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UP: जेएस यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द...15 हजार छात्रों के भविष्य को लेकर बड़ा फैसला, अब यहां पढ़ेंगे

Tue, 06 Jan 2026 08:47 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Published by: अरुन पाराशर Updated Tue, 06 Jan 2026 08:47 PM IST
सार

यूपी कैबिनेट की बैठक में मंगलवार को बड़ा फैसला लिया गया। शिकोहाबाद की जेएस यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही 15 हजार से अधिक विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर भी निर्णय लिया गया है।

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recognition of JS University in Shikohabad has been revoked, students will now study at agra university
जेएस यूनिवर्सिटी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जेएस यूनिवर्सिटी, शिकोहाबाद (फिरोजाबाद) के संबंध में किए निर्णय में छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखा गया है। इस विवि में वर्तमान में करीब 15 हजार विद्यार्थी अध्यनरत हैं। इनके भविष्य को देखते हुए सरकार ने निर्णय लिया है कि जेएस विवि का संचालन अब आगरा स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय संभालेगा।
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जेएस विवि के प्रशासन पर आरोप है कि नियमों को तोड़ते हुए बीपीएड पाठ्यक्रम की फर्जी और बैकडेट में अंकतालिकाएं व डिग्रियां जारी कीं गईं। इन फर्जी डिग्रियों का उपयोग राजस्थान शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 में चयन के लिए किया गया। राजस्थान पुलिस की जांच के बाद विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और कुलसचिव की गिरफ्तारी भी हुई थी। इसके अलावा विश्वविद्यालय के पास मानक के अनुरूप 40 एकड़ भूमि होनी चाहिए थी, लेकिन मौके पर केवल 35.637 एकड़ ही पाई गई। इसके अलावा यह भी आरोप है कि छात्रों के प्रवेश, परीक्षा परिणाम और डिग्रियों का विवरण उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद को नियमित रूप से नहीं भेजा गया।
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आगरा विश्वविद्यालय को जिम्मेदारी
जेएस विश्वविद्यालय के सभी शैक्षणिक और प्रशासनिक अभिलेख अब डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा को सौंपे जाएंगे। अब तक जारी की गई सभी डिग्रियों और अंकतालिकाओं की गहन जांच आगरा विश्वविद्यालय द्वारा की जाएगी, ताकि वास्तविक और फर्जी छात्रों की पहचान हो सके। परिसमापन की अवधि में कार्यों के संचालन के लिए तीन सदस्यीय अंतरिम समिति गठित की गई है, जो प्रशासनिक कार्य देखेगी।
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जेएस विवि की ओर से कोई बयान नहीं
इस मामले में कैबिनेट की ओर से लिए गए फैसले पर जेएस विवि से जुड़े प्रबंधन व प्रशासन ने कोई भी बयान जारी नहीं किया है। हालांकि बताया जा रहा है कि प्रबंधन और प्रशासन को कैबिनेट के फैसले के बारे में जानकारी हो गई है और विविध राय पर विचार कर रहा है।

 

घबराएं नहीं विद्यार्थी
जेएस विवि के 15 हजार से अधिक विद्यार्थियों को जब इस मामले की जानकारी मंगलवार देर शाम तक हो गई तो उनमें खलबली मच गई। कई विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों ने यहां-वहां फोन करना भी शुरू कर दिया। विवि प्रशासन और प्रबंधन से भी विद्यार्थियों की वार्ता होना बताया जा रहा है। विवि से जुड़े कुछ लोगों ने बताया कि विद्यार्थियों को बताया गया है कि उनका भविष्य सुरक्षित है।

फर्जी डिग्री देने पर जेएस विवि शिकोहाबाद की मान्यता रद्द
बैक डेट में बीपीएड पाठ्यक्रम में प्रवेश देकर फर्जी अंकतालिका व डिग्री जारी करने और अभियुक्तों के साथ संगठित अपराध के रूप में काम करने पर जेएस विश्वविद्यालय शिकोहाबाद, फिरोजाबाद की मान्यता प्रदेश सरकार ने रद्द करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट ने मंगलवार को इससे जुड़े उच्च शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को स्वीकृति दी। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि विभाग की जांच में यह सामने आया कि विश्वविद्यालय द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए बीपीएड पाठ्यक्रम की फर्जी और बैक डेट में मार्कशीट व डिग्रियां जारी की गईं। इनका प्रयोग राजस्थान की 'शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022' में चयनित अभ्यर्थियों द्वारा किया गया। 
 

इस प्रकरण में राजस्थान पुलिस की जांच व शासन स्तर पर गठित जांच समितियों की आख्या में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। वहीं, इस मामले में कुलाधिपति व कुलसचिव की गिरफ्तारी हो चुकी है। मंत्री ने बताया कि जेएस विश्वविद्यालय द्वारा अधिनियम की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन किया गया है। इसमें डिग्री देने की शक्ति के दुरुपयोग, संगठित अपराध के रूप में फर्जी अंकतालिकाओं व डिग्रियों का वितरण, आवश्यक भूमि मानक का पालन न करना तथा उच्च शिक्षा परिषद को अनिवार्य विवरण उपलब्ध न कराना भी शामिल है। इन सभी तथ्यों को देखते हुए प्रदेश सरकार ने जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद की मान्यता रद्द करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही विश्वविद्यालय के सभी अभिलेख डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के संरक्षण में रखे जाएंगे। उन्हीं अभिलेखों के आधार पर पूर्व में जारी मार्कशीट व डिग्रियों का प्रमाणीकरण किया जाएगा। साथ ही, मान्यता रद्द होने की अवधि के दौरान विश्वविद्यालय की गतिविधियों के संचालन हेतु धारा 55 (6) के तहत तीन सदस्यीय अंतरिम समिति गठित करने का भी विभाग ने निर्णय लिया है।

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