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Firozabad News: प्रशासन का दावा गैस की किल्लत नहीं, एजेंसियों पर फिर भी कतार
Sun, 22 Mar 2026 12:09 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Sun, 22 Mar 2026 12:09 AM IST
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एक एजेंसी पर लगा होम डिलेवरी का वैनर। संवाद
- फोटो : एक एजेंसी पर लगा होम डिलेवरी का वैनर। संवाद
फिरोजाबाद। प्रशासन भले ही रसोई गैस की किल्लत नहीं होने का दावा कर रहा हो। एजेंसी संचालकों ने भी होम डिलेवरी शुरू करने की बात कही हो। लेकिन उपभोक्ता एजेंसी के चक्कर लगाने को मजबूर है। क्योंकि किसी के मोबाइल पर सिलिंडर डिलीवर्ड का मैसेज पहुंच गया। उसको सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। जबकि उसके घर पर सिर्फ मैसेज पहुंचा बल्कि सिलिंडर नहीं पहुंच सका है। यदि सिलिंडर पहुंच गया होता तो वह एजेंसी तक दौड़ लगाने को विवश नहीं होता। इस समस्या की ओर प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है।
युद्ध के कारण उपजी रसोई गैस की किल्लत करीब एक सप्ताह बीतने को आ गया लेकिन अभी हल नहीं हो सकी। हालात यह है कि उपभोक्ता एजेंसियों के चक्कर लगाने को मजबूर है। एजेंसियों पर यदि पूर्ति विभाग के अधिकारी जाएं तो सभी कुछ ठीक दिखाई देता है। भीड़ भी तत्काल खत्म हो जाती है। इसके बाद देखा जाए तो खाली सिलिंडर लेकर एजेंसी के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। इस तरह के हालात एजेंसियों पर देखने को मिल रहे है। ग्राहक की कापी देखने के साथ जवाब होता है कि आपके 12 सिलिंडर उठ गए। अब एक अप्रैल को सिलिंडर मिलेगा। यह जवाब सुनकर उपभोक्ता चौंक जाता है कि आखिर उसने तो इतने सिलिंडर उठाए ही नहीं। फिर कौन उठा ले गया सिलिंडर। यह हाल किसी एक उपभोक्ता अथवा एजेंसी का नहीं बल्कि अधिकांश एजेंसियों पर यही स्थिति देखने को मिल रही है। क्योंकि सवाल यह है कि कमर्शियल सिलिंडर आ नहीं रहे हैं तो फिर बाजार में घरेलू एलपीजी की उपलब्धता कहां से हो रही है।
ढाई से तीन हजार में तत्काल मिलता है सिलिंडर
नाम नहीं छापने की शर्त पर एक होटल संचालक का कहना था कि वास्तव में गरीबों के लिए रसोई गैस की किल्लत है। लेकिन यदि ढाई से तीन हजार रुपया एक सिलिंडर पर खर्च करो तो तड़के और रात्रि को चाहो तो भी सिलिंडर मिल जाता है। इनकी बात पर भरोसा करें तो रसोई गैस की किल्लत यह कालाबाजारी के कारण ही हो रही है। इस पर अंकुश लगाने की जरूरत है।
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युद्ध के कारण उपजी रसोई गैस की किल्लत करीब एक सप्ताह बीतने को आ गया लेकिन अभी हल नहीं हो सकी। हालात यह है कि उपभोक्ता एजेंसियों के चक्कर लगाने को मजबूर है। एजेंसियों पर यदि पूर्ति विभाग के अधिकारी जाएं तो सभी कुछ ठीक दिखाई देता है। भीड़ भी तत्काल खत्म हो जाती है। इसके बाद देखा जाए तो खाली सिलिंडर लेकर एजेंसी के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। इस तरह के हालात एजेंसियों पर देखने को मिल रहे है। ग्राहक की कापी देखने के साथ जवाब होता है कि आपके 12 सिलिंडर उठ गए। अब एक अप्रैल को सिलिंडर मिलेगा। यह जवाब सुनकर उपभोक्ता चौंक जाता है कि आखिर उसने तो इतने सिलिंडर उठाए ही नहीं। फिर कौन उठा ले गया सिलिंडर। यह हाल किसी एक उपभोक्ता अथवा एजेंसी का नहीं बल्कि अधिकांश एजेंसियों पर यही स्थिति देखने को मिल रही है। क्योंकि सवाल यह है कि कमर्शियल सिलिंडर आ नहीं रहे हैं तो फिर बाजार में घरेलू एलपीजी की उपलब्धता कहां से हो रही है।
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ढाई से तीन हजार में तत्काल मिलता है सिलिंडर
नाम नहीं छापने की शर्त पर एक होटल संचालक का कहना था कि वास्तव में गरीबों के लिए रसोई गैस की किल्लत है। लेकिन यदि ढाई से तीन हजार रुपया एक सिलिंडर पर खर्च करो तो तड़के और रात्रि को चाहो तो भी सिलिंडर मिल जाता है। इनकी बात पर भरोसा करें तो रसोई गैस की किल्लत यह कालाबाजारी के कारण ही हो रही है। इस पर अंकुश लगाने की जरूरत है।
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