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मनमोहक लीलाओं ने किया दर्शकों को भाव-विभोर
ब्यूरो अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Tue, 03 Nov 2015 11:26 PM IST
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लाइन पार में आयोजित बाल रामलीला महोत्सव में खरदूषण, त्रिशरा वध एवं सिया हरण आदि की लीलाओं का मनोहारी मंचन किया गया। लीलाओं को देखकर दर्शक भाव-विभोर हो गए।
नवरात्र के बाद आयोजित होने वाली रेलवे लाइनपार की बाल रामलीला में वनवास के समय पंचवटी में रह रहे राम, लक्ष्मण और सीता के पास रावण की बहन सूपर्णखा शादी का प्रस्ताव रखती है। उसके बार-बार विनती करने पर भी प्रभु राम उसे स्वीकार नहीं करते हैं तो वह अपने असली राक्षसी रूप में आ जाती है। इस पर लक्ष्मण उसके नाक और कान काट देते हैं। नाक-कान कटने पर वह अपने अपमान का बदला लेने के उद्देश्य से खरदूषण के पास जाती है। इस पर राम द्वारा उसका अंत कर दिया जाता है। खरदूषण की मृत्यु के बाद सूपर्णखां लंकापति रावण के पास जाती है और रो-रोकर अपना पूरा हाल बताती है। रावण अपनी बहन के नाक-कान कटे देखकर अपने मामा मारीच को अपने पास बुलाता है और योजना बनाता है।
मारीच स्वर्ण मृग बनकर सीता को रिझाता है और सीता के कहने पर राम उसे पकड़ने निकल पड़ते हैं। उधर, मृग रूपी मारीच राम की आवाज निकाल धोखे से लक्ष्मण को भी बुला लेता है और सीता के कहने पर लक्ष्मण रेखा खींचकर वह भी निकल पड़ते। साधू का रूप धारण कर रावण धोखे से सीता का हरण कर लेता है। तब राम-लक्ष्मण सीता की खोज में निकल पड़ते हैं। राम की लीलाओं का कलाकारों ने जीवंत मंचन किया। लीलाओं को देखने के लिए रामलीला मैदान में हजारों संख्या में दर्शक मौजूद थे। इससे पूर्व रामलीला का शुभारंभ मुख्य अतिथि इंस्पेक्टर राजीव यादव और डा. ब्रजपाल पौनियां ने श्रीराम-सीता व लक्ष्मण के स्वरूपों की आरती उतारकर किया। इस दौरान रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों ने उनका शॉल उढ़ाकर व फूलमालाएं पहनाकर स्वागत किया।
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नवरात्र के बाद आयोजित होने वाली रेलवे लाइनपार की बाल रामलीला में वनवास के समय पंचवटी में रह रहे राम, लक्ष्मण और सीता के पास रावण की बहन सूपर्णखा शादी का प्रस्ताव रखती है। उसके बार-बार विनती करने पर भी प्रभु राम उसे स्वीकार नहीं करते हैं तो वह अपने असली राक्षसी रूप में आ जाती है। इस पर लक्ष्मण उसके नाक और कान काट देते हैं। नाक-कान कटने पर वह अपने अपमान का बदला लेने के उद्देश्य से खरदूषण के पास जाती है। इस पर राम द्वारा उसका अंत कर दिया जाता है। खरदूषण की मृत्यु के बाद सूपर्णखां लंकापति रावण के पास जाती है और रो-रोकर अपना पूरा हाल बताती है। रावण अपनी बहन के नाक-कान कटे देखकर अपने मामा मारीच को अपने पास बुलाता है और योजना बनाता है।
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मारीच स्वर्ण मृग बनकर सीता को रिझाता है और सीता के कहने पर राम उसे पकड़ने निकल पड़ते हैं। उधर, मृग रूपी मारीच राम की आवाज निकाल धोखे से लक्ष्मण को भी बुला लेता है और सीता के कहने पर लक्ष्मण रेखा खींचकर वह भी निकल पड़ते। साधू का रूप धारण कर रावण धोखे से सीता का हरण कर लेता है। तब राम-लक्ष्मण सीता की खोज में निकल पड़ते हैं। राम की लीलाओं का कलाकारों ने जीवंत मंचन किया। लीलाओं को देखने के लिए रामलीला मैदान में हजारों संख्या में दर्शक मौजूद थे। इससे पूर्व रामलीला का शुभारंभ मुख्य अतिथि इंस्पेक्टर राजीव यादव और डा. ब्रजपाल पौनियां ने श्रीराम-सीता व लक्ष्मण के स्वरूपों की आरती उतारकर किया। इस दौरान रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों ने उनका शॉल उढ़ाकर व फूलमालाएं पहनाकर स्वागत किया।
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