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प्रशासन ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो होगा उग्र आंदोलन
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Mon, 06 Jul 2015 11:42 PM IST
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तहसीलदार के स्थानांतरण को लेकर अधिवक्ताओं की हड़ताल आठवें दिन शनिवार को भी जारी रही। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि सोमवार तक प्रशासन कोई निर्णय नहीं लेता, तो वे नई रूपरेखा तैयार कर उग्र आंदोलन करेंगे। तहसील में कोई भी कार्य न होने से वादकारी और बैनामा कराने वाले लोग खासे परेशान रहे।
वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र सिंह ने कहा कि प्रशासन अधिवक्ताओं की मांग को नहीं मान रहा है, जबकि फीरोजाबाद बार एसोसिएशन और रेवेन्यू बार एसोसिएशन भी उनके साथ है। ऐसे में जब तक तहसीलदार का स्थानांतरण नहीं होता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। अध्यक्ष सुभाष बाबू बघेल ने कहा कि प्रशासन को अधिवक्ताओं की मांग को हर हाल में मानना पड़ेगा, अन्यथा उनकी हड़ताल उग्र रूप लेगी। धरना-प्रदर्शन के दौरान तहसीलदार रामअवतार वर्मा के स्थनांतरण की मांग करते हुए नारेबाजी की गयी। अधिवक्ताओं, टाइपिस्ट, बैनामा लेखक, स्टांप वेंडर आदि सभी ने एकजुट होकर सोमवार से आंदोलन को नई रणनीति के तहत करने पर सहमति जतायी। इस दौरान इस मौके पर वेद प्रकाश भारद्वाज, रुमाल सिंह यादव, अशोक यादव, संजीव दीक्षित, चंद्रेश उपाध्याय, सुधाकर उपाध्याय, चोब सिंह आर्य, सलीम खां, मुकेश यादव, संतोष कुमार माहौर, दिनेश शर्मा, रघुवीर सिंह राजपूत, उमाशंकर निषाद, रामवीर सिंह, सुभाष शर्मा और रंजीत सिंह आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
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वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र सिंह ने कहा कि प्रशासन अधिवक्ताओं की मांग को नहीं मान रहा है, जबकि फीरोजाबाद बार एसोसिएशन और रेवेन्यू बार एसोसिएशन भी उनके साथ है। ऐसे में जब तक तहसीलदार का स्थानांतरण नहीं होता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। अध्यक्ष सुभाष बाबू बघेल ने कहा कि प्रशासन को अधिवक्ताओं की मांग को हर हाल में मानना पड़ेगा, अन्यथा उनकी हड़ताल उग्र रूप लेगी। धरना-प्रदर्शन के दौरान तहसीलदार रामअवतार वर्मा के स्थनांतरण की मांग करते हुए नारेबाजी की गयी। अधिवक्ताओं, टाइपिस्ट, बैनामा लेखक, स्टांप वेंडर आदि सभी ने एकजुट होकर सोमवार से आंदोलन को नई रणनीति के तहत करने पर सहमति जतायी। इस दौरान इस मौके पर वेद प्रकाश भारद्वाज, रुमाल सिंह यादव, अशोक यादव, संजीव दीक्षित, चंद्रेश उपाध्याय, सुधाकर उपाध्याय, चोब सिंह आर्य, सलीम खां, मुकेश यादव, संतोष कुमार माहौर, दिनेश शर्मा, रघुवीर सिंह राजपूत, उमाशंकर निषाद, रामवीर सिंह, सुभाष शर्मा और रंजीत सिंह आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
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