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-कसबों से लेकर गांवों तक करेंसी को लेकर लगीं कतारें
ब्यूरो, अमर उजाला,फीरोजाबाद
Updated Tue, 15 Nov 2016 11:59 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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जिले के कसबा एवं गांवों में किसान 500 एवं हजार के नोट बदलने को परेशान हैं। बैंकों के प्रबंधक मनमानी पर उतारू हैं। जिसके बैंक खाते हैं उनके ही पैसे निकाल रहे हैं। कई बैंक एवं डाकघरों ने पांच सौ एवं एक हजार के नोट लेना ही बंद कर दिया। इसके कारण किसानों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। कसबों में एटीएम तो हैं लेकिन शोपीस साबित हो रहे हैं। किसान खेतों की पलेवट करने के बाद खाद एवं बीज नहीं खरीद पा रहा। सहकारी बैंक के नोटिस ने अन्नदाताओं की मुसीबत अधिक बढ़ा दी। खाद-बीज की दुकानों पर किसान कम ही दिखाई दे रहे हैं।
500 एवं हजार की करेंसी बंद किए जाने से किसानों की कमर टूट गई है। उसकी जेब में पैसा तो है लेकिन उसके लिए किसी काम का नहीं। ग्रामीण अंचल में किसान बैंकों में भटकने को विवश है। कोटला रोड स्थित रासायननिक एवं बीज भंडार पर सन्नाटा दिखाई दिया। कोटला रोड श्रीराम कालोनी के सामने स्थित अरविंद खाद एवं बीज भंडार पर किसान लौटने को विवश हैं। अरविंद राजपूत ने कहा कि कुछ किसानों ने चेकबुक देकर सामान लेना शुरू कर दिया है। वहीं कुछ किसान पुराने नोट जमा करके डीएपी ले जा रहे हैं। क्योंकि खेत की पलेवट में खर्च हुई धनराशि बेकार चली जाएगी। अभी तो किसानों की बैंक वाले भी नहीं सुन रहे हैं। कसबों में बैंक प्रबंधकों की मनमानी हावी है।
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500 एवं हजार की करेंसी बंद किए जाने से किसानों की कमर टूट गई है। उसकी जेब में पैसा तो है लेकिन उसके लिए किसी काम का नहीं। ग्रामीण अंचल में किसान बैंकों में भटकने को विवश है। कोटला रोड स्थित रासायननिक एवं बीज भंडार पर सन्नाटा दिखाई दिया। कोटला रोड श्रीराम कालोनी के सामने स्थित अरविंद खाद एवं बीज भंडार पर किसान लौटने को विवश हैं। अरविंद राजपूत ने कहा कि कुछ किसानों ने चेकबुक देकर सामान लेना शुरू कर दिया है। वहीं कुछ किसान पुराने नोट जमा करके डीएपी ले जा रहे हैं। क्योंकि खेत की पलेवट में खर्च हुई धनराशि बेकार चली जाएगी। अभी तो किसानों की बैंक वाले भी नहीं सुन रहे हैं। कसबों में बैंक प्रबंधकों की मनमानी हावी है।
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