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विश्व आत्महत्या बचाव दिवस पर विशेष: घट रही सहन शक्ति, किशोर भी कर रहे आत्महत्या
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फिरोजाबाद। दस सितंबर को विश्व आत्महत्या बचाव दिवस है। आजकल आत्महत्या करने की घटनाएं बढ़ीं हैं। सुहाग नगरी में किशोर भी आत्महत्या कर रहे हैं। जिले में प्रतिदिन आत्महत्या के केस सामने आ रहे हैं। 16 वर्ष से 35 वर्ष तक के लोग आत्महत्या अधिक कर रहे हैं। अगस्त माह में करीब 44 लोगों ने आत्महत्या की। इसमें सर्वाधिक फांसी लगाकर जाने देने वाले हैं। मनोविज्ञानी कहते हैं कि ऐसी घटनाओं को रोक सकते हैं, जरूरत है थोड़ा धैर्य रखने की है। कहा कि इच्छा और जरूरत के बीच सामंजस्य बनाने की जरूरत है।
-थाना नारखी के गढ़ी छत्रपति कॉलोनी निवासी किशोरी प्रियंका (16) ने 31 अगस्त की देर शाम घर में इसलिए आग लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली, क्योंकि उसके भाई ने झाड़ू लगाने की बात कह दी थी।
-नगला मिर्जा बड़ा निवासी रामवीर के इकलौते बेटे जितेंद्र उर्फ ईशू (15) मामूली बात पर कमरे में फांसी के फंदे पर लटक गया था।
- थाना दक्षिण के नगला मोती निवासी धर्मेंद्र पुत्र ओमप्रकाश फांसी के फंदे पर लटक गया। क्योंकि उसकी पत्नी मायके चली गई थी।
सुविधा छिनने पर घिर जाते अवसाद में
- मनोवैज्ञानिक डॉ. एबी चौबे कहते हैं कि आत्महत्या की घटनाओं को बढ़ने का सबसे बड़ा कारण आज लोगों में लग्जरी जीवन जीने की तमन्ना बढ़ना है। लोग सुविधा भोगी हो गए। सुविधा छिन जाए तो अवसाद से घिर जाते हैं और फिर आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं। सहनशक्ति की कमी आ गई। कष्ट उठाने की क्षमता घट गई है। जो इच्छा करें हासिल हो जाए ये संभव नहीं है। इसलिए इच्छा और जरूरत के बीच सामंजस्य बनाने की जरूरत है। अवसाद से घिरे व्यक्ति का परिजन ख्याल रखें, उसे अकेला नहीं छोड़ें।
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कोरोना काल में बढ़ा आर्थिक संकट भी वजह
- एसआरके इंटर कॉलेज के प्राचार्य एवं मनोवैज्ञानिक डॉ. प्रभाष्कर राय कहते हैं कि कोरोना संक्रमण के चलते परिवारों में आर्थिक संकट बढ़े हैं, परिवार में विवाद होने के साथ अवसाद का शिकार होने के कारण लोग ऐसा कदम उठाते हैं। क्योंकि आपस में प्रेम व विश्वास की कमी आई है। एक-दूसरे से लाभ लेने की सोच बढ़ी है। वह पूरी नहीं होने पर लोग ऐसा कदम उठाते हैं, इसके लिए धैर्य एवं विश्वास को बढ़ाना होगा।
-आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। लोगों की बर्दाश्त करने की क्षमता घट रही है। पिछले पांच माह में जिले में सौ से अधिक आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। इनमें महिलाएं मामले अधिक हैं।
राजेश कुमार, एसपी ग्रामीण।
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-थाना नारखी के गढ़ी छत्रपति कॉलोनी निवासी किशोरी प्रियंका (16) ने 31 अगस्त की देर शाम घर में इसलिए आग लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली, क्योंकि उसके भाई ने झाड़ू लगाने की बात कह दी थी।
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-नगला मिर्जा बड़ा निवासी रामवीर के इकलौते बेटे जितेंद्र उर्फ ईशू (15) मामूली बात पर कमरे में फांसी के फंदे पर लटक गया था।
- थाना दक्षिण के नगला मोती निवासी धर्मेंद्र पुत्र ओमप्रकाश फांसी के फंदे पर लटक गया। क्योंकि उसकी पत्नी मायके चली गई थी।
सुविधा छिनने पर घिर जाते अवसाद में
- मनोवैज्ञानिक डॉ. एबी चौबे कहते हैं कि आत्महत्या की घटनाओं को बढ़ने का सबसे बड़ा कारण आज लोगों में लग्जरी जीवन जीने की तमन्ना बढ़ना है। लोग सुविधा भोगी हो गए। सुविधा छिन जाए तो अवसाद से घिर जाते हैं और फिर आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं। सहनशक्ति की कमी आ गई। कष्ट उठाने की क्षमता घट गई है। जो इच्छा करें हासिल हो जाए ये संभव नहीं है। इसलिए इच्छा और जरूरत के बीच सामंजस्य बनाने की जरूरत है। अवसाद से घिरे व्यक्ति का परिजन ख्याल रखें, उसे अकेला नहीं छोड़ें।
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कोरोना काल में बढ़ा आर्थिक संकट भी वजह
- एसआरके इंटर कॉलेज के प्राचार्य एवं मनोवैज्ञानिक डॉ. प्रभाष्कर राय कहते हैं कि कोरोना संक्रमण के चलते परिवारों में आर्थिक संकट बढ़े हैं, परिवार में विवाद होने के साथ अवसाद का शिकार होने के कारण लोग ऐसा कदम उठाते हैं। क्योंकि आपस में प्रेम व विश्वास की कमी आई है। एक-दूसरे से लाभ लेने की सोच बढ़ी है। वह पूरी नहीं होने पर लोग ऐसा कदम उठाते हैं, इसके लिए धैर्य एवं विश्वास को बढ़ाना होगा।
-आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। लोगों की बर्दाश्त करने की क्षमता घट रही है। पिछले पांच माह में जिले में सौ से अधिक आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। इनमें महिलाएं मामले अधिक हैं।
राजेश कुमार, एसपी ग्रामीण।