें 74 लोग जान गवां चुके हैं। साथ ही 165 घायल भी हैं। इन हादसों में कई घरों की चिराग तक बुझ गए। इसके बाद भी लोग अपनी आदतों को सुधार नहीं रहे हैंं।
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4 छात्र-छात्राओं की हो चुकी है मौत
24 फरवरी से शुरू हुई बोर्ड परीक्षाओं के बाद से नियमों का छात्र और उनके परिजन जमकर मखौल उड़ा रहे हैं। नवयुवक और किशोर एक बाइक पर पांच-पांच सवार हो जाते हैं। फिर ओवरस्पीड में वाहन दौड़ाकर रेस लगाते हैं। कई बार परिजन भी एक ही बाइक पर तीन बच्चों को स्कूल छोड़ने और लेने पहुंचते हैं। परीक्षा शुरू होने के बाद से तीन छात्र व एक छात्रा की पेपर देकर लौटते समय मौत हो चुकी है।
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फोटो खिंचाने सीमित रहता है अभियान
शासन का अभियान को अनदेखा तो जिले के अफसर ही कर रहे हैं। 26 जनवरी से अब तक उप संभागीय विभाग और यातायात पुलिस के अलावा अन्य जिम्मेदारों ने पेट्रोल पंप पर झांककर भी नहीं देखा कि अभियान का पालन हो भी रहा है या नहीं। जब कभी उन्हें फुर्सत मिल जाती है तब किसी भी पेट्रोल पंप पर जाकर फोटों खींचाकर उच्चाधिकारियों के पास भेज देते हैं। जिससे उन पर कोई आंच न आए। इसके अलावा पेट्रोल पंपों पर भी नो हेलमेट नो पेट्रोल के पोस्टर तो चस्पा कर दिए गए हैं, लेकिन इसका पालन चुटकी भर नहीं हो रहा है।
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जिले में नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। जिले में अधिक दुर्घटना वाले स्थानों को चिन्हिंत कर ब्लैक या फिर डेथ प्वाइंट घोषित कर सुधार के तरीके निकाले जाते हैं। - सुरेशचंद्र यादव, एआरटीओ प्रवर्तन/प्रशासन
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यातायात पुलिस की ओर से रैली निकालने के साथ वाहन चालकों को अन्य तरीकों से नियमों का पालन करने का पाठ पढ़ाया जा रहा है। इसके बाद भी वह लोग अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं। अब कड़ाई से अभियान चलाया जाएगा। - महेश यादव, यातायात प्रभारी
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40 दिन बीत जाने के बाद भी शासन का आदेश परवान नहीं चढ़ सका है। जिले में धड़ल्ले से बिना हेलमेट और सीट बेल्ट के पेट्रोल की बिक्री की जा रही है। पंप स्वामियों को सिर्फ अपनी बिक्री से मतलब रह गया है फिर चाहें किसी की जान क्यूं न चली जाए। इधर वाहन चालक भी जागरूक होने को तैयार नहीं है। इसी कारण अभियान 26 जनवरी से शुरू किया गया था। जिससे लोग पेट्रोल की खरीद के लिए हेलमेट और सीटबेल्ट के साथ अन्य यातायात नियमों का पालन करेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। जिले भर में पिछले 40 दिन में कई सड़क हादसे हुए हैं। जिनमें 74 लोग जान गवां चुके हैं। साथ ही 165 घायल भी हैं। इन हादसों में कई घरों की चिराग तक बुझ गए। इसके बाद भी लोग अपनी आदतों को सुधार नहीं रहे हैंं।
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4 छात्र-छात्राओं की हो चुकी है मौत
24 फरवरी से शुरू हुई बोर्ड परीक्षाओं के बाद से नियमों का छात्र और उनके परिजन जमकर मखौल उड़ा रहे हैं। नवयुवक और किशोर एक बाइक पर पांच-पांच सवार हो जाते हैं। फिर ओवरस्पीड में वाहन दौड़ाकर रेस लगाते हैं। कई बार परिजन भी एक ही बाइक पर तीन बच्चों को स्कूल छोड़ने और लेने पहुंचते हैं। परीक्षा शुरू होने के बाद से तीन छात्र व एक छात्रा की पेपर देकर लौटते समय मौत हो चुकी है।
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फोटो खिंचाने सीमित रहता है अभियान
शासन का अभियान को अनदेखा तो जिले के अफसर ही कर रहे हैं। 26 जनवरी से अब तक उप संभागीय विभाग और यातायात पुलिस के अलावा अन्य जिम्मेदारों ने पेट्रोल पंप पर झांककर भी नहीं देखा कि अभियान का पालन हो भी रहा है या नहीं। जब कभी उन्हें फुर्सत मिल जाती है तब किसी भी पेट्रोल पंप पर जाकर फोटों खींचाकर उच्चाधिकारियों के पास भेज देते हैं। जिससे उन पर कोई आंच न आए। इसके अलावा पेट्रोल पंपों पर भी नो हेलमेट नो पेट्रोल के पोस्टर तो चस्पा कर दिए गए हैं, लेकिन इसका पालन चुटकी भर नहीं हो रहा है।
जिले में नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। जिले में अधिक दुर्घटना वाले स्थानों को चिन्हिंत कर ब्लैक या फिर डेथ प्वाइंट घोषित कर सुधार के तरीके निकाले जाते हैं। - सुरेशचंद्र यादव, एआरटीओ प्रवर्तन/प्रशासन
यातायात पुलिस की ओर से रैली निकालने के साथ वाहन चालकों को अन्य तरीकों से नियमों का पालन करने का पाठ पढ़ाया जा रहा है। इसके बाद भी वह लोग अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं। अब कड़ाई से अभियान चलाया जाएगा। - महेश यादव, यातायात प्रभारी