{"_id":"16b09a6d10aec13814529c1ee18ed406","slug":"the-facility-can-muster-more-possession-peace-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अधिक परिग्रह से सुविधा जुटा सकते हैं शांति नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अधिक परिग्रह से सुविधा जुटा सकते हैं शांति नहीं
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Sat, 26 Sep 2015 11:24 PM IST
विज्ञापन
दशलक्षण पर्व आस्था के साथ धूमधाम से मनाया जा रहा है। जैन मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठानों की धूम मची हुई है। सुबह गाजेबाजे के साथ पूजा की जा रही है तो दोपहर और शाम को धर्म सभाओं में भाग लेकर श्रद्धालु पुण्य कमा रहे हैं।
श्री दिगंबर जैन चंद्रप्रभु मंदिर अतिशय क्षेत्र समिति के तत्वावधान में दशलक्षण महापर्व के नवमें दिन प्रात:काल सेे ही धार्मिक कार्यक्रम की श्रंखला देर रात तक चलती रही। दोपहर में आयोजित धर्मसभा में ग्रंथराज तत्वार्थसूत्र के दसों अध्याय का वाचन अमितसागर महाराज द्वारा किया गया। उन्होंने तत्वार्थसूत्र जी के नवमें अध्याय के साथ प्रतिदिन की तरह प्रथम व द्वितीय अध्याय के प्रेरणादायक सूत्रों का विस्तृत विवेचन किया। उन्होंने कहा कि केवल खाने पीने का त्याग ही व्रत नहीं है, बल्कि आसक्ति का त्याग व्रत है। पांच पाप हिंसा, झूठ, चोरी, परिग्रह और कुशील इनकी आसक्ति से विरत होना व्रत है। तनमन धन की सेवा करते वर्षों ही नहीं कई भव बीत गए, लेकिन क्या मिला? जिस धर्म से सब कुछ मिल सकता है, उसको मत मत भूलो। जिस गुण की प्राप्ति करनी है, उसके संपर्क में जाना ही पड़ेगा, उसे नमस्कार करना ही पड़ेगा। जैसे अपने बच्चों को डाक्टर, इंजीनियर बनाना है, तो बनाने वाले की शरण में जाना ही होगा ऐसे भगवान जैसा बनने के लिये उनकी शरण में जाना ही होगा। धर्मसभा में सुरेश कुमार अजय कुमार जैन कलकत्ता बजाज द्वारा छपवाई गई तत्वार्थसूत्र जी की अर्थ सहित पुस्तिका का विमोचन पंडित शिवचरनलाल शास्त्री व अनूपचंद जैन एडवोकेट द्वारा किया गया।
सायंकालीन धर्मसभा में सूरत के पंडित शिवचरनलाल शास्त्री ने उत्तम आकिंचन धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि अधिक से अधिक संग्रह की भावना ही परिग्रह है। परिग्रह की भावना का अभाव होने पर ही आकिंचन धर्म प्रगट होता है। पर पदार्थों में मूर्च्छा अर्थात आसक्ति ही परिग्रह है, और यह मूर्च्छा हटने पर ही व्यक्ति सुख प्राप्त कर सकता हैं। लोग कहते है कि दशलक्षण हर साल आते हैं।
विज्ञापन
अनंत चतुर्दशी आज, वासुपूज्य भगवान का चढ़ेगा लाड़ू
चंद्रप्रभु मंदिर समिति के मंत्री कुलदीप मित्तल जैन एडवोकेट नेे बताया कि कल प्रात: अनंत चतुर्दशी को प्रात: गाजे बाजे के साथ सामूहिक अभिषेक पूजन के बाद वासुपूज्य भगवान का निर्वाण लाड़ू चढ़ाया जाएगा।
विज्ञापन
श्री दिगंबर जैन चंद्रप्रभु मंदिर अतिशय क्षेत्र समिति के तत्वावधान में दशलक्षण महापर्व के नवमें दिन प्रात:काल सेे ही धार्मिक कार्यक्रम की श्रंखला देर रात तक चलती रही। दोपहर में आयोजित धर्मसभा में ग्रंथराज तत्वार्थसूत्र के दसों अध्याय का वाचन अमितसागर महाराज द्वारा किया गया। उन्होंने तत्वार्थसूत्र जी के नवमें अध्याय के साथ प्रतिदिन की तरह प्रथम व द्वितीय अध्याय के प्रेरणादायक सूत्रों का विस्तृत विवेचन किया। उन्होंने कहा कि केवल खाने पीने का त्याग ही व्रत नहीं है, बल्कि आसक्ति का त्याग व्रत है। पांच पाप हिंसा, झूठ, चोरी, परिग्रह और कुशील इनकी आसक्ति से विरत होना व्रत है। तनमन धन की सेवा करते वर्षों ही नहीं कई भव बीत गए, लेकिन क्या मिला? जिस धर्म से सब कुछ मिल सकता है, उसको मत मत भूलो। जिस गुण की प्राप्ति करनी है, उसके संपर्क में जाना ही पड़ेगा, उसे नमस्कार करना ही पड़ेगा। जैसे अपने बच्चों को डाक्टर, इंजीनियर बनाना है, तो बनाने वाले की शरण में जाना ही होगा ऐसे भगवान जैसा बनने के लिये उनकी शरण में जाना ही होगा। धर्मसभा में सुरेश कुमार अजय कुमार जैन कलकत्ता बजाज द्वारा छपवाई गई तत्वार्थसूत्र जी की अर्थ सहित पुस्तिका का विमोचन पंडित शिवचरनलाल शास्त्री व अनूपचंद जैन एडवोकेट द्वारा किया गया।
विज्ञापन
सायंकालीन धर्मसभा में सूरत के पंडित शिवचरनलाल शास्त्री ने उत्तम आकिंचन धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि अधिक से अधिक संग्रह की भावना ही परिग्रह है। परिग्रह की भावना का अभाव होने पर ही आकिंचन धर्म प्रगट होता है। पर पदार्थों में मूर्च्छा अर्थात आसक्ति ही परिग्रह है, और यह मूर्च्छा हटने पर ही व्यक्ति सुख प्राप्त कर सकता हैं। लोग कहते है कि दशलक्षण हर साल आते हैं।
विज्ञापन
अनंत चतुर्दशी आज, वासुपूज्य भगवान का चढ़ेगा लाड़ू
चंद्रप्रभु मंदिर समिति के मंत्री कुलदीप मित्तल जैन एडवोकेट नेे बताया कि कल प्रात: अनंत चतुर्दशी को प्रात: गाजे बाजे के साथ सामूहिक अभिषेक पूजन के बाद वासुपूज्य भगवान का निर्वाण लाड़ू चढ़ाया जाएगा।