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श्रीराम कथा सुनने के लिए उमड़े श्रद्धालु
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Thu, 19 Nov 2015 10:35 PM IST
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जब तक आत्मा का परमात्मा से मिलन नहीं होता, तब तक आत्मा को विभिन्न योनियों में भटकना पड़ता है। हम अपने मानव जीवन का सदुपयोग कर ईश्वर की भक्ति कर अपनी आत्मा का परमात्मा से मिलन कराएं तभी हमें मुक्ति मिल सकेगी। यह बात ठाकुर बीरी सिंह कालेज में चल रही श्रीराम कथा के दौरान आचार्य कौशिकजी महाराज ने अपने प्रवचन के दौरान कहीं।
उन्होंने कहा कि मानव शरीर बहुत ही पुण्य कर्म करने वालों को प्राप्त होता है। भगवान भी मानव जीवन जीने के लिए धरती पर अवतरित होते हैं। उन्होंने कहा कि एक मानव ही है जो अच्छे-बुरे की पहचान कर पाप-पुण्य में अंतर कर अपने जीवन को सार्थक बना सकता है। उन्होंने कहा कि कृष्ण ने मानव शरीर धारण किया और राधा आत्मा थीं। राधा का कृष्ण के प्रति प्रेम इस बात का द्योतक था कि आत्मा सदैव परमात्मा की प्राप्ति के लिए भटकती रहती है। उन्होंने कहा कि इस कलियुग में मनुष्य अगर ईश्वर के नाम का स्मरण या श्रवण कर ले तो उसको इस जीवन-मरण के चक्कर से मुक्ति मिल जाएगी और वह परमात्मा में विलीन हो जाएगा। इस दौरान श्रीराम की जन्म की लीला का वर्णन किया गया।
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उन्होंने कहा कि मानव शरीर बहुत ही पुण्य कर्म करने वालों को प्राप्त होता है। भगवान भी मानव जीवन जीने के लिए धरती पर अवतरित होते हैं। उन्होंने कहा कि एक मानव ही है जो अच्छे-बुरे की पहचान कर पाप-पुण्य में अंतर कर अपने जीवन को सार्थक बना सकता है। उन्होंने कहा कि कृष्ण ने मानव शरीर धारण किया और राधा आत्मा थीं। राधा का कृष्ण के प्रति प्रेम इस बात का द्योतक था कि आत्मा सदैव परमात्मा की प्राप्ति के लिए भटकती रहती है। उन्होंने कहा कि इस कलियुग में मनुष्य अगर ईश्वर के नाम का स्मरण या श्रवण कर ले तो उसको इस जीवन-मरण के चक्कर से मुक्ति मिल जाएगी और वह परमात्मा में विलीन हो जाएगा। इस दौरान श्रीराम की जन्म की लीला का वर्णन किया गया।
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