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दो दिन के लॉकडाउन के बाद आज दर्शन को खुलेंगे शिवालय
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पैमेश्वर गेट स्थित प्राचीन शिव मंदिर
- फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। सावन माह के दूसरे सोमवार को भी शिव भक्तों को मंदिर के अंदर प्रवेश करने के लिए पहले गेट पर इंतजार करना होगा। सामाजिक दूरी का पालन कराते हुए मंदिर के अंदर दो-दो श्रद्धालुओं को ही प्रवेश दिया जाएगा। जिससे कोरोना संक्रमण से बचाव किया जा सके। इसके साथ ही आम भक्तों को भगवान शिव की शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का मौका नहीं मिलेगा। दर्शन भी दूर से कराए जाएंगे। दो दिन के लॉकडाउन के बाद आज भक्तों के दर्शन के लिए शिवालय खुलेंगे। मोहल्ला गंज स्थित सिद्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर के महंत राममोहन शर्मा ने बताया कि जो व्यवस्थाएं सावन माह के प्रथम सोमवार को थी। वही व्यवस्थाएं दूसरे सोमवार को भी लागू रहेंगी। मंदिर के अंदर पांच-पांच भक्तों को प्रवेश दिया जाएगा।
मंदिर के अंदर प्रवेश करने के साथ ही शिव भक्तों को अपने हाथों को सैनिटाइजर से धोना होगा। उसके बाद ही जलाभिषेक के साथ पूजा-अर्चना करने दी जाएगी। जबकि कैला देवी मंदिर के समीप बने शिव मंदिर की भी व्यवस्थाओं में किसी तरह का परिवर्तन नहीं किया गया है। मंदिर महंत मदनराज पंत ने बताया कि भगवान शिव की शिवलिंग पर जल आदि नहीं चढ़ाने दिया जाएगा। शिव भक्त सामाजिक दूरी का पालन करते हुए दूर से ही भगवान शिव के दर्शन कर सकते हैं। पैमेश्वरनाथ महादेव मंदिर के महंत नरेश चंद्र पाराशर ने बताया कि मंदिर का बड़ा गेट बंद रहेगा। छोटे गेट से दो-दो श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जाएगा। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सामाजिक दूरी का विशेष रूप से पालन कराया जाएगा।
पेमेश्वरनाथ महादेव मंदिर का इतिहास
फिरोजाबाद। पेमेश्वरगेट के समीप बना पेमेश्वर नाथ महादेव मंदिर अंग्रेजों के जमाने का है। मंदिर महंत नरेश चंद्र पाराशर का कहना है कि मंदिर के अंदर एक गुफा है। उस गुफा में अब मां काली का मंदिर बना दिया गया है। इस गुफा में पहले साधू संत रहा करते थे। अंग्रेेजों से लोहा लेते समय शहीद चंद्रशेखर आजाद ने इसी गुफा में करीब 25 से 30 दिन अज्ञातवास काटा था। पहले यहां गुफा मिट्टी की थी अब इसको पक्का करा दिया गया है। इतना ही नहीं जब दिल्ली हावड़ा रेलवे लाइन को डाला जा रहा था। तब भी मंदिर था। रेलवे ट्रेक को सीधा डालने के दौरान मंदिर की जमीन जा रही थी। इसका विरोध हुआ था। उसके बाद निर्णय लिया गया कि रेलवे ट्रैक को घुमाकर रेलवे लाइन को डाला जाए। तब आसफाबाद फाटक के बाद रेलवे ट्रैक को घुमाया गया था, जो आज भी घूमा हुआ है। सोमवार और बृहस्पतिवार को यहां काफी संख्या में श्रद्घालु पूजा अर्चना के आते है।
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मंदिर के अंदर प्रवेश करने के साथ ही शिव भक्तों को अपने हाथों को सैनिटाइजर से धोना होगा। उसके बाद ही जलाभिषेक के साथ पूजा-अर्चना करने दी जाएगी। जबकि कैला देवी मंदिर के समीप बने शिव मंदिर की भी व्यवस्थाओं में किसी तरह का परिवर्तन नहीं किया गया है। मंदिर महंत मदनराज पंत ने बताया कि भगवान शिव की शिवलिंग पर जल आदि नहीं चढ़ाने दिया जाएगा। शिव भक्त सामाजिक दूरी का पालन करते हुए दूर से ही भगवान शिव के दर्शन कर सकते हैं। पैमेश्वरनाथ महादेव मंदिर के महंत नरेश चंद्र पाराशर ने बताया कि मंदिर का बड़ा गेट बंद रहेगा। छोटे गेट से दो-दो श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जाएगा। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सामाजिक दूरी का विशेष रूप से पालन कराया जाएगा।
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पेमेश्वरनाथ महादेव मंदिर का इतिहास
फिरोजाबाद। पेमेश्वरगेट के समीप बना पेमेश्वर नाथ महादेव मंदिर अंग्रेजों के जमाने का है। मंदिर महंत नरेश चंद्र पाराशर का कहना है कि मंदिर के अंदर एक गुफा है। उस गुफा में अब मां काली का मंदिर बना दिया गया है। इस गुफा में पहले साधू संत रहा करते थे। अंग्रेेजों से लोहा लेते समय शहीद चंद्रशेखर आजाद ने इसी गुफा में करीब 25 से 30 दिन अज्ञातवास काटा था। पहले यहां गुफा मिट्टी की थी अब इसको पक्का करा दिया गया है। इतना ही नहीं जब दिल्ली हावड़ा रेलवे लाइन को डाला जा रहा था। तब भी मंदिर था। रेलवे ट्रेक को सीधा डालने के दौरान मंदिर की जमीन जा रही थी। इसका विरोध हुआ था। उसके बाद निर्णय लिया गया कि रेलवे ट्रैक को घुमाकर रेलवे लाइन को डाला जाए। तब आसफाबाद फाटक के बाद रेलवे ट्रैक को घुमाया गया था, जो आज भी घूमा हुआ है। सोमवार और बृहस्पतिवार को यहां काफी संख्या में श्रद्घालु पूजा अर्चना के आते है।
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