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सुहागनगरी में नई इकाइयां लगने की उम्मीद कायम
Amar Ujala
Updated Sat, 28 Jan 2017 01:11 AM IST
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सुहागनगरी के कांच उद्योग के लिए राहत भरी खबर है। उद्योग विभाग द्वारा पर्यावरण मंत्रालय को पुरानी 433 और वर्तमान में संचालित 201 इकाइयों का डाटा पर्यावरण मंत्रालय को भेजा गया है, जिसमें नई इकाइयां लगने की उम्मीद जगी है।
वर्ष 1996 से पूर्व फीरोजाबाद में 433 कांच इकाइयां थीं। हाईकोर्ट की रोक के बाद से फीरोजाबाद में ग्रीन गैस से इकाइयों का संचालन हो रहा है। कोयल के प्रयोग पर रोक लगने के बाद गेल गैस लि. द्वारा नो गैस जोन में गैस देने से इनकार कर दिया। इन उद्यमियों ने अपनी इकाइयां गैस जोन में स्थानांतरित कराईं। इसके बाद गेल ने गैस प्रदान की। वर्तमान में 198 इकाइयों को गैस मिल रही है। इसमें करीब पांच दर्जन इकाइयां क्षमता विस्तार कर चुकी हैं। इसके बावजूद वर्ष 1996 के सापेक्ष वर्तमान में कोयल की खपत से कम गैस खर्च हो रही है। पर्यावरण मंत्रालय के निर्देश पर उद्योग विभाग द्वारा लंबी कवायद के बाद पुरानी 433 और वर्तमान में संचालित 201 इकाइयों की कोल कैपेसिटी और गैस की खपत के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई है। इसमें यह तथ्य सामने आया है कि वर्ष 1996 की कोयल की खपत के सापेक्ष यहां कम गैस खर्च हो रही है। अत: यहां नई इकाइयां लगाने की संभावना बरकरार है।
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वर्ष 1996 से पूर्व फीरोजाबाद में 433 कांच इकाइयां थीं। हाईकोर्ट की रोक के बाद से फीरोजाबाद में ग्रीन गैस से इकाइयों का संचालन हो रहा है। कोयल के प्रयोग पर रोक लगने के बाद गेल गैस लि. द्वारा नो गैस जोन में गैस देने से इनकार कर दिया। इन उद्यमियों ने अपनी इकाइयां गैस जोन में स्थानांतरित कराईं। इसके बाद गेल ने गैस प्रदान की। वर्तमान में 198 इकाइयों को गैस मिल रही है। इसमें करीब पांच दर्जन इकाइयां क्षमता विस्तार कर चुकी हैं। इसके बावजूद वर्ष 1996 के सापेक्ष वर्तमान में कोयल की खपत से कम गैस खर्च हो रही है। पर्यावरण मंत्रालय के निर्देश पर उद्योग विभाग द्वारा लंबी कवायद के बाद पुरानी 433 और वर्तमान में संचालित 201 इकाइयों की कोल कैपेसिटी और गैस की खपत के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई है। इसमें यह तथ्य सामने आया है कि वर्ष 1996 की कोयल की खपत के सापेक्ष यहां कम गैस खर्च हो रही है। अत: यहां नई इकाइयां लगाने की संभावना बरकरार है।
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